फर्जी बिलों और अवैध रेत के भरोसे लाखों का खेल

ग्राम बरगवां के सचिव व उपयंत्री कर रहे खजाना खाली

फर्जी दस्तावेजों के सहारे तकनीकी व विभागीय स्वीकृति का खेल

जनपद के सीईओ का मिला खुला संरक्षण

अनूपपुर। शहडोल व अनूपपुर जिले की सीमा पर स्थित ग्राम पंचायत बरगवां किसी न किसी कारण सुर्खियों में बनी रहती है, जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश का सबसे बड़ा शौचालय घोटाला इसी पंचायत में हुआ था, लेकिन जनप्रिय कलेक्टर व पूर्व विधायक की कृपा के कारण प्रमाणित अपराध की फाईल भी वसूली तक नहीं पहुंच पाई। बहरहाल बीते एक वर्ष के दौरान उपयंत्री इन्द्रजीत पटेल और सचिव छक्के लाल राठौर ने मिलकर यहां आस-पास के नदी व नालों से लाखों की रेत निकलवा कर, उसे निर्माण कार्याे में दर्शाते हुए फर्जी बिलों पर महज रेत और गिट्टी के नाम पर 30 से 40 लाख के भुगतान कर दिये गये। मजे की बात तो यह है कि जनपद में बैठे सीईओ, मनरेगा अधिकारी और जैतहरी विकास खण्ड के एसडीओ आदि इन लाखों के खनिज के भुगतान के साथ आज तक खनिज की रॉयल्टी के संलग्न न होने का कारण पूछा और न ही आपत्ति जताई। बहरहाल जिले के अंतिम छोर में स्थित बरगवां पंचायत के इस खेल को आस-पास की दर्जनों पंचायतों में अनुशरण किया जा रहा है।

खनिज विभाग की चुप्पी
बरगवां में बीते 1 से 2 वर्ष के दौरान एक करोड़ से अधिक के कार्य हुए होंगे, जिसमें लाखों की रेत व गिट्टी छक्केलाल राठौर और इन्द्रजीत पटेल ने मिलकर खपा दी, इस संदर्भ में खनिज विभाग को भी पूर्व में शिकायत की गई, लेकिन खनिज महकमा भी लाखों की राजस्व चोरी और अवैध उत्खनन को लेकर शायद संजीदा नहीं है, या फिर मैनेजमेंट के आगे खनिज अधिकारी ने नोटिस भेजने के बाद मामले को ठण्डे बस्ते में डाल दिया। वर्तमान में भी पंचायत अंतर्गत लगातार निर्माण कार्य हो रहे हैं और उसमें चोरी की रेत का उपयोग हो रहा है, लेकिन खनिज विभाग न तो जांच कर रहा है और न ही चोरी को रोकने के प्रयास ही किये जा रहे हैं।

फर्जी दस्तावेजों का सहारा
पंचायत अंतर्गत एचजेआई व कोल प्रबंधन के निजी स्वामित्व की भूमि पर लाखों के निर्माण कार्य, बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र के पंचायत द्वारा बीते 2 वर्षाे के दौरान किये गये हैं। अचरज तो इस बात का है कि सरकारी धन को काम के नाम पर निपटाने के फेर मे उपयंत्री और सचिव ने मिलकर तकनीकी स्वीकृति के दौरान निर्माण स्थलों के खसरे व भू-खण्डों के नक्शों में फर्जीवाड़ा करते हुए जिस स्थान का नक्शा, खसरा तकनीकी व विभागीय स्वीकृति के दौरान सम्मिलित किया गया,उन स्थानों पर निर्माण कार्य ही नहीं किये गये। इस तरह फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग किया गया, जिसमें सीईओ जनपद से लेकर एसडीओ व मनरेगा अधिकारियों की संलिप्तता रही।

घोषणा होते ही, युद्ध स्तर पर निकासी
बीते माहों में जब कैबिनेट मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने ग्राम पंचायत बरगवां व देवहरा को मिलाकर नगर परिषद बनाने की घोषणा की तो, दोनों ही पंचायत के खातों में पड़े लाखों रूपये निपटाने की युद्ध स्तर पर तैयारी शुरू हो गई। मैनेजमेंट में माहिर सचिव छक्केलाल राठौर ने पंचायत की सरपंच को विश्वास में लेकर जमकर फर्जी बिलों के चौके-छक्के लगाये। बीते 6 महीनों के दौरान सचिव, उपयंत्री के साथ मिलकर महज इस व्यवस्था में ही लगे रहे कि बजट को किस तरह निपटाया जाये, गौरतलब है कि बीते दिनों ग्राम पंचायत बनगवां के नगर परिषद बनने से पहले कुछ इसी तर्ज पर स्थानीय उपयंत्री व सरपंच-सचिव ने मिलकर लाखों के फर्जी बिलों के सहारे आहरण कर लिया और बाद में जनपद से लेकर जिला पंचायत और जिले के मुखिया तक लकीर पीटते रह गये, इसी तर्ज पर बरगवां का खेल सचिव छक्केलाल मैनेजर बनकर निपटा रहे हैं और स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा जनपद व जिले में बैठे नौकरशाह आंखे बंद कर तमाशा देख रहे हैं।

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