अमरकंटक में चंद पैसो के लिए खेल रहे है आदिवासियो की जान से

संतोष कुमार केवट

एक जोडे ने संभाल रखी है पूरे ग्रामीणो की बाग डोर गरीबी के आगे ग्रामीणो बेबस
प्रदेश की बात की जाए तो पुष्पराजगढ़ को ग्रामीणो का अंचल के नाम से जाना जाता है, जिसके कारण यहा न तो साक्षरता का दर है और न ही रोजगार का जिसके कारण वश यह समाज में आज भी काफी पिछडे हुए है और अगर देश की बात की जाए तो कई इलाको में यह विलुप्त होने की कागार में भी है।
अनूपपुर। मां नर्मदा की पावन नगरी से सटे पोडकी समेत कई गावों में स्वास्थ की उत्तम व्यवस्था न होने के कारण ग्रामीणो को काफी परेशानियो का सामना करना पड रहा है, बात की जाए अगर स्वास्थ केन्द्रो की तो वो तो प्रशासन ने दो-दो उपलब्ध कराए है, लेकिन दोनो स्वास्थ केन्द्रो में प्रशासन के द्वारा उपलब्ध कराई गई सुख-सुविधाओ से ग्रामीण पूर्ण: वंचित है, जिसका फायदा दो व्यापारी उठा रहे है।
8 किमी के गॉव में सिर्फ दो स्वास्थ केन्द्र
पोडकी, लालपुर, बिजौरी, सरहा कोना, भुन्डाकोना, दमगण जैसे कुछ और ग्रामों को लेकर पैमाने के तहत देखा जाए तो इस पूरे 8 किलो मीटर के क्षेत्र में रहने वाले सौकडो ग्रामीणो के बीच प्रशासन नें सिर्फ दो स्वास्थ केन्द्र की दिए है, जिसमें भी प्रशासन के द्वारा उपलब्ध कराई गई सुख सिविधाओ से पूर्ण: वंचित है, जिन कारणो की वजह से ग्रामीणो को परेशानियो का सामना करना पडता है।
दोनो ने जमाए अपने कदम
पोडकी क्षेत्र में बंगाली के नाम से प्रसिद्व झोलाछाप डॉक्टर जो भोले-भाले ग्रामीणो को जादुई इंजेक्सन लगाकर लोगो को अपना शिकार बना रहे है, वही दूसरा गौरेला से यहा पहुच कर अपने आप को वरिष्ठ चिकित्सक बता कर लोगो को वर्षो से लूटने का कार्य कर रहे है। दोनो ने ही वर्षो से इस ग्रामीण क्षेत्र में कदम जमाए हुए है।
चिकित्सक बन रहे कारण
क्षेत्र में दो स्वास्थ्य केन्द्र तो बने हुए है, लेकिन यहां पदस्थ डॉक्टरो की लापरवाही के कारण झोलाछाप डॉक्टरो ने अपना कब्जा जमाए हुए है, स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर महज सप्ताह में एक बार ही आते है, जिसके कारण ग्रामीणो को झोलाछाप डॉक्टरो का सहारा लेना पडता है।

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