आग ने पार्क प्रबंधन पर लगाया निष्क्रियता का दाग

आग ने पार्क प्रबंधन पर लगाया निष्क्रियता का दाग

जंगल विहीन हुआ बांधवगढ़, नहीं हुई जिम्मेदारी तय

उमरिया। बांधवगढ नेशनल पार्क, माधव नेशनल पार्क, पालपुर कूनों, और खिवनी सेंचुरी सहित प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर से अधिक जंगल जलकर खाक हो गए और अफसरों पर आंच तक नहीं आई। बांधवगढ टाइगर रिजर्व के इतिहास में पहली बार कोर और बफर जोन में एक साथ आग लगी। बांधवगढ नेशनल पार्क में लगी आग को जितनी गंभीरता से पीएमओ व प्रदेश के मुखिया ने लिया, मुख्यालय में पदस्थ शीर्षस्थ अधिकांश अफसर आगजनी की घटना को लेकर बांधवगढ के डायरेक्टर विंसेंट रहीम की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे है।
1 प्रतिशत नुकसानी का दावा
बांधवगढ नेशनल पार्क के कोर और बफर एरिया में आग की घटना से एक सप्ताह होने को आ रहा है, किसी भी अधिकारी-कर्मचारी पर जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई। इस घटना में बांधवगढ नेशनल पार्क के मगधी, खितौली, पतौर, मानपुर, पनपथा और ताला जोन सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। वन मंत्री विजय शाह ने बांधवगढ में लगी आग की नुकसानी का आकलन 1 प्रतिशत बताया हैं, दिलचस्प पहलू यह हैं कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी आलोक कुमार कह रहे हैं कि हाथियों को भगाने के लिए आग लगाई गई, वहीं दूसरी ओर प्रमुख सचिव वन विभाग अशोक ब्रडनाल ने अग्नी घटना के दिनांक ट्वीट कर के कहा की बांधवगढ में कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी अधिकारियों के अपने-अपने तर्क वन्य प्राणी विशेषज्ञ अधिकारियों के गले नहीं उतर रहा हैं, क्योंकि आगजनी के समय हाथियों का भागते हुए किसी ने भी नहीं देखा। जंगल जला पूरे देश ने देखा, फिर भी मुख्यालय में पदस्थ सभी अफसर मौन है।
जंगल विहीन के पथ पर बांधवगढ़
टाइगर रिजर्व में कुछ दिन पूर्व होली की तरह आग ने तीनों जोनों को अपने चपेट में ली हुई थी। जिसे ग्रामीण और प्रदेश के मुखिया के माध्यम से पैरवी पर आग पर काबू पाया गया, प्रदेश के मुखिया ने आग लगने के संदेश को सुनकर तुरंत स्थानीय जिला प्रशासन के हाथों में आग बुझाने का बागडोर संभालने का आदेश दे दिया, जिस पर जिला प्रशासन व स्थानीयजनों की मदद से आग पर काबू पाया गया, आग से कितना जंगल जला जिसका निरीक्षण करने के लिए वन मंत्री कुंवर विजय शाह ने खुद बांधवगढ़ आये, जिस पर विजय शाह ने बैलून सफारी के माध्यम से एक प्रतिशत जंगल जला हुआ देख पाये और बीटीआर के मुखिया को बचाने हेतु हमेशा की तरह जांच कमेटी बनाते हुए भोपाल रवाना हो गए।
अफसरों का आरामगाह बना बांधवगढ़
प्रदेश के मुखिया खनन माफिया, भू-माफिया चाहे भ्रष्टाचारी अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने का कितना भी दावा क्यों न करते रहे, किन्तु मुखिया के सभी दावे जिले में मौजूद बांधवगढ टाईगर रिजर्व के आला अफसरों के लिए खोखला साबित हो रहा है। पर्यटक तो पर्यटक, अफसरों का भी आरामगाह बन चुका है, बांधवगढ विगत माह में प्रदेश के वन विभाग सचिव अशोक वर्णवाल 2 दिन तक अपने परिवार के साथ बांधवगढ़ में बने मसहूर होटल ताज में रूक कर पार्क सफारी का आनंद लिया। जिम्मेदारों ने अग्नि घटना को दरकिनार करते हुए ट्वीट के जरिए कह दिया कि बांधवगढ में कुछ हुआ ही नहीं ठीक इसी तरह से भोपाल में बैठे मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार ने अग्नि घटना का सही कारण छुपाते हुए कह दिया की हाथियों को भगाने के लिए ग्रामीणों ने आग लगा दी।
फोटोग्राफी कर सोशल मीडिया में वायरल की गई।

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