विदिशा के लटेरी वन परिक्षेत्र में हुए घटना की न्यायिक जांच और संबंधित मांगों के निराकरण की मांग पर वन अधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन

विदिशा के लटेरी वन परिक्षेत्र में हुए घटना की न्यायिक जांच और संबंधित मांगों के निराकरण की मांग पर वन अधिकारियों ने सौंपा ज्ञापन

कटनी ॥ विदिशा के लटेरी वन परिक्षेत्र में हुई घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की गई है। मध्यप्रदेश वन व वन्य प्राणी संरक्षण कर्मचारी संघ और मध्यप्रदेश वन कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा हैं। संयुक्त रुप से सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि विदिशा के लटेरी वन परिक्षेत्र की तिलोनी बीट के कक्ष क्रमांक पी-387 में मोटर साइकिल में सवार 50 से 60 लकड़ी चोरों ने वन कर्मियों पर हमला कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए वन कर्मियों ने आत्मरक्षा में हवाई फायर किया। जिसके बाद कर्मियों ने वह से भाग कर लटेरी थाने में एफआईआर के लिए आवेदन दिया। लेकिन थाने में वन कर्मियों की शिकायत पर एफआईआर नहीं की गई। बल्कि हवाई फायर में हुई एक व्यक्ति की मौत के मामले में बगैर मजिस्ट्रियल जांच के वन कर्मियों के खिलाफ हत्या और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया गया है। सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि इस कार्रवाई से वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल पूरी तरह से टूट गया है। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि मृतक चैन सिंह और उसके साथी आदतन वन अपराधी है। इन पर लकड़ी चोरी के कई प्रकरण लंबित हैं। उसके बावजूद मृतक को 25 लाख रुपए की मुआवजा राशि और परिवार के एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई। इस घोषणा से वन कर्मचारी हताश हुआ है। सभी वन कर्मचारी सीमित संसाधनों में घने वनों के अंदर चिलचिलाती धूप, कड़कड़ाती ठंड और घनघोर वर्षा में भी अपने कर्तव्य का पालन करते हुए ड्यूटी कर वन और वन्य प्राणियों की रक्षा करता है। जिसका परिणाम है कि मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त हुआ है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने ज्ञापन में मुख्य वनसंरक्षक के अधीनस्थ वन कर्मियों को तत्काल वन बल घोषित किए जाने, वनक्षेत्रों में घटित अपराधों को रोकने की शक्तियां दिए जाने, घटना की मजिस्ट्रियल जांच कराने, वन कर्मियों के खिलाफ की जा रही पुलिस कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है।

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