जेल में बंद कैदी ग्राम पंचायत में कर रहा मजदूरी ,पंचायत के जिम्मेदारों ने कैदी को दी 5 दिन की मजदूरी ,सोहागपुर जनपद के ग्राम पंचायत धनौरा का मामला 

 योजनाओं में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है, जिसमें बिना काम किए ही राशि निकासी सहित फर्जी मजदूरों के नाम से बिना मजदूरी भुगतान मामला सामने है, जेल में रहते हुए पंचायत के जिम्मेदारों ने कैदी को भुगतान कर भ्रष्टाचार की सारी हदें लांघ दी हैं।

(amit dubey- 7000656045)
शहडोल। जिले की सोहागपुर जनपद की धनौरा पंचायत में सचिव द्वारा भ्रष्टाचार की सारी मर्यादाएं लांघ दी गई है, ऐसा नहीं है कि ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार का यह पहला मामला है, ग्राम पंचायत में हुए निर्माण कार्याे में गुणवत्ता की जमकर अनदेखी हुई है, निर्माण कार्य के नाम पर खरीदी गई सामग्री में भी भ्रष्टाचार का खुला खेल-खेला गया है, आरोप है कि ग्राम पंचायत के सचिव ने जितना विकास ग्राम का नहीं किया, उससे कहीं ज्यादा खुद का विकास कर लिया है, ऐसा नहीं है कि कथित सचिव की शिकायतें नहीं हुई है, लेकिन जिम्मेदारों ने इस पूरे मामले से आंख मूंद रखी है।
यह है मामला
सोहागपुर जनपद की ग्राम पंचायत धनौरा में रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत एक ऐसे व्यक्ति को 5 दिवस की मजदूरी दी, जो बुढार जेल में कैद है, 23 अप्रैल को ग्राम पंचायत धनौरा में कंटोवर टंच निर्माण तुर्री दलान चल रहा था। इस निर्माण कार्य में ग्राम छिरहनी निवासी मन्नू सिंह पिता झिलहा सिंह गोड़ की 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक 5 दिन की हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज कर दी गई।
प्रमाणित है भ्रष्टाचार
सोहागपुर जनपद की ग्राम पंचायत धनौरा में भ्रष्टाचार का खुला खेल-खेला गया है, मजे की बात तो यह है कि पूरे मामले की जानकारी होने के साथ ही कागजों में प्रमाण होने के बावजूद जिम्मेदार जांच के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाये जा रहे हैं, चर्चा है कि पूर्व में समय-समय पर जिम्मेदारों को सचिव से मिलने वाले कमीशन के चलते, कार्यवाही करने से परहेज किया जा रहा है, ग्राम पंचायत धनौरा में हुए निर्माण कार्य के दौरान भरे गये मस्टर रोल की जांच हो जाये तो, ऐसे कई मजदूर सामने आयेंगे, जिन्होंने मजदूरी की ही नहीं और मस्टर रोल में उनके नाम दर्ज हैं।
कैदी के खाते में 5 दिन की मजदूरी
खैरहा थाना से मिली जानकारी के अनुसार मन्नू सिंह के विरुद्ध धारा 302, 201, 34 के तहत अपराध दर्ज है, 23 अप्रैल को दोपहर के 1 बजे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर उप जेल बुढार भेजे जाने की जानकारी दी गई थी और वर्तमान में भी मन्नू सिंह बुढ़ार जेल में ही है, लेकिन धनौरा पंचायत के जिम्मेदारों ने कथित कैदी को मजदूरी के एवज में 160 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 800 रुपये की मजदूरी भुगतान बैंक खाते में कर दी। बीते दिनों संभागायुक्त ने कहा था कि ग्राम पंचायतों में होने वाले भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद जनपद के मुखिया जिम्मेदार होंगे, लेकिन उक्त मामले में अभी तक किसी की जिम्मेदारी तय न होना अपने आप में बड़ा सवाल है।
नहीं हो पा रही कार्यवाही
जेल में बंद कैदी ने कैसे मजदूरी की यह तो समझ से परे हैं, लेकिन पूरी योजनाओं के लिए शासन ने सबकी जिम्मेदारी तय की हुई है, जीआरएस, सचिव, सरपंच द्वारा फीडिंग कराई जाती है, उपयंत्री मौके पर मूल्यांकन करते हैं, सहायक कार्यक्रम अधिकारी वैरीफिकेशन और अंत में जनपद पंचायत की आईडी से मजदूरी भुगतान कर दिया जाता है। जबकि  इस पूरे मामले को देखकर ऐसा लगता है की मनरेगा योजना को देखने के लिए रखे गए कर्मचारियों से आंख बंद कर भ्रष्टाचार का खुला-खेल-खेला है, लेकिन जनपद सहित जिले में बैठे जिम्मेदार ने महीनों बीतने के बाद भी कार्यवाही तक की जहमत नही उठा पा रहे हैं।
इनका कहना है…
इस मामले में जब सचिव से बात करने का प्रयास किया गया तो, उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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