गोहन्ड्रा: जीतने से पहले ही पंचायत से राशि की आहरित

सरपंच-सचिव ने मिलकर चुनाव पाबंदियों की उड़ाई धज्जियां

प्रमाण पत्र मिलने से पहले ही निकाली राशि

(Anil Tiwari+7000362359)
शहडोल। एक ओर शासन स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन के लिए डिजिटल सिस्टम लागू किया है, कई कड़े प्रावधान भी किए हैं इसके बावजूद कहीं अंकुश दिखाई नहीं पड़ता है। इसके विपरीत अराजकता ही बढ़ती रही है। ग्रामपंचायतों में तो सबसे अधिक दुर्दशा है। जो अब अंधेरनगरी बनकर रह गई हैं। हालत यहां तक आ पहुंची है कि चुनाव के समय जारी किए गए संवेदनशील आदेश निर्देश भी लोग तोडऩे से नहीं परहेज नहीं करते हैं। पंचायत चुनाव के दौरान पंचायत के खाते से राशि के आहरण व उपयोग पर रोक लगाई गई थी, लेकिन अनूपपुर जिले की कोतमा जनपद की ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा में इस अवधि में भी ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच-सचिव ने निर्देश का उल्लंघन कर राशि आहरित की और उसका दुरुपयोग किया।
नियमों की उड़ी धज्जियां
ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा पंचायत सहित लगभग पूरे प्रदेश में सरपंचों को प्रमाण पत्र शासन द्वारा 14 जुलाई को दिया गया, बावजूद इसके कोतमा की गोहन्ड्रा पंचायत के सरपंच-सचिव ने अपने डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग 13 जुलाई को करते हुए वेण्डर के खाते में राशि भेज दी गई, कथित जिम्मेदारों ने 25 हजार 200 रूपये अभिषेक वरूण चौबे एवं चिंतामणि के खाते में डालकर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई, पूरे मामले में जहां एक ओर सरपंच-सचिव कटघरे में है, वहीं दूसरी ओर जनपद में बैठे जिम्मेदारों ने भी इस पूरे मामले में आज तक चुप्पी साधी हुई है।
दर्जनों मामले दबे पड़े
गोहण्ड्रा पंचायत में कानून तोडऩे का यह कोई पहला मामला नहीं है। वहां तो एक सिलसिला सा ही चलता रहा है। शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन हो, निर्माण कार्यों का भुगतान हो, मटेरियल सप्लाई का मामला हो या ग्रामीणों को लाभ दिलाने वाला कोई अन्य मामला हो सभी जगह किसी न किसी तरह की धांधली व्याप्त है। यहां कानून तोडऩे की एक परंपरा सी पड़ती जा रही है। अगर इस पंचायत की गहन जांच पड़ताल हो जाए तो ऐसे कई मामले उजागर होंगे, वहीं गोहण्ड्रा सचिव पूर्व में मलगा ग्राम पंचायत में पदस्थ थी, इस दौरान सादे कागजों में लगे बिलों का मामला किसी से छुपा नहीं है।
खुला चला भ्रष्टाचार का खेल
पंचायतो में हो रहे निर्माण सहित अन्य मदों में खर्च होने वाली राशि सबकुछ ऑनलाईन है, बावजूद इसके 13 जुलाई को भुगतान कर दिया गया, पंचायत में जिस प्रकार से भ्रष्टाचार किया गया है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच हुई तो, पंचायत पदाधिकारी या सचिव कोई बच नहीं सकेंगे। राज्य सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों के विभिन्न जरूरतों व विकास कार्यों के लिए फंड दिया जाता है। पिछले वित्तीय वर्ष में मलगा पंचायत में पदस्थ रहने के दौरान कथित सचिव द्वारा भ्रष्टाचार का खुला खेल-खेला था, लेकिन जनपद सहित जिले में बैठे जिम्मेदारों ने कभी जांच की जहमत नहीं उठाई।
कटघरे में पूरा महकमा
प्रदेश सरकार द्वारा भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ऑनलाईन प्रणाली को हर विभाग में लागू कर रखा है, इसके अलावा पंचायतों के विकास में कोई कमी न हो इसके लिए पर्याप्त राशि भेजी जा रही है, साथ ही पंच परमेश्वर पोर्टल सहित अन्य ऑन लाईन वेब साईट पर बिलों को अपडेट करने की प्रणाली लागू की हुई है, बावजूद इसके एक ओर जहां बीते वर्षाे में खरीदी के बिल पोर्टल पर अपडेट नहीं किये गये, वहीं दूसरी ओर जनपद सहित जिले में बैठे जिम्मेदारो ने कभी जांच की जहमत नहीं उठाई है। पूरे मामले सहित मलगा पंचायत में बीते वर्षाे के दौरान बिलों पर हुए भुगतान की अगर निष्पक्ष जांच हुई तो, भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा हो सकता है।

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