जीवन को संवारने वाली मां नर्मदा को नमन्

माँ नर्मदा के आशीर्वाद से फलेगा-फूलेगा संस्कृति और धर्म का

परचम

अनूपपुर। देश में 7 धार्मिक नदियां हैं, उन्हीं में से एक माँ नर्मदा हैं, हिन्दू धर्म में इसका बहुत मह्त्व है, कहा जाता है कि भगवान शिव ने देवताओं को उनके पाप धोने के लिए माँ नर्मदा को उत्पन्न किया था और इसलिए इसके पवित्र जल में स्नान करने से सारे पाप धुल जाते है। एक बार देवताओं ने अंधकासुर नाम के राक्षस का विनाश किया, उस समय उस राक्षस का वध करते हुए देवताओं ने बहुत से पाप भी किये, जिसके चलते देवता, भगवान् विष्णु और ब्रम्हा जी सभी, भगवान शिव के पास गए. उस समय भगवान शिव आराधना में लीन थे, देवताओं ने उनसे अनुरोध किया कि हे प्रभु राक्षसों का वध करने के दौरान हमसे बहुत पाप हुए है, हमें उन पापों का नाश करने के लिए कोई मार्ग बताइए। तब भगवान् शिव ने अपनी आँखें खोली और उनकी भौए से एक प्रकाशमय बिंदु पृथ्वी पर अमरकंटक के मैखल पर्वत पर गिरा जिससे एक कन्या ने जन्म लिया, वह बहुत ही रूपवान थी, इसलिए भगवान विष्णु और देवताओं ने उसका नाम नर्मदा रखा, इस तरह भगवान शिव द्वारा नर्मदा नदी को पापों के धोने के लिए उत्पन्न किया गया।
जीवन जीने की सीख
सदियों से अपने प्रवाह को निरंतर बनाये हुए नर्मदा नदी जिस कल-कल निनाद के साथ प्रवाहित होती है वह अक्षुण है। नर्मदा अपने आँचल में सदियों से हमारी संस्कृति को समेटे हुए है। जीवन जीने की सीख के साथ भाईचारा और मेल-मिलाप का संदेश देती मां नर्मदा को हम जीवनदायिनी भी कहते हैं। अविरल बहती नर्मदा देश की सबसे पुरातन नदियों में से एक है। नर्मदा देश की एक मात्र ऐसी नदी है जो पश्चिम दिशा की ओर बहती है। उल्लेख मिलता है कि यहाँ पर प्राचीन काल में ऋषि मुनियों ने कठिन तपस्या-साधना की थी। नर्मदा हमारे लिए बहती नदी नहीं बल्कि सामाजिक समरसता का वह स्रोत है जो हमारी जीवनशैली को समृद्ध बनाती है।
नर्मदा अमर और मोक्षदायिनी
नर्मदा नदी का धार्मिक महत्व अत्यधिक है। जन आस्था के प्रमुख केन्द्र नर्मदा घाट हैं, वहीं वेद पुराणों में इसका उल्लेख प्रमुखता के साथ मिलता है। धार्मिक महत्व के अनुसार नर्मदा नदी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है। यह दिशा देव दिशा मानी जाती है। कहा जाता है कि नर्मदा के कण-कण में भगवान शंकर का वास है। शिव पुराण एवं महाभारत में नर्मदा की महिमा का वर्णन किया गया है। कालीदास ने रघुवंशम में नर्मदा का उल्लेख रेवा नाम से किया था। आदि शंकराचार्य ने नर्मदा के उद्गम स्थल पर तप किया था, जबकि भगवान परशुराम नर्मदा वन से गुजरे थे। वेद-पुराण में उल्लेख मिलता है कि जब प्रलय आया तब सभी नदियाँ समुद्र से मिलकर क्षीण हो गईं थीं, तब एकमात्र नर्मदा का अस्तित्व ही शेष था इसलिए नर्मदा को अमर और मोक्षदायिनी माना गया है।
राम घाट पर महाआरती
नर्मदा के तट पर समय-समय पर उत्सव का आयोजन होता है। इन उत्सवों के माध्यम से जनचेतना जागृत करने का प्रयास किया जाता रहा है। इसी श्रृंखला में प्रदेश सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है, नर्मदा जयंती पर अमरकंटक के पावन स्थल पर नर्मदा महोत्सव का आयोजन सुनिश्चित कर। महोत्सव के दौरान अमरकंटक में प्रतिदिन माँ नर्मदा तट राम घाट पर महाआरती के साथ माँ नर्मदा पर आधारित लाईट एण्ड साउंड शो का आयोजन होगा। महोत्सव में नर्मदांचल की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर , कला एवं कृषि उत्पादों का प्रदर्शन किया जायेगा। साथ ही जनजातीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सम्मानित कर नारी शक्ति पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत होंगें। इस आयोजन से सांस्कृतिक धरोहर को न केवल नई पहचान मिलेगी बल्कि लोगों में माँ नर्मदा को स्वच्छ रखने की सीख भी दी जाएगी। उत्सव और ऊर्जा से परिपूर्ण मध्यप्रदेश सरकार का यह आयोजन उस चमकते शीशे की तरह होगा जिसमें लोग देख सकेंगे कि बातों और परिणामों में क्या अंतर होता है।
नर्मदा को स्वच्छ और निर्मल रखें
सरकार के प्रयास हमारी कोशिशों में श्रीवृद्धि करने का होता है। हमारा यह प्रयास होना चाहिए कि हम नर्मदा को स्वच्छ और निर्मल रखें ताकि नर्मदा सारे रोगों और अवरोधों से मुक्त होकर कल-कल बहती रहे। राजनीतिक तथा भौगोलिक सीमाओं से परे हटकर समग्र और संपूर्ण रूप से नर्मदा को राष्ट्रीय चिंता में शामिल किया जाये। आज जबकि अतिक्रमण और प्रदूषण के आघात झेल रही नर्मदा नदी अपने पूरे वेग के साथ प्रवाहमान है, वहीं दूसरी तरफ औद्योगीकरण, वनों का विनाश तथा रासायनिक प्रदूषण इसके अस्तित्व को नुकसान पहुँचा रहे हैं। विशेष अवसरों पर नर्मदा नदी पर बाहरी स्रोतों से जल प्रवाह कर लोग धार्मिक प्रयोजनों की पूर्ति तो कर लेते हैं, लेकिन नदी पर इसका कितना दुष्प्रभाव पड़ रहा है, इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। विडम्बना है कि सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान कर पर्यावरण प्रदूषित करने के विषय पर कड़े नियम बनाकर जुर्माने का प्रावधान तो हमारे देश में होता है, लेकिन नदियों मे गंदगी बहाने वालों, उद्योगों के बेकार रसायनों को नदियों में प्रवाहित कर उसे दूषित करने वालों की सदैव अनदेखी की जाती है।
जीवन को संवारने वाली माँ नर्मदा
उद्गम स्थल अमरकंटक से लेकर अरब सागर तक लम्बी यात्रा के दौरान नर्मदा नदी का अधिकांश भाग मध्यप्रदेश से होकर गुजरता है। प्रदेश की जो भूमि असिंचित है तथा जो नगर पेयजल की समस्या से जूझ रहें हैं, उन्हें सुगमता से नर्मदा का लाभ मिल सके, इस दिशा में प्रयास किये जाने चाहिए। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के बड़े भू-भाग को सिंचित करने के साथ ही यहां बिजली का उत्पादन और पशुपालन भी नर्मदा नदी पर ही निर्भर है। मोक्ष के साथ-साथ जीवन को संवारने वाली माँ नर्मदा को जीवंत बनाये रखने के लिए व्यक्तिगत एवं सामूहिक प्रयासों की जरूरत होती है। प्रदेश सरकार ने इस दिशा में सकरात्मक पहल की है। अब हमारी जवाबदारी है कि उत्सव के बाद ऊर्जा के साथ हम आयोजन के परिणामों तक पहुंचे। माँ के आँचल को धवल बनाएं और उसके जल से आचमन करते समय हमारा भाव भक्ति मे डूबा हुआ हो क्योंकि माँ नर्मदा रहेगी तो हम रहेंगें। हमारी संस्कृति और धर्म का परचम मां नर्मदा के आशीर्वाद से फलेगा, फूलेगा।
मुख्यमंत्री का किया स्वागत

जिले के इंदिरा गांधी अनुसूचित जनजाति विश्वविद्यालय के हेलीपैड में ”नर्मदा जन्मोत्सवÓÓ कार्यक्रम में शामिल होने हेतु आज पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने स्वागत किया। इस अवसर पर खाद्य आपूर्ति नियंत्रक मंत्री बिसाहूलाल सिंह, सांसद श्रीमती हिमाद्री सिंह, आईजीएनटीयू के कुलपति प्रो. प्रकाश मणि त्रिपाठी, अपर आयुक्त अमर सिंह बघेल, कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर सहित अन्य अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने माई की बगिया में की पूजा अर्चना
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पवित्र नगरी अमरकंटक में माई की बगिया में सहपत्निक मां नर्मदा की पूजा अर्चना की और प्रदेश के नागरिको की सुख समृद्धि और प्रगति की कामना करते हुए मां नर्मदा से प्रदेश के नागरिकों के सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने माई की बगिया मंदिर प्रांगण का निरीक्षण किया तथा पुजारियो से मंदिर मां नर्मदा के उद्गम के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने मंदिर प्रांगण में लगे गुलवकाबली के फूलों के पौधों के संबंध में मंदिर के पुजारियों से जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने बड़वानी जिले से आए नर्मदा परिक्रमा यात्रियों से चर्चा की तथा उनकी कुशलछेम पूछी। इस अवसर पर नर्मदा परिक्रमा यात्रियों ने मुख्यमंत्री को समक्ष पाकर अभीभूत होकर नर्मदा जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर भी साथ रहे।
मुख्यमंत्री ने किया तलाबों का निरीक्षण
मुख्यमंत्री ने पवित्र अमरकंटक नगरी के गायत्री और सावित्री तलाबों का निरीक्षण किया। निरीक्षक के दौरान मुख्यमंत्री ने गायत्री एवं सावित्री तलाबों सहित अमरकंटक क्षेत्र के अन्य तलाबों को अतिक्रमणमुक्त करने के निर्देश मौके पर उपस्थित कलेक्टर को दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अमरकंटक क्षेत्र के सभी तलाबों को अतिक्रमणमुक्त किया जाए एवं स्वच्छ तथा सुंदर बनाया जाए। उन्होंने तालाबो का गहरीकरण करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी के उद्गम स्थल में गाद निकालने का कार्य मानसून से पहले कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि नर्मदा नदी के उद्गम स्थल स्वच्छ और सुंदर होना चाहिए और उद्गम स्थल में जल स्रोतों का प्रेस फुटन होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा का प्राचीन स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के प्रयास तेजी से किया जाए। मुख्यमंत्री ने अमरकंटक नगर में अवैध रूप से बनाए गए होटलों की जानकारी भी कलेक्टर से तलब की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए की अमरकंटक क्षेत्र में वृहद पौध रोपण किया जाए। पौध रोपण में साल के वृक्षो को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने अमरकंटक क्षेत्र को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के भी निर्देश मौके पर उपस्थित अधिकारियों को दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *