रोजगार सहायक मांग रहा 10 हजार की रिश्वत

प्रधानमंत्री आवास की नहीं मिली तीसरी किस्त

जैतपुर। जनपद पंचायत बुढार के ग्राम पंचायत खोढरी में 2016-17 में मिली प्रधानमंत्री आवास का अभी तक यानी  2021-22 में भी काम पूरा नहीं हो पाया है, इसका मुख्य कारण लाभार्थी से रोजगार सहायक के द्वारा 10000 रुपये की मांग की जा रही थी और अभी तक काम पूरा ना होने के कारण प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थी को पुरानी मिट्टी के घर में ही रहना पड़ रहा है, कहीं ऐसा तो नहीं की वंचितों के प्रति पूर्वाग्रह की मानसिकता से ग्रसित भावनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। आवास के लाभार्थी संजय लाल एवं उसके पिता बाबूलाल भरिया जोकि गरीब वर्ग से आते हैं, जिन का भरण-पोषण अपनी मेहनत मजदूरी से होती है, उनसे इस तरह की पैसे की मांग करना कितना जायज है।
बाबू लाल एवं  संजय लाल द्वारा बताया गया कि रोजगार सहायक ने हम दोनों से दस दस हजार रुपए की मांग की और कहा की अपने छत की ढलाई अपने बेटे के आवास के छत के पैसे से करा लो और जब पैसा निकल जाएगा, तो बेटे का भी छत ढल जाएगा, बाद में बाबूलाल के द्वारा अपने छत की ढलाई मेहनत मजदूरी के पैसे से करा ली गई और पैसा बाद में नहीं निकल पाया। आखिर गरीब इतना पैसा कहां से लाया होगा किस से कर्ज मांग कर वह अपनी आवश्यकता की पूर्ति किया जबकि उसकी घर की पूरी आवश्यकता योजना के तहत मिले पैसे से पूरी हो सकती थी।
उनके घर की छपाई भी नहीं हो पाई  क्योंकि छपाई का पैसा भी रोक दिया गया। आखिर आवास के लाभार्थियों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है, क्यों उनसे जबरन पैसे की मांग की जा रही है? क्या सरकार द्वारा रोजगार सहायक शाहिद खान को तनख्वाह नहीं दी जा रही है या शाहिद खान पर ऊपर से किसी प्रकार से अधिकारियों का दबाव रहता है। आखिर क्यों प्रत्येक सरकारी योजनाओं मैं बंदरबांट जैसी मानसिकता लाई जा रही है और अगर लाभार्थी पैसे देने से मना करता है तो उसे उसके लाभ से वंचित करने की धमकी दी जाती है क्या स्वतंत्र रूप से वह अपने अधिकार को पाने का हकदार नहीं है । 4 से 5 वर्ष होने को है अभी तक आवास का निर्माण नहीं हो सका, उस गरीब लाभार्थी के मन में या उसका भाव सरकार के प्रति किस तरह के विकृतियों भरेगा यह आप अच्छी तरह से समझते हैं। वे गरीब वर्ग से आते हैं जिन का भरण पोषण अपनी मेहनत मजदूरी से होती है उनसे इस तरह की पैसे की मांग करना कितना जायज है।  क्या रोजगार सहायक अपने दायित्व को भुला चुके हैं या गरीबों के शोषण की मनसा से अपने दायित्व को पूरा करने में लगे हुए हैं।
क्या रोजगार सहायक के अंदर वंचित वर्ग के प्रति थोड़ी सी भी संवेदनशीलता है अगर उसके पास अपने पैसे होते तो वह पहले से ही एक शानदार घर बनवा कर रखता।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्र के आम जनमानस जिसके पास रोटी, कपड़ा, मकान जैसी मूलभूत ढांचागत संरचनाओं को पूरा करने की भागीरथी प्रयास जारी है जिससे राष्ट्र सशक्तआत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनें, दूसरी तरफ भ्रष्टाचार और कुशासन की वजह से इन लक्ष्यों को प्राप्त करना उतना ही मुश्किल लग रहा है। अत: प्रशासन इस पर ध्यान केंद्रित कर लाभार्थियों, वंचितों, गरीबों के साथ न्याय एवं दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करें।

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