राजस्थान मारवाड़ी समाज का होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित,सभी जनमानस कें स्वास्थ समृध्दि की की कमाना

राजस्थान मारवाड़ी समाज का होलिका दहन कार्यक्रम आयोजित,सभी जनमानस कें स्वास्थ समृध्दि की की कमाना 

कटनी ॥ रंगों के पर्व होली के एक दिन पूर्व विधि विधान से फाग गीतों के बीच होलिकादहन किया गया। राजस्थानी मारवाड़ी समाज कें नवयुवक मण्डल  एवं राजस्थानी महिलामण्डल कें तत्वावधान में होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया गया  महिलाओं ने बीचे बने सम्मत की पूजा की और सूत्र भी बांधा। रात्रि में विधि-विधान से जयकारों एवं होली व फाग गीतों के बीच ढोल की गूंज के बीच सम्मत जलाई गई। मारवाड़ी समाज में जिन बेटियों का जल्द ही विवाह हुआ था, मायके में आई वह लड़कियां एवं महिलाएं इस आग का एक हिस्सा थाली में रखकर घरों में ले गईं और इसके धुएं को घर के हर हिस्से से गुजारा और पुण्य की कामना की।

 

मारवाड़ी समाज की ओर से होलिका दहन का आयोजन स्थानीय गोल बाजार में किया गया !

राजस्थानी परिधान में महिला-पुरुष आयोजन स्थल पर पहुंचें। इसके लिए गोबर से बड़कुला व ढाल बनाकर सुखाया गया । बड़कुला को गूंथ कर माला बनाने के साथ अन्य तैयारी में मारवाड़ी महिलाएं जुटी रही । शुभ मुहूर्त पर होलिका दहन किया गया ! मारवाड़ी समाज कें द्वारा होलिका दहन कें बाद गढ़गौर का 16दिवसीय कार्यक्रम का आगाज हों जाएगा जिसका मुख्य कार्यक्रम आगामी 15 अप्रैल कों आयोजित किया जायगा ! मारवाड़ी समाज की राजस्थानी महिला मण्डल द्वारा सभी पुरुष वर्ग कों पगड़ी पहनाई गई !

शादी के बाद की पहली होली बहुत खास

शादी के बाद की पहली होली बहुत खास होती है। पहली होली लड़की अपने मायके में मनाती है और गणगौर की पूजा करने के बाद ससुराल वापस जाती है। पकवान में मूंगदाल का हलवा खास होता है। साथ ही काठी दाल और चावल बनता है। नवविवाहिता ठंडी अग्नि की पूजा करती हैं। चार फेरे लेती हैं और अपने और परिवार के सुखमय जीवन की कामना भी करती हैं। होली के दिन सुबह से गणगौर की पूजा शुरू हो जाती है, जो 16 दिनों तक चलती है। सभी राजस्थानी परिधान में पहुंचते हैं। इसके बाद सभी एक-दूसरे से गले मिल अबीर लगाते हैं।

महिलाएं पहनती हैं राजस्थानी परिधान

होलिका दहन वाले दिन शुभ मुहूर्त में दंपती राजस्थानी परिधान में शामिल होते हैं। यहां प्रदक्षिणा करने के बाद अर्घ्य दिया जाता है। प्रह्लाद की पूजा की जाती है। जिसे पुत्र की प्राप्ति होती है, वे पूजा करते हैं। कच्चा सूता, जौ की बाली, हल्दी की गांठ आदि का भोग लगाया जाता है। होलिका दहन से थोड़ी सी जलती हुई अग्नि लेकर घर लौटते हैं। ऐसी मान्यता है कि होलिका जल गई और प्रह्लाद की रक्षा करते हैं। अग्नि को प्रह्लाद के रूप में घर लाते हैं। अग्नि के ठंडा होने पर उस राख को पानी में डाल कर स्नान करने से महामारी से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में सभी राजस्थानी मारवाड़ी समाज कें नागरिकों की उपस्थिति रही !

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