बकहो में अगड़ो का, तो धनपुरी में पिछड़ों का हक मार रही भाजपा @ महिला अनारक्षित होने के बाद भी सिर्फ दो वार्डों में दिये थे टिकट

बहुमत के बाद भी बकहो में भाजपा की राह आसान नहीं
शहडोल। जिले के 04 निकायों में मतदान व नतीजे आने के बाद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष चुने जाने हैं, कभी प्रदेश की सबसे बड़ी पंचायत रही बकहो के हजारों वाशिंदों को परिषद बनने और आरक्षण से मुक्ति का समय भी आया, लेकिन उनके चहेते दल ने ही अगड़ों का हक मारकर शायद पिछड़ों के हाथ में देने की स्क्रीप्ट पहले ही लिख रखी थी, जिस कारण बहुत आने के बाद जो तस्वीर वर्तमान में सामने आई है, वह भाजपा के लिये चिंताजनक है, भाजपा का गढ़ मानें जाने वाले बकहो में सामान्य वर्ग के लिये 06 वार्ड होने के बाद भी, अनारक्षित महिलाओं को सिर्फ 02 ही टिकट दी गई, टिकट वितरण में स्थानीय नेताओं ने जिले में बैठे संगठन को कितना गुमराह किया, यह उस समय जल्दबाजी में तो समझ में नहीं आया, लेकिन परिणाम आने के बाद जब इन पर चिंतन शुरू हुआ, तो भाजपा के रणनीतिकारों के पैरों के नीचे से जमीन सरकती नजर आ रही है। पहले से ही महिला अनारक्षित सीट के बावजूद दो को टिकट दी गई, इसके से वार्ड नम्बर-11 से प्रमुख दावेदार पूनम द्विवेदी का पहले ही पत्ता काट दिया गया और बाद में उसे निष्कासित भी कर दिया गया, इधर जिसे टिकट दी गई, निशा शुक्ला को खुद भाजपाईयों ने मिलकर हरा दिया, कुलमिलाकर नतीजों के साथ ही अध्यक्ष की तस्वीर पहले से लिखी स्क्रिप्ट के अनुसार साफ हो गई, वार्ड नम्बर-04 से रेखा महेन्द्र सिंह अकेली अनारक्षित महिला प्रत्याशी बची हैं।
इस तरह मारा सवर्णों का हक
बकहो नगर परिषद की 15 सीटों में से वार्ड नम्बर-04, 06, 07, 09,11,12,13 और 14 अनारक्षित थी, जिसमें 11, 12, 13, 14 अनारक्षित महिलाओं के लिये सुरक्षित की गई थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के द्वारा अनारक्षित महिला के हक को मारते हुए, 12 में निर्मला शर्मा, 13 में निर्मला साहू और 14 में पिंकी सरोज यादव तीनों ही पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को टिकट दी गई, सिर्फ 01 वार्ड 11 नम्बर से निशा शुक्ला को मैदान में उतारा था, शेष 04 अनारक्षित वार्ड 04, 06, 07 और 09 से सिर्फ 04 में महिला को टिकट दी, वहीं 06 और 07 में पुरूष को टिकट देकर महिलाओं का रास्ता बंद कर दिया, इसमें से भी एक टिकट अनारक्षित के बावजूद पिछड़े को दे दी, कुल मिलाकर देखा जाये तो, कई दशकों से नगर का प्रथम व्यक्ति बनने के लिये आमजनों तथा भाजपा की सेवा में लगे सैकड़ों अनारक्षित वर्ग के परिवारों को भाजपा के रणनीतिकारों ने पहले ही बाहर का रास्ता दिखा दिया।
यह है बकहो के हालात
भारतीय जनता पार्टी ने वार्ड नम्बर-09, 11 और 12 से भाजपा के सवर्ण उम्मीदवरों की न सिर्फ टिकट काट दी, बल्कि उन्हें बाद में पार्टी से निष्कासन की कार्यवाही के रास्ते भी खोल दिये, बावजूद इसके भाजपा के बागियों ने निर्दलीय रूप से ताल ठोक दी और 09 नम्बर से अनीता सिंह, 11 से पूनम द्विवेदी और 12 से कमला मिश्रा चुनाव जीतकर परिषद में पहुंच गईं, वहीं अनारक्षित वार्ड नम्बर-06 से भाजपा ने महिला नेत्री रेणु पाण्डेय को टिकट नहीं दी और यहां अनारक्षित सीट पर पिछड़े वर्ग के बृजकिशोर यादव को टिकट दी, हालांकि बृजकिेशोर लम्बे अंतर से जीतकर परिषद में पहुंचे हैं, लेकिन बकहो में बहुुमत के बाद भी, यहां भाजपा तीन धड़ों में बट गई है, उत्तरप्रदेश, बिहार प्रांत के दो अलग-अलग गुटों को अलावा स्थानीय गुट भी बन चुका है, जो अपने पसंद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष परिषद में बैठाना तो चाहते हैं, लेकिन अध्यक्ष के लिये जो भी नाम इन गुटों के द्वारा सामने लाये जा रहे हैं, वे सवर्ण न होने के कारण कहीं न कहीं सवर्णों को अंदर ही अंदर खटक रहे हैं।
सरकेगा भाजपा का वोट बैंक
भले ही बकहो में भाजपा का बहुमत आ गया हो और परिषद में उनकी सरकार बन जाये, लेकिन अगड़ों ही टिकटें काटकर पिछड़ों को देने का खामियाजा भाजपा को आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा, इस बार अनारक्षित महिला का आरक्षण था, दूसरी बार इस आरक्षण के लिये अनारक्षित वर्ग की महिलाओं को लगभग 20 साल इंतजार करना पड़ सकता है, ऐसी स्थिति में एक बड़े वर्ग में भाजपा को लेकर असंतोष पनप रहा है, यदि यहां पर भाजपा अपने ही बागियों के खिलाफ की गई निष्कासन की प्रक्रिया को पार्टी और सवर्णों के हित के लिये खत्म कर देती है, तो भाजपा के पास न सिर्फ 03 और वार्ड आ जाएंगे, बल्कि अनीता सिंह, पूनम द्विवेदी और कमला मिश्रा जैसे तीन अनारक्षित वर्ग की महिलाओं को बल भी मिलेगा, भाजपा की इस भूल सुधार से पार्टी की छवि और वोट बैंक सरकने के कयास भी खत्म हो जाएंगे।
इधर धनपुरी में पिछड़ों के हक पर डाका
धनपुरी नगर पालिका में इस बार अध्यक्ष की सीट पिछड़े वर्ग के लिये आरक्षित की गई थी, ऐसे में पार्टी के लिये समर्पित वह बड़ा समूह जो पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखता है, उसे भी सत्ता में भागीदारी का अवसर मिल सकता है, लेकिन 28 में से 09 सीटे आने के बाद भाजपा के पास विकल्प भले ही कम हो गये हों, लेकिन सभी वार्डों पर नजर डाली जाये तो, वार्ड नम्बर-01 से श्रीमती रविन्दर कौर छाबड़ा भले ही पिछड़े वर्ग से हो, लेकिन बीते पंचवर्षीय में अनारक्षित महिला होने के बाद भी पार्टी ने उन्हें सवर्णो का हक मारकर न सिर्फ टिकट दी थी, बल्कि परिषद के अध्यक्ष तक पहुंचाया भी, वहीं वार्ड नम्बर-04 से प्रवीण बड़ोलिया पिछड़े वर्ग से हैं, वहीं वार्ड नम्बर-16 से नारायण जायसवाल पिछड़े वर्ग से हैं, वार्ड नम्बर-20 से आनंद कचेर भी पिछड़े वर्ग से हैं, यही नहीं वार्ड नम्बर-24 से जीतकर आये युवा नेता स्कंद सोनी भी पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं, कुल मिलाकर देखा जाये, तो जीतकर आये 09 पार्षदों में से 04 ऐसे पार्षद हैं, जो पिछड़े वर्ग से हैं और अनुभवी तथा युवा भी हैं।

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