शासकीय भूमि से नहीं हटाये जा रहे अतिक्रमण

कार्यवाही के नाम पर केवल नोटिस, भू-माफियाओं को मिल रहा संरक्षण

ब्योहारी। नगरीय क्षेत्र में रसूखदार भू-माफिया सरकारी जमीनों पर अबैध कब्जा कर इमारत तान रहे हैं, यहां का जिम्मेदार विभागीय अमला अतिक्रमणकारियों से सांठगांठ कर यहां की लाइमलोकेशन वाली बेश कीमती जमीनों पर किये गये अतिक्रमण पर कार्यवाही के नाम पटवारी प्रतिवेदन पर तहसील कार्यालय से भू-राजस्व अधिनियम की धारा 248 के तहत अतिक्रमणकारी को नोटिस जारी कर नाममात्र का जुर्माना लगा मामले को स्थगित करने के आरोप राजस्व अमले पर अक्सर लगते रहे है। नगरीय क्षेत्र के मेनरोड की लाइम लोकेशन वाली बेश कीमती सरकारी जमीन, वनभूमि, सार्वजनिक निस्तारण की, मंदिर, तालाब, धर्मशाला आदि की संरक्षित जमीनों पर स्थानीय रसूखदार भू-माफिया अवैध कब्जा कर उसमें अपना निजी निर्माण करा शासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नगरीय क्षेत्र के रीवा-शहडोल रोड किनारे की प्रमुख भूमियां जिसमें बनविहार ढावा के सामने, कई एकड़ लम्बी-चौड़ी शासकीय जमीन पर कुछ लोगों के द्वारा अवैध कब्जा कर उसमें पक्क ानिर्माण कराया गया है। वहीं वार्ड क्र.-9 न्यू बरौधा की कई एकड शासकीय भूमि जिसमें स्कूल मैदान, नाला और पहाड़ी तक शामिल हैं। जिसमें अवैध कब्जा कर उसकी नोटरी के माध्यम से नाजायज तरीके से खरीदी-बिक्री भी की जा रही है।
यहां हो रहा अवैध अतिक्रमण
मुख्य सड़क के किनारे वन विभाग कार्यालय और थाने से लगी भूमि, भारतीय स्टेट बैंक के सामने पुरानी जंगल चौकी की जमीन जिसमें पूर्व निर्मित खंडहर, आवासों और बाउंड्री के ऊपर दो मंजिला भवन जिसमें लगभग दो दर्जन दुकानों का निर्माण लघुवनोपज समिति से सम्बंधित व्यक्ति के द्वारा निजी बता वहां धडल्ले से तीसरी मंजिल का निर्माण कराया जा रहा है। दूसरा मामला रीवा-शहडोल मार्ग किनारे मार्तण्डगंज स्थित नगर का एक मात्र सार्वजनिक धर्मशाला जिसके चारो तरफ भू-माफिया ने अवैध कब्जा कर इस पुराने सार्वजनिक धर्मशाला के अस्तित्व का नामोंनिशान मिटाया जा रहा है। यहां के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और व्याप्त भ्रष्टाचार के चलते अब धर्मशाला पूरी तरह गायब ही हो गया है।
कराया दुकानों का निर्माण
वहीं नगर के हृदयस्थल और प्रमुख चौराहा बनसुकली चौराहा से नगरपालिका कार्यालय तक पुरानी नेहरु बालमंदिर स्कूल की लम्बी-चौडी जमीन पर वर्षो से कुछ लोगों द्वारा कब्जा कर वहां अवैध तरीके से दुकाने बना अतिक्रमण किये है। कुछ तो किराए से भी चला रहे हैं। जो स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बनें हुए हंै। शासकीय भूमियों पर अवैध अतिक्रमण पर स्थानीय प्रशासन कार्यवाही का दाबा तो करता है पर भूमि से अतिक्रमणकारी को बेदखल करने में उसे पसीना छूट जाता है। लोगों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन अतिक्रमण पर नोटिस तो जारी करता है पर कार्यवाही के नाम सम्बंधित से सांठ-गांठ कर महज नाममात्र का जुर्माना जमा करा मामला स्थगित कर दिया जाता है। यहां पदस्थ प्रशासनिक अमले की अनदेखी और संदिग्ध कार्यप्रणाली व कानूनी दावपेंच का सहारा ले यहां का रसूखदार भू-माफिया बेखौफ हो अपने काम को अंजाम दे रहा है। मुख्य मार्ग के किनारे की सरकारी भूमियों का रकबा धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है।
सांठगांठ का चल रहा खेल
नियमों की अनदेखी कर यहां की बेशकीमती सरकारी जमीनों पर भू-माफिया अपने रसूख के चलते अवैध कब्जा कर आलिशान इमारत तान रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा जिम्मेदार अधिकारियों की सांठ-गांठ के कारण यहां के भूमाफिया को अभयदान मिल रहा है। शासकीय भूमियों से अतिक्रमणकारियों को बेदखल कर सरकारी जमीन को खाली कराने की कार्यवाही के नाम पर कागजी कोरम पूर्ति चल रही। प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते भू-माफिया के हौसले बुलंद है।
नोटिस के बाद क्या होगी कार्यवाही
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा मंच से शराब, रेत, ड्रग व भू-माफिया के विरुद्ध कार्यवाही के आदेश के बाद यहां का स्थानीय प्रशासन जागा और यहां की कुछ मुख्य शासकीय भूमियों के अतिक्रमणकारियों को एक बार फिर नोटिस जारी कर सात दिवस के भीतर अतिक्रमित भूमि को खाली करने के कागजी आदेश दिये है लेकिन इसमें आगे अब क्या कार्यवाही होगी। जुर्माना, बेदखली या स्थगंन यह आने वाला समय ही तय करेगा।

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