बकाया वसूलने में विद्युत विभाग को आ रहे पसीने

शासकीय सहित निजी उपभोक्ताओं पर 50 करोड़ के बिल बकाया

अकेले सहायक आयुक्त कार्यालय का एक करोड़ सात लाख का बिल

(नरेन्द्र यादव+9826550631)

शहडोल। वित्तीय वर्ष को समाप्त होने की अंतिम तिथि जैसे-जैसे नजदीक आती जा रही है, वैसे-वैसे विद्युत वितरण लिमिटेड कंपनी में बैठे अधिकारियों की परेशानियां बढ़ती जा रही है, विभागीय सूत्रों पर यकीन करें तो, मार्च माह में लगभग 15 करोड़ रूपये बिल वसूलने का लक्ष्य रखा गया था, विभाग अपने स्तर पर शासकीय व निजी उपभोक्ताओं को लगातार नोटिस भी भेज रहा है, यही नहीं कनेक्शन काटने के साथ अन्य दबाव की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है, अचरज की बात तो यह है कि दर्जन भर शासकीय कार्यालयों के ही करोड़ों रूपये शासन के खाते में जमा होने हैं, लेकिन कहीं बजट कमी, तो कही अधिकारियों की लापरवाही इसमें रोड़ा बन रही है।
दो विभाग, सवा दो करोड़
निजी उपभोक्ताओं पर तो, विद्युत विभाग नोटिस तथा कनेक्शन काटकर दबाव बना रही है और किसी न किसी तरह भुगतान धीरे-धीरे ही सही प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन सरकारी विभागों पर भी करोड़ों का बिल बाकी है, बिजली कंपनी का वित्तीय वर्ष समाप्त होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गये हैं, ऐसे में खाली पड़े शासकीय विभागों के खजाने से करोड़ों रूपये की वसूली अब दूर की कौड़ी नजर आ रही है,अकेले सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग पर 1 करोड़ 7 लाख रूपये का बकाया है, वहीं जल प्रदाय पर 1 करोड़ 8 लाख, शिक्षा विभाग पर 21 लाख 11 हजार, स्वास्थ्य विभाग पर 9 लाख 72 हजार, जल संसाधन पर 15 लाख 3 हजार, वन विभाग पर 5 लाख 10 हजार, पीडब्लयूडी पर 5 लाख 73 हजार और पुलिस विभाग पर 13 लाख बकाया हैं।
इन पर भी करोड़ों का बकाया
शासन के द्वारा काश्तकारों को सिंचाई हेतु दिये गये पम्प कनेक्शन के भी करोड़ों के भुगतान बाकी है, विभागीय सूत्रों पर यकीन करें तो सिंचाई हेतु बांटे गये कनेक्शनधारियों से 1 करोड़ 7 लाख रूपये का बकाया है,औद्योगिकों के कनेक्शनों का 1 करोड़ 94 लाख का बिल है, वहीं गैर घरेलू उपभोक्ताओं से 4 करोड़ 71 लाख की वसूली शेष है।
लक्ष्य को भेदने में लगे जिम्मेदार
अकेले विद्युत विभाग शहडोल अंतर्गत विभिन्न विकास खण्डों में दिये गये विद्युत कनेक्शनों से 50 करोड़ की राशि लेना अभी शेष है, हालाकि पूरा विभाग अभी मार्च के लक्ष्य को भेदने में अपनी ऊर्जा लगाये हुए है, शासकीय उपभोक्ताओं के अलावा पूर्व में रिलायंस सहित दर्जनों नेताओं व व्यापारियों के भी लाखों के बिल पेडिंग बताये गये थे।

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