हे राम! …. ये कैसा ”गाँधी ग्राम ÓÓ

न पानी, न बिजली, औंधे मुंह गिरा स्वच्छता अभियान

विकास से कोसों दूर गाँधी के गांव के वाशिंदे

उमरिया/शहडोल। दशकों पहले शहडोल के पाली विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत घुनघुटी के गांधी ग्राम का जब नामकरण किया गया होगा तो, राष्ट्रपिता के नाम पर बने इस ग्राम को गांधी की संज्ञा देते समय उक्त ग्राम को मॉडल या उत्कृष्ट ग्राम के लिए देखे गये सपने खण्डित होते नजर आ रहे हैं। आजादी के बाद के इन दशकों के दौरान शायद विकास इस गांव से रूठ चुका है, गांव के अंदर न तो पक्की सड़के हैं और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी और तो और विद्युतीकरण से भी इस गांव का नाता टूट चुका है।
गड्ढे का पानी पीकर गुजारा
गाँधी ग्राम के वाशिंदे कुआं नुमा गड्ढे से पेयजल सहित अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति कर रहे हैं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अशुद्ध जल उनके सेहत के लिए कितना घातक हो सकता है। बरसात के दिनों में ये गड्ढे भर जाते हैं और फिर भू-जल स्तर ऊपर होने के कारण उनमें गर्मी के कुछ माह छोड़कर पानी भरा रहता है, जिससे ग्रामीण अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित जल निगम व अन्य पानी की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले विभागों की सूची से शायद यह ग्राम छूट चुका है।
औंधे मुंह गिरा स्वच्छता अभियान
सरकारी आंकड़ों में भले ही जनपद या घुनघुटी पंचायत या फिर इस गांधी ग्राम को ओडीएफ की सूची में डाल दिया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल जुदा है। गांव के लगभग परिवार शौच के लिए बाहर ही जा रहे हैं, पूर्व के वर्षाे में मर्यादा अभियान के तहत शौचालयों का निर्माण तो किया गया, लेकिन उनमें से किसी का भी उपयोग नहीं हो रहा है अलबत्ता खण्डहरों के रूप में शौचालय निर्माण के समय किये गये भ्रष्टाचार की कहानी जरूर बयां कर रहे हैं।
खोखले निकले आवास के दावे
लगभग 7 वर्ष पहले केन्द्र में भाजपा की सरकार आने के बाद समग्र स्वच्छता अभियान के अलावा हर परिवार को छत देने की घोषणा की गई थी, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना की अलग-अलग कैटेगरी बनाकर सीधे हितग्राहियों के खाते में लाभ पहुंचाने के दावे किये गये, गांधी ग्राम में पीएम आवास योजना से कुछ हितग्राहियों को लाभ तो मिला है, लेकिन उनकी गिनती उंगलियों में की जा सकती है। बाकी के ग्रामीणों का जीवन आश्वासन पर आज भी टिका है।
विद्युत व्यवस्था से वंचित
प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजनाओं में घर-घर बिजली की योजनाओ से ग्राम के दर्जन भर से ज्यादा घर आज भी वंचित हैं। हालांकि यह गांव में प्रवेश करते ही रहवासियो के कच्चे घर पानी के लिए टूटे फूटे बाल्टी डब्बे बिखरा समान मानो जिंदगी के चलने का नही थमने का दौर आ गया है। गाँधी ग्राम में अगर लड़को की शादी होती है और उसमें लड़की के परिवार द्वारा लड़के को फ्रीज, टीवी या इलेक्ट्रानिक सामान गिफ्ट दिया जाता है तो, गाँधी ग्राम के वाशिंदों द्वारा उसे वापस भेज दिया जाता है, जिससे सहज ही समझा जा सकता है कि गाँधी ग्राम के लोग कैसे जीवनयापन कर रहे हैं।
इनका कहना है…
ग्राम पंचायतों के विकास के लिए शासन द्वारा राशि दी जाती है, यह पंचायतों को करना चाहिए, रही बात विद्युत की तो, मैं स्वयं इस मामले को दिखवाता हँू।
संजीव श्रीवास्तव

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