प्राइवेट लिमिटेड की राह पर कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल…??

सिविल सर्जन ने खुद निजी चिकित्सालय

में पुत्र के पास भेजा मरीज

इधर डॉक्टर अम्बेडकर आर्थाे वार्ड में

मरीजों से गिन रहे नगदी

जनप्रतिनिधि व सत्ताधारी दल के जिम्मेदारों के साथ ही प्रशासन के मुखिया बद से बद्तर हो रही, जिला चिकित्सालय की व्यवस्था से आंखे मूंदे बैठे हैं। पहले भाड़े पर चिकित्सक और उसके बाद मरीजों से रूपये लेकर इलाज करने के बाद अब खुद सिविल सर्जन के द्वारा मरीज को यहां से अपने पुत्र के पास इलाज के लिए भेजने के मामले ने कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल की अस्मिता पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं।

(अनिल तिवारी)

शहडोल। संभाग का सबसे बड़ा शासकीय अस्पताल, जिसे पूर्व के वर्षाे में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए शासन ने कई एवार्ड भी दिये हैं, अब यह अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड की राह पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है। बीते सप्ताहों में यहां भर्ती प्रसुताओं के लिए भाड़े पर निजी चिकित्सकों से ऑपरेशन कराने का मामला सामने आया था, मंगलवार को जिला चिकित्सालय के आर्थाे वार्ड में भर्ती मरीजों ने ऑपरेशन के लिए चिकित्सकों द्वारा खुलेआम रूपये मांगने और लेने के बाद इलाज करने के आरोप लगाये, वहीं सबसे बड़ी बात यह रही कि अस्तपाल के मुखिया, सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार पर आरोप लगे कि उन्होंने यहां भर्ती मरीज को निजी चिकित्सालय में जाकर भर्ती होने और उनके पुत्र से ऑपरेशन करने की न सिर्फ सलाह दी, बल्कि उसे यहां से रवाना भी कर दिया।

केेेस-1

जिला चिकित्सालय के आर्थाे वार्ड में भर्ती प्रकाश वर्मन को बीते दिनों परिजनों ने यहां पर भर्ती कराया था, प्रकाश के दायें हाथ में गंभीर चोटे आई थी, प्रकाश ने बताया कि डॉक्टर अरविंद अम्बेडकर उन्हें चिकित्सीय परामर्श दे रहे हैं, पहले ही दिन उन्होंने आपरेशन के लिए 10 हजार का खर्च बताया, मोलभाव के बाद 7 हजार 500 रूपये में सौदा तय हुआ, डॉक्टर साहब के साथ वार्ड में आने वाले एक सांवले व्यक्ति जिसे मरीज नहीं पहचानता, उसके मार्फत रूपये लिये गये, लेकिन अभी तक ऑपरेशन नहीं किया गया है।

 

केेेस-2

सोहागपुर थाना अंतर्गत ग्राम रमधई निवासी बबलू केवट का गांव में ही हुए झगड़े के दौरान पैर टूट गया था, जिसे परिजनों ने कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल के आर्थाे वार्ड में भर्ती कराया, प्रकाश की तरह बबलू को भी डॉक्टर अरविंद अम्बेडकर देख रहे थे, बबलू केवट से पैर के ऑपरेशन के लिए 7 हजार रूपये मांगे गये थे, 5 हजार में सौदा तय हुआ, रूपये दे दिये गये और ऑपरेशन भी संपन्न हो गया।

 

केेेस-3

14 फरवरी को ग्राम बिजौरी के राममिलन और उसके साथी दुर्घटना का शिकार हुए, जब दोनों को अस्पताल लाया गया तो, खुद सिविल सर्जन डॉ. जी.एस. परिहार अस्पताल में थे, राममिलन का जबड़ा पूरी तरह से टूट गया था, जबकि उसके साथी की दुर्घटना में मौत हो गई। बकौल डॉ. जी.एस.परिहार….मैनें खुद उसे टांके भी लगाये थे, वह दो दिन तक अस्पताल में भर्ती भी था, चूंकि अस्पताल उसके ऑपरेशन के उपकरण नहीं थे, अत: उसे बाहर जाने की सलाह दी गई।

पुत्र मोह में जिम्मेदारियों से तोड़ा नाता

राममिलन सिंह ने बताया कि 14 फरवरी को दुर्घटना के 2 दिन बाद उसे होश आया, तब केबिन नंबर 7 वाले डॉक्टर परिहार (सिविल सर्जन) ने उसे देवांता नामक निजी चिकित्सालय में जाकर इलाज कराने की समझाईश दी, साथ ही यह भी कहा कि वहां डॉ. स्वदीप सिंह (सिविल सर्जन के पुत्र) से इलाज करायें, संभवत: 16-17 फरवरी को मरीज के परिजन उसे सिविल सर्जन के समझाईश पर देवांता ले गये और अगले 5 से 7 दिनों तक वह देवांता में भर्ती था, दंत चिकित्सक डॉ. जी.एस. परिहार के पुत्र दंत चिकित्सक डॉ. स्वदीप सिंह ने उसका ऑपरेशन किया, लेकिन गरीब की किस्मत एक बार फिर दगा दे गई, अस्पताल प्रबंधन ने लगभग 45 हजार के अलग-अलग बिल राममिलन को थमा दिये।

…फिर ली जिला चिकित्सालय की शरण

परिजनों ने ऑपरेशन फेल होने के बाद मेडिकल कॉलेज में कार्यरत ंदंत चिकित्सक डॉ. नमन से संपर्क किया, उनकी सलाह से दोबारा 21-22 फरवरी को फिर जिला चिकित्सालय में परिजनों ने राममिलन सिंह को भर्ती कराया, जो उपकरण अभी तक जिला चिकित्सालय का प्रबंधन करोड़ों के बजट के बाद भी, यहां गरीबों को नहीं दिलवा सका, उसे पीडि़त परिजन डॉक्टर की सलाह पर खुद क्रय कर लाये, जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन हुआ, ऑपरेशन सफल रहा।

उपकरण नहीं हैं, आयुष्मान के

लिए भेजा बाहर : सिविल सर्जन

कुशाभाऊ ठाकरे अस्पताल के प्राइवेट लिमिटेड अस्पताल की ओर बढ़ते कदमों और अन्य चिकित्सकों सहित खुद सिविल सर्जन के द्वारा मरीज को बाहर भेजने के संदर्भ में डॉ. जी.एस. परिहार ने बताया कि प्रकाश वर्मन और बबलू केवट के संदर्भ में हम नोटिस जारी कर जवाब-तलब करेंगे। मामले की जांच की जायेगी, वहीं राममिलन सिंह को निजी चिकित्सालय भेजने के संदर्भ में उन्होंने बताया कि अस्पताल में उपकरण नहीं है, इसके लिए हमने कलेक्टर के पास फाईल भेजी हुई है, वहीं उन्होंने बताया कि जब राममिलन पहली बार भर्ती हुआ था तो, खुद उन्होंने टांके लगाये थे, मामला क्रिटिकल था, उपकरण न होने के कारण मैनें खुद आयुष्मान योजना से चिन्हित अस्पतालों के नाम बताकर, वहां इलाज के लिए कहा था, देवांता अस्पताल भी आयुष्मान योजना के लिए चिन्हित है, इसीलिए मरीज वहां गया था, यह बात अलग है कि वहां उसे आराम नहीं मिला और कार्ड होने के बाद भी उससे लगभग 45 हजार देवांता वालों ने झटक लिये। वहीं सिविल सर्जन ने कहा कि मेरे व अस्पताल के नाम को बदनाम करने के लिए कुछ लोग साजिश रच रहे हैं। यह घटना क्रम उसी का हिस्सा है।

इनका कहना है…

मुझे भी ऐसी जानकारी मिली है, वार्ड में जाकर मरीजों से मिलता हूं। आरोप पूरी तरह गलत हैं।
डॉ. अरविंद अम्बेडकर
जिला चिकित्सालय, शहडोल
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डॉ. स्वदीप सिंह हमारे यहां स्थाई चिकित्सक नहीं है, मरीजों के हिसाब से वे आये जरूर होंगे, यह जानकारी दस्तावेज देखकर ही पुष्ट कर पाऊंगा।
संजय तिवारी
प्रबंधक
देवांता चिकित्सालय, शहडोल

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