कोरोना काल में भी स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी, उपस्थिति पंजी में फर्जी हस्ताक्षर मामले में एएनएम को क्लीनचिट

शहडोल। स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही का आलम थमने का नाम नहीं ले रहा है, निचले स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को खुद तहसील व ब्लाक स्तर पर बैठे अधिकारी उनकी गलतियों पर पर्दा डाल रहे हैं, हजारों में प्रतिमाह सरकारी वेतन और हजारों में भत्ता और इतनी ही मुक्त में शासकीय सुविधाओं का लाभ उठाने वाले नौकरशाह अब इसे अपनी बपौती मानने लगे हैं, मामला ब्योहारी विकासखण्ड के बुढ़वा स्थित स्वास्थ्य केन्द्र का है, जहां एएनएम सप्ताह भर अपने कार्य स्थल से नदारत रहकर दूसरे जिले में छुट्टियां मनाती रही और जब लौटकर आईं तो उन्होंने रजिस्टर उठाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी। अचरज तो इस बात का है कि इन बातों को बीएमओ डॉ. धमेन्द्र पराशर जानते भी हैं और मानते भी हैं, लेकिन कार्यवाही के नाम पर कर्मचारियेां की कमी का रोना रोने से भी नहीं चूकते।
माना गलती, पर कार्यवाही नहीं की
इस संदर्भ में बीएमओ डॉ. राजेश पराशर से जब जानकारी चाही गई तो उन्होंने पहले तो ऐसा होने से इंकार कर दिया और जांच तथा कार्यवाही की बातें कहीं, लेकिन हरिभूमि द्वारा बीते 22 अगस्त को जब पूरे मामला का खुलासा किया गया तो, बीएमओ के सुर बदल गये, श्री पराशर ने कहा कि गलती सामने आई है, लेकिन हमारे यहां कर्मचारियों की कमी है, 50 पदों की तुलना में 16 कर्मचारी ही मिले हैं, जिनसे पूरा काम करवाना पड़ता है, अगर हम इनकी लापरवाहियां देखेंगे तो स्टाफ की कमी होगी और हमें काम भी करवाना है।
सरकारी वेतन, बीएमओ का अभयदान
डॉ. राजेश पराशर के सामने तथाकथित कर्मचारी के द्वारा मुफ्त का वेतन लेने और धोखाधड़ी से उपस्थिति पंजी में हस्ताक्षर कराने का मामला प्रकाश में आने के बाद भी उन्होंने महज उक्त तिथियों का वेतन काटने की बात कही, गौरतलब है कि श्री पराशर ने यह कार्यवाही भी हरिभूमि में खबर का प्रकाशन होने की बात कही, सवाल यह उठता है कि आम आदमियों के द्वारा करों के अदायगी के बाद सरकारी खजाने में पहुंची राशि से बीएमओ सहित यहां पदस्थ अन्य कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है, तथाकथित एएनएम का मामला तो प्रकाश में आ गया लेकिन इस तरह का खेल यहां कब से हो रहा था, यह कहा नहीं जा सकता है, बीएमओ द्वारा उक्त मामले पर पर्दा डालकर अभयदान का खेल खेला जा रहा है।
सोशल मीडिया ने खोली पोल
बुढ़वा में पदस्थ एएनएम श्रीमती सावित्री मिश्रा पर लगे आरोपों की पोल उपस्थिति पंजी के फोटो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद खुली, अचरज इस बात का है कि अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में कार्य स्थल पर न रहकर निजी कार्य से पड़ोस के जिले रीवा जाना हुआ था, लगभग एक सप्ताह तक वहां रहने के बाद जब एएनएम वापस आई तो, उन्होंने पूरे सप्ताह भर के हस्ताक्षर हाजरी रजिस्टर में कर दिये, सोशल मीडिया में पहले और बाद के रजिस्टर के फोटो बुढ़वा क्षेत्र में जमकर वॉयरल हुए, बावजूद इसके कार्यवाही न कर मामले को जांच में उलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

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