कृषि भूमि को टुकड़ों में काट रहा राजा

रेरा के नियमों को दरकिनार कर जिला मुख्यालय में प्लाटिंग

अनूपपुर में कृषि भूमि को काट-काट बना दिया सैकड़ों प्लाट

शहडोल। संभाग के अनूपपुर जिले में कुछ समय से लगातार राजा तिवारी नामक मंडल उपाध्यक्ष लगातार अपने साम्राज्य स्थापित करने में चरम पर पहुंच चुका है, अभी कुछ दिन पहले ही परसवार के मुख्य मार्ग पर खसरा नंबर 393 की कृषि भूमि को बिना डायवर्सन के दर्जनों प्लाट काटकर विक्रय कर रहा था, जिस पर शिकायत के बाद मात्र दो प्लाट की रजिस्ट्री हो पाई है और नामांतरण पर अटकी हुई है, चर्चा है कि एक बार फिर अनूपपुर बस्ती के तरफ जोडऩे वाली चंदास नदी के किनारे से छात्रावास और पुलिस लाइन को जोडऩे वाली भूमि पर बलदेव पाल और कुनू पाल नामक दो भाइयों से कृषि भूमि को लेकर बाकायदा रोड निकाला गया है, इसके उपरांत उस जमीन को अधिग्रहीत करते हुए सैकड़ों प्लाट काटने की तैयारी में है।
वार्ड नंबर 13 में दर्जनों प्लाट बेचे जाने की खबर है, चर्चा है कि जमीन पर राजा के साथ-साथ कुशवाहा नामक कथित व्यक्ति का पैसा भी लगा हुआ है और बकायदा राजा का साम्राज्य स्थापित होता नजर आ रहा है, लेकिन कृषि भूमि को काटकर जगह-जगह अपने साम्राज्य स्थापित करने पर रेरा के नियमों के साथ-साथ नगरपालिका के अनुमति को भी जरूरी न समझने वाले राजा से जमीन खरीदने वाले कल जो अपने घरौंदा को सजाएंगे, एक न एक दिन कानून की जंजीर में फंस कर, उसी घरौंदा को तहस-नहस होते हुए भी निश्चित रूप से देख पाएंगे, इसलिए किसी जमीन को खरीदने से पहले सभी प्रकार के नियम कायदे कानून को भी जान लेना आवश्यक है ताकि अपने जीवन भर की कमाई यूं ही ना गवां बैठे।
जी हां अनूपपुर के मुख्य मार्ग से अनूपपुर बस्ती को जोडऩे वाली नगर पालिका के द्वारा बनाई गई मुख्य मार्ग जो चंदास नदी के पहले से शासकीय बालक बालिका छात्रावास होते हुए निकली है, वहां से कुछ दूर आगे जाने पर लगभग 2 से 3 एकड़ के भूमि पर अवैध रूप से दर्जनों प्लाट काटे हुए देखे जा सकते हैं, इस जमीन पर रेरा के नियमों को पालन नहीं किया गया है न ही जमीन को डायवर्सन की प्रक्रिया से पूरा किया गया है, इसके अलावा नगर पालिका अनूपपुर की अनुमति के साथ-साथ ग्राम तथा नगर निवेश की अनुमति भी नहीं ली गई है, इससे आप समझ सकते हैं कि जमीन कितनी पाक साफ है, फिर भी लोगों को धोखे में रखकर प्लाट की बिक्री की जा रही है, जबकि किसी भी कॉलोनी को विकसित करने से पहले रेरा में रजिस्ट्रेशन सबसे प्रमुख माना जाता है, चर्चा है कि राजा ने अपने नेतागिरी के रेरा में रजिस्ट्रेशन तो बहुत दूर नगर पालिका से भी अनुमति लेना जरूरी नहीं समझा है, तभी तो बिना गाइडलाइन के प्लॉट बेचे जा रहे हैं।
खबर है कि जिस जमीन को राजा तिवारी द्वारा पहले भू-स्वामी बलदेव पाल और उसके भाई कुनू पाल से एग्रीमेंट किया गया, उस जमीन के आस-पास अन्य भूमि का रकबा जो कि लगभग कई वर्ग फुट हो सकती है, सभी शासकीय भूमि के रूप में है, जिसे अपने राजनीतिक दबदबे के कारण कब्जा कर लिया गया है, वहीं नाम न बताने की शर्त पर ग्रामीणों का कहना है कि इस जगह पर पहले श्मशान घाट हुआ करता था और जब अनूपपुर जिला नहीं बना था, तब ग्रामीणों द्वारा सभी जाति वर्ग के लोग अपने अपने लिए श्मश्यान घाट बना कर रखे थे, लेकिन आज जैसे-जैसे विकास की क्रिया आगे बढ़ी है, सभी साथी भूमि को राजनैतिक ताकतवर लोग कब्जा करते हुए भूखंड काट-काट कर बेच रहे हैं, नहीं तो यहां पर हम लोगों के द्वारा गुल्ली डंडा से लेकर अपने गाय भैंस को चराने का कार्य के साथ-साथ बचपना गुजारने की बात भी दर्जनों लोग स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन राजनीतिक ताकत और डर के कारण कोई भी व्यक्ति खुलकर बोलने की तैयार नहीं है।
अनूपपुर जिले के महत्वपूर्ण रोड जहां पर दर्जनों शासकीय ऑफिस पुलिस लाइन से लेकर बालक छात्रावास एवं बालिका छात्रावास के अलावा कई सार्वजनिक शासकीय भवन निर्माण हो रहे हैं, आने वाले दिनों में शासकीय विकास के कार्यों के लिए एकमात्र अनूपपुर बस्ती के तरफ वही जगह बचे हुए हैं, यहां पर लगातार शासकीय भूमि पर कब्जा होने की शिकायत मिलती रही है, खबर तो यह भी है कि कई शासकीय भूमि को पटवारी के द्वारा रिश्वत लेकर पर्ची काट दी जाती है, उसके बाद उस पर जुर्माना की कार्यवाही करवाते हुए मालिकाना हक दिलाने तक की जिम्मेदारी पटवारी साहब बखूबी अदा करते हैं, इसलिए कई शासकीय रकवो पर आज मालिकाना हक एवं कब्जा प्राप्त करके उसे भी भूखंड काटते हुए बेचे जा रहे हैं।
शासकीय पद पर बैठे जिम्मेदार पटवारी कुछ पैसे के लिए अगर इस तरह से खेल खेलने लगेंगे तो, निश्चित रूप से कहीं पर शासकीय भवन के लिए जगह तक मिलना नामुमकिन होगा, जबकि शासन द्वारा इन्हें शासकीय भूमि के रखरखाव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती है, लेकिन इन्हीं जिम्मेदारियों को भूलकर नेताओं के कार्यों को किस प्रकार निपटाना है, इस पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है, ऐसे लोगों की संपत्ति की जांच भी की जानी चाहिए, ताकि रिश्वतखोरी के बल पर लाखों रुपए कमा कर शासन के साथ धोखाधड़ी करते हुए अपने फर्ज से गद्दारी करते हैं, इन पर भी समय-समय पर गाज गिरनी चाहिए ताकि गलत काम करने से पहले बना के देखो सौ बार सोचे।
भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में या सरल भाषा में कहें तो प्रदेश के मुखिया सभी प्रकार के माफिया गिरी पर लगाम लगाने के लिए और अपराधियों पर विशेष तरह से कार्यवाही के लिए हजारों करोड़ों रुपया की बिल्डिंग से लेकर जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, यहां तक अपराधियों के घरों को तोड़कर अपराध को कम करने की शानदार पहल और प्रदेश को शांति में करने के लिए अनेकों प्रकार के कार्यवाही को अंजाम देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है, इस पर जिले में किए गए कार्यवाही भी अपने आप में आज भी मिसाल कायम माने जा सकते हैं । तो क्या सिर्फ अपराधियों के लिए ही पुलिस प्रशासन और शासन लगाम लगाने के नजरिए से काम कर रही है, करोड़ों रुपया के जमीनों को लील जाने वाले भू माफियाओं पर कार्यवाही करने के लिए अनूपपुर शासन प्रशासन क्यों पीछे हैं, यह बात समझ के परे है।
राजा तिवारी नामक भू-माफिया करोड़ों की कृषि भूमि को काट-काट कर सैकड़ों प्लाट पर करोड़ों का अवैध रूप से धन अर्जित करने की खबर है, क्या इस पर नेतागिरी का बड़ा झंडा लगने के कारण कार्यवाही नहीं की जा सकती, यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कब कार्यवाही होगी, बहरहाल यह तो बाद का विषय है, फिलहाल आज की स्थिति में रोड काट-काट कर सैकड़ों प्लाट  अगल-बगल के शासकीय भूमि को भी कब्जा करते हुए बड़े काम को अंजाम दे रहे हैं, जो निश्चित रूप से आने वाले कल में जमीन की खरीदी और बिक्री में फंसे लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनने वाला है, क्योंकि आज नहीं तो कल कानून का डंडा और झंडा ऊपर होगा, तब अवैध रूप से बसे हुए लोगों को शासकीय भूमि से और अवैध रूप से किए गए प्लाटिंग पर से हटना पड़ेगा।
जहां तक मेरी जानकारी में है, उक्त जमीन के डॉयवर्सन के दस्तावेज एसडीएम कार्यालय लगाये गये है, शासकीय भूमि के कब्जे की जानकारी नहीं है।

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