फर्जी जीएसटी बिल लगाकर लाखों का खेल

वर्तिका कंस्ट्रक्शन के नाम पर पंचायत सचिव ने छानी मलाई

शहडोल। जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर की ग्राम पंचायत अरझूला, लखबरिया, बरतरा, सारंगपुर चारों पंचायतों में सरपंच व सचिव के द्वारा सामान सप्लाई करने वाले लोगों से मिलकर जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। आए दिन ग्राम पंचायतों में फर्जी बिलों को लेकर तरह-तरह की शिकायतें सुनने को मिलती होंगी, लेकिन अब इसमें तरक्की करते हुए शासकीय पदों पर बैठे सचिवों द्वारा अपने पंचायतों में चहेतों का फर्जी जीएसटी बिल लगाकर लाखों का वारा न्यारा करने से गुरेज नहीं आ रहे हैं और शासन की विकास के लिए दिए जा रहे रुपयों का जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है।
खुलकर शासन की राशि की होली
पंचायत ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में लगभग 20000 के ऊपर जितने भी बिल लगने होंगे सभी में जीएसटी बिल की अनिवार्यता को महत्वपूर्ण किया गया था, लेकिन अपने चहेते वेंडरों से मिलकर पंचायत के राशियों का गबन तो करते आ रहे हैं, लेकिन अब फर्जी जीएसटी बिल लगाकर जीएसटी की चोरी की गई, वहीं शासकीय पदों पर बैठे जिम्मेदारों ने शासन के पैसों की खुलकर होली खेली, मजे की बात तो यह है कि उक्त पूरा कारनामा पंचायत दर्पण में दिखने के बावजूद जिम्मेदारों ने आंख में पट्टी बांध रखी है।
यह है मामला
ग्राम पंचायत अरझूला सहित बरतरा, लखबरिया, सारंगपुर आदि कई ग्राम पंचायतों में वर्तिका कंस्ट्रक्शन नाम के प्रोपराइटर विपुल सिंह नामक व्यक्ति को पंचायत में निर्माण कार्य संबंधी मैटेरियल सप्लाई के नाम पर वेंडर बनाया गया है। विभागीय गाइडलाइन के अनुसार 2016 से ही पंचायतों में जो भी बिल लगने थे वह जीएसटी में पंजीकृत होना अनिवार्य था। लेकिन सचिवों द्वारा अपने चहेते वेंडर विपुल सिंह के वर्तिका कंस्ट्रक्शन को सन् 2018 में जीएसटी में पंजीकृत कराया गया, लेकिन एक बार पंजीकृत कराने के बाद 2021 तक उसमें किसी भी प्रकार का टैक्स जमा न कर लाभ बराबर चारों पंचायत द्वारा लिया जाता रहा।
चहेतों को पहुंचाया लाभ
2018 में पंजीकृत वर्तिका फार्म लगभग 2021 तक 2800000 रुपए का जीएसटी का बिल लगाकर कर चंदन कर चुकी है, लेकिन टैक्स के नाम पर एक रूपये भी शासन की खजाने में कभी जमा नहीं किया गया है और इस पूरे मामले में चारों ग्राम पंचायतों के सचिव पूर्ण रूप से शामिल है, क्योंकि इन्हें इस बात का ज्ञान था, लेकिन अपने चहेतों को लाभ दिलाने के लिए फर्जी जीएसटी बिल लगाकर बराबर आहरण कर कराते रहे।
यह कहते जीएसटी के नियम
बड़े व्यापारिक कार्य को करने के लिए या खरीद-फरोख्त आदि के लिए जीएसटी में पंजीकृत अनिवार्य बताया गया है और किसी भी फर्म को अपने व्यवसाय को संचालित रखने के लिए एक निश्चित समय सीमा में जीएसटी के करो को नियमानुसार भुगतान करने होते हैं, वहीं अगर कोई फार्म 6 महीने तक रजिस्ट्रेशन के बाद कोई लेन देन नहीं करता है तो, वह पंजीकृत नंबर अपने आप बंद माना जाता है, इसके बावजूद भी लगातार लगभग 3 वर्षों से बंद फर्जी जीएसटी बिल लगाकर 4 ग्राम पंचायतों से भुगतान कराए जा रहे हैं जो कि अपराध की श्रेणी में आता है।
फर्जी जीएसटी बिल पर भुगतान
जिले के अंतिम छोर पर चलने वाली पंचायतें जिसमें प्रमुख रूप से अरझूला, बरतरा, सारंगपुर, लखबरिया इन चारों पंचायतों में वर्तिका कंस्ट्रक्शन के नाम पर लगातार लगभग 45 बिलों पर 2700000 के फर्जी भुगतान किए गए हैं। लखबरिया सचिव अमित सिंह से बात करने पर बताया गया कि हमारे द्वारा जीएसटी के बिलों को चेक कर ही भुगतान किया जाता है, लेकिन जब उन्हें इन बातों से अवगत कराया गया तो अपनी बात से मुकरते हुए यह कहने लगे कि वर्तिका कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर विपुल सिंह द्वारा बताया जाता है कि हमारे बिल जीएसटी में पंजीकृत है एवं समय-समय पर उसका ऑडिट भी कराते रहते हैं और इसी आधार पर हमारे द्वारा भुगतान किया जाता है।
वर्तिका कंस्ट्रक्शन की चोरी
वर्तिका कंस्ट्रक्शन नाम से 2018 में जीएसटी में पंजीकृत फर्म पर पंचायतों से लाखों के बिल तो लिए गए, लेकिन सिर्फ नाम की कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाकर पंचायतों में भारी गोलमाल करने वाली वर्तिका कंस्ट्रक्शन जीएसटी कर की चोरी करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित कर सिर्फ दिखावे के लिए ही पंजीकृत फर्म का उपयोग कर रहा है और लाखों का बिल भुगतान कराने के एवज में 2018 के बाद हुए भुगतान के बदले कोई टैक्स जमा नहीं किया गया है, उक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी पर आरोप लगे हैं कि इनके द्वारा लाखों रुपए की कर की चोरी की गई है, जिसकी जांच की जाए तो पूरी असलियत सामने आ जाएगी और सरकार के साथ धोखाधड़ी कर कार्य करने वाले उक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी की सच्चाई भी खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी।

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