लाक डाउन के दौरान ग्राम पंचायत असोढ़ में लौटे 57 प्रवासी श्रमिको को मनरेगा से उपलब्ध कराया गया रोजगार

राकेश सिंह
उमरिया । कोरोना संक्रमण के कारण जारी लाक डाउन के दौरान जिले की असोढ ग्राम पंचायत के 57 श्रमिक जो प्रदेश के बाहर हरियाणा, गुजरात, सूरत, महाराष्ट्र, मुंबई, उत्तरप्रदेश आदि राज्यों में छोटे छोटे उद्योगों में कार्य करके आजीविका चला रहे थे। अपने अपने गृह ग्राम में वापस लौटे। इन श्रमिकों को घर वापसी के दौरान रोजी, रोटी की चिंता सता रही थी। प्रदेश सरकार द्वारा प्रवासी श्रमिकों को प्राथमिकता के साथ मनरेगा योजना से रोजगार उपलब्ध करानें की रणनीति ने इन श्रमिकों की सभी चिंताएं दूर कर दी। इन श्रमिकों को जहां प्रदेश सरकार द्वारा घर वापसी की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई वहीं मनरेगा योजना के तहत प्राथमिकता के साथ उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया गया। उत्तरप्रदेश से लौटे रोहित, राहुल कोल, जगत कोल, राम सजीवन लक्ष्मण बर्मन , छोटे लाल आदि ने बताया कि घर वापसी के पश्चात ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव तथा रोजगार सहायक द्वारा सर्व प्रथम स्की्रनिंग कराई गई तथा 14 दिनों तक क्वारेंटाईन की व्यवस्था की गई।

इस दौरान सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई। 57 प्रवासी श्रमिकों में से 35 प्रवासी श्रमिकों के जाब कार्ड नही बने थे । प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशानुसार सभी श्रमिकों के ग्राम पंचायत द्वारा तत्परता के साथ नये जाब कार्ड बनाए गए । ग्राम पंचायत में इन श्रमिकों को रोजगार देने हेतु मनरेगा योजना से नये कार्य संचालित किए गए। बैकों में इन श्रमिको के खातें नही होने की समस्यां का भी निराकरण पंचायत सचिव एवं रोजगार सहायक द्वारा किया गया। ग्राम स्तर पर चल रहे कियोस्क बैंक में बैंक मित्र के सहयोग से इनके खाते खुलवाए गए जिससे मनरेगा मजदूरी का भुगतान उनके खातों में किया जा सकें ।

प्रदेश सरकार द्वारा प्रवासी श्रमिकों की मदद हेतु चलाए जा रहे अभियान के तहत प्राथमिकता क्रम में जहां इन्हें मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराया गया वहीं जिन श्रमिको के पास स्वयं की भूमि थी उनके खेतो में खेत तालाब, मेढ बंधान जैसी हितग्राहीमूलक योजनाओ का लाभ दिलाया गया। जिससे ये अप्रवासी श्रमिक अपनी जमीन में खेती कर सके। प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का ग्राम पंचायत द्वारा निराकरण किया जा रहा है साथ ही इन्हें 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध करानें की कार्य योजना भी ग्राम पंचायत द्वारा बनाई गई है।

प्रवासी श्रमिकों का कहना है कि लाक डाउन के दौरान जब हम लोगों को विभिन्न प्रदेशों को छोडना पडा था तब मन में सिर्फ एक ही चिंता थी कि मेरा मेरे परिवार का भविष्य कैसे संचालित होगा। आजीविका के साधन कहां मिलेगे । श्रमिको का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार ने हमारी चिंता के पूर्व ही सारी परिस्थितियों का आकलन करते हुए अपनी कार्य योजना बना ली थी। घर वापसी के बाद किसी भी तरह की समस्यां का सामना नही करना पडा। हम सब प्रदेश सरकार तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आभारी है।

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