नेशनल हाइवे की बदहाली पर हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को जारी किया नोटिस

शशिकांत कुशवाहा
सिंगरौली । जनता की आवाज बुलंद करने वाले जनप्रतिनिधियों से सड़क की गुहार लगा कर सीधी सिंगरौली की जनता का अब भरोसा उठ गया है । लगातार कई वर्षों से राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माणाधीन जोकि काफी लंबे इंतजार के बाद भी पूरा नहीं हो सका जिससे कि जनता में भारी आक्रोश व्याप्त हो चुका है एवं विकास का दावा करने वाली भाजपा सरकार के वादे महज एक दिखावा साबित हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 39 के बदहाली को लेकर सड़क का मुद्दा कई दफा देश की संसद में भी गूंजा परंतु जिम्मेदारों ने इस तरह बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया नतीजा यह रहा कि 2 जिलों की कनेक्टिविटी लगभग 2 साल से पूरी तरह से ठप हो चुकी है आखिरकार क्षेत्र की जनता सरकार की वादाखिलाफी यों और नजरअंदाज रवैये को देखते हुए अब मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया संबंधित मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जबलपुर में भी अपना कड़ा रुख अख्तियार किया ।

  • कई वर्षों से उपेक्षा का शिकार है नेशनल हाईवे

क्या है मामला

राष्ट्रीय राजमार्ग 39 जो कि रीवा से रांची को जोड़ने वाला प्रमुख राजमार्ग है परंतु 2013 से निर्माणाधीन इस राष्ट्रीय राजमार्ग की अनदेखी का परिणाम यह हुआ कि सीधी जिले के बहरी से लेकर सिंगरौली जिले के बरगवां तक की सड़क गड्ढों में क्या अब तो खाई में तब्दील हो चुकी है । सिंगरौली जिले में सैकड़ो छोटी-बड़ी कंपनियां काम कर रहे है जिनसे की सासन को प्रतिदिन करोड़ो रूपये का राजस्व प्राप्त होता है वहीं जिले में काम कर रहे कंपनियों के द्वारा खस्ताहाल रोड को बनाने की बात तो दूर और ना तो संबंधित एजेंसी ने इस ओर कोई ध्यान दिया । बदहाल सड़को से होने वाले दुर्घटनाओं में इजाफा भी हुआ इसके साथ ही कई लोग जान भी गवा चुके हैं । सीधी से सिंगरौली राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर सीधी सिंगरौली सांसद रीति पाठक के द्वारा कई बार संसद में सड़क की बदहाल अवस्था के बारे में बोल चुकी हैं फिर भी कुछ नहीं हुआ ।

अधिवक्ता ब्रह्मेन्द्र पाठक ने दायर की याचिका

राष्ट्रीय राजमार्ग 39 रीवा रांची राज्य मार्ग के संबंध में अधिवक्ता ब्राह्मण पाठक के द्वारा रिट याचिका मध्य प्रदेश जबलपुर हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई जिसमें कि अब हाई कोर्ट ने नोटिस भेजकर केंद्र व राज्य सरकार के साथ-साथ सीधी एवम सिंगरौली जिला कलेक्टर के अलावा नेशनल हाईवे एवं एमपीआरडीसी से जवाब मांगा है।

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