चुनावी चक्कलस @ नगरीय निकाय चुनाव…..नामांकन दाखिल का अंतिम दौर

भाजपा नेता ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ उतारा वार्ड नंबर 1 धनपुरी से निर्दलीय प्रत्याशी

कौन कहता है कि भाजपा रीति और नीति के लिए जानी जाती है परन्तु जैसे ही अरसे के बाद नगरपालिका धनपुरी में चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा के ही नेता अपने ही पार्टी के विरुद्ध निर्दलीय नेता को वार्ड नंबर 1 से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उतार दिया।

भाजपा नेता और भाजपा पदाधिकारी के बागी तेवर सामने आ रहे हैं कभी भाजपा की प्रतिज्ञा से प्रतिबद्ध कार्यकर्ता अपनी पार्टी के लिए और चुनाव जीतने के लिए एड़ी चोटी का भी जोर लगा देते थे और वहीं भाजपा के नेता ने निर्दलीय प्रत्याशी अजय कुशवाहा का नामांकन वार्ड नंबर 1 से खुद जाकर भर दिया, अब कहां गई भाजपा की रीति नीति…?

अजय कुशवाहा की राह भी इतनी आसन नहीं है, अजय के पीछे का मास्टरमाइंड स्वयं भाजपा पदाधिकारी है,ये वही पदाधिकारी है जो टैक्स चुकाने के बदले भूख हड़ताल पर बैठ गए,अपने राजनैतिक गुरु को भी नही छोड़ा,तो भला पार्टी को कैसे छोड़ दे।

*तो क्या भाजपा दिखाएगी बागी को बाहर का रास्ता*
भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक तो ऐसे बागियों को बाहर का रास्ता दिखाया है पर न जाने इस पदाधिकारी में कौन सा अमृतकुंड है जो बार बार पार्टी की रीति और नीति से हटकर पार्टी विरोधी कार्य और भाजपा शासन में ही हड़ताल पर महगूल है,अब देखना है की दौलत की जीत पर क्या भाजपा पदाधिकारी बनेगा रोड़ा।
अब तो दौलत भईया के लिए यही शेर है – *आग का दरिया है और डूब के जाना है..?

अब तो केवल ये देखना बाकी है की जिलाध्यक्ष के करीबी माने जाने वाले मीडिया प्रभारी जी को पार्टी बाहर का रास्ता दिखाएगी या सहेज के रखेगी।

*वार्ड नंबर 1 से और भी दावेदार*
वार्ड नंबर 1 के दावेदार में सबसे आगे जो चल रहे थे वो बुंदेलखंड से आए हुए बुंदेली राजा जितेंद्र यादव हैं हालाकि इनका भाजपा से कोई दूर दूर का नाता नहीं है,इनका नाम भी सुर्खियों में है और इनको शराब माफिया, रेत माफिया से मेल जोल और थानों के चक्कर काटते देखा जा सकता है फिर भी ये अपनी किस्मत आजमाने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आए हैं सुनने में तो ये भी आता है की एक बार बुढार थाना प्रभारी जी ने बुंदेली राजा को रंक बना दिया था और पूरे शहर में डंका पिटवा दिया था, हा ये बात जरूर है की यूवाओ में बुंदेली राजा का अच्छा संपर्क परंतु भाजपा के विरोध में जितेंद्र यादव कभी निर्दलीय नही आयेंगे।
वही भाजपा पिछड़ा वर्ग के मोहन वर्मा ने भी अपनी पूरी ताकत टिकट के लिए लगा दी परंतु गुरु के आते ही मोहन भाई टाय टाय फिस हो गए पर मोहन का वार्ड में अच्छा वर्चस्व था,सामाजिक था यूवाओ में पकड़ थी और चुनाव भी निकल सकता था परंतु पार्टी ने बाहरी व्यक्ति को उतारकर एक और विरोधी बना लिया जो अंदर ही अंदर अपना खेल खेलेगा चलो कोई बात नहीं पार्टी गई तो कोई बात नहीं परंतु गुरु के आदेश का पालन चेले ने किया ये ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अब इंतजार है बागी को बाहर का रास्ता दिखाएगी पार्टी या दौलत को टिकट देकर महाभारत का आगाज करेगी पार्टी…?

क्या भाजपा जिला अध्यक्ष कार्यवाही करेंगे या फिर पार्टी में भी लाल फीता शाही का दौर चालू हो जायेगा,यदि ऐसा होता है तो ये छोटे और झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता का विश्वास भाजपा से जल्द ही खोने का खतरा बना रहेगा, यदि यही कृत्य कोई पार्टी का अदना सा कार्यकर्ता करता तो उस पर अब तक अनुशासनात्मक कार्यवाही हो जाती,अब भला मीडिया प्रभारी के ऊपर कौन हिम्मत करेगा।

*निर्दलीय उम्मीदवार कर सकते हैं वार्ड नंबर 1 धनपुरी की हार जीत का का निर्णय*

वार्ड नंबर 1 की यदि बात करें तो यहां से भाजपा प्रत्याशी दौलत मनवानी की टिकट लगभग तय मानी जा रही है,परंतु अन्य वार्ड से आए हुए प्रत्याशी को क्या वार्ड की जनता चुनेगी,क्या वार्ड की जनता उन्हें अपना जन प्रतिनिधि मानेगी, दबी जुबान से लोग कहते दिखे कि क्या वार्ड नंबर 1 से कोई प्रत्याशी नहीं मिला जो बाहरी प्रत्याशी को लाकर बैठा दिया गया,वैसे दौलत ने भी कर्म कौशलता में कोई कमी नहीं की है और वार्ड लगभग 3 वार्डों से अपनी किस्मत आजमाने मे लगे थे,परंतु मनवानी जी ने शतरंज की बिसाद बिछाकर प्यादे से शुरू हुआ सफर से अपनी टिकट तय होते दिख रही है,पर दौलत किसके दम पर वार्ड 1 से किस्मत आजमाएंगे।

वार्ड नंबर 1 से ही सामाजिक कार्यकर्ता,युवा शिक्षित प्रत्याशी शैलेंद्र सराफ भी अपनी किस्मत आजमाएंगे, इनकी छबि युवा,मिलनसार,सहयोगी और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है युवाओ में अच्छी है और उनकी टीम में भी यूवाओ की कमी नही है, यदि इनको नही रोका गया तो भाजपा को भारी नुकसान भी हो सकता है।

वही दूसरी ओर भाजपा के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपने करीबी अजय कुशवाहा को प्रत्याशी बना दिया है

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