हालातों से नहीं सीखा सबक: संसाधनों से जूझ रहा चिकित्सा क्षेत्र

604 बिस्तरों की क्षमता वाले मेडिकल कालेज में एक साल में लगे

155 बेड

130 चिकित्सकों की तुलना में सिर्फ 88 चिकित्सक

इधर उपलब्धियों का ढिढ़ोरा पीट रही सत्ता और नौकरशा

 शहडोल। जिले में शासन द्वारा कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की छनी हुई मीडिया रिपोर्ट 200 के आंकड़े तक पहुंच चुकी है। हालाकि राजधानी के निर्देश पर मौत के आंकड़े इस रिपोर्ट से किनारे कर दिये गये हैं और लॉकडाउन पर कड़ाई भी कर दी गई है। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज में संसाधनों की कमी के लिए समय रहते वे प्रयास नहीं किये जा रहे हैं और न ही किये गये, जिससे आज एक साल बाद भी 604 बिस्तरों की क्षमता वाले मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 155 ऑक्सीजन पैनल वाले बेड उपलब्ध हो पाये हैं। चिकित्सकों की कमी के साथ ही स्टॉफ नर्स, साफ-सफाई कर्मियों का भारी टोटा है, वहीं सुरक्षा में जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, वे न तो ठीक ढंग से अपनी भूमिका निभा रहे हैं और न ही वे इस लायक नजर आ रहे हैं कि उनसे यहां की जिम्मेदारी बखूबी सम्हाली जा सके। राजनैतिक कृपा पर आये ऑउटसोर्स के हाऊस कीपिंग व सुरक्षा के लगभग 120 कर्मचारी स्टॉफ और मरीजों सहित अन्य के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।
दिक्कतें बढ़ा रही संसाधनों की कमी
संभाग के इकलौते मेडिकल कॉलेज में लगातार मरीजों का दबाव बढ़ता जा रहा है, शुक्रवार को 110 मरीज सिर्फ ऑक्सीजन पर थे, इसके अलावा अन्य मरीज भी यहां भर्ती थे, चिकित्सा महाविद्यालय को शुरू हुए लगभग 1 साल होने जा रहा है, बावजूद इसके एनआरएचएम, व्यापम और अन्य राजनैतिक व प्रशासनिक पेंचीदगियों के कारण यहां मानव संसाधनों की सबसे बड़ी कमी है। चिकित्सा महाविद्यालय को पूरी तरह संचालित करने के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की गाइड लाईन के अनुसार 130 चिकित्सकों की आवश्यकता है, लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी मात्र 88 चिकित्सक ही हैं, सबसे बड़ी दिक्कत स्टॉफ नर्साे की है, 240 मरीजों की आवश्यकता के अनुपात में महज 50 नर्से वर्तमान में हैं, पूर्व में नर्साे की भर्ती हुई थी, लेकिन कोरोना का प्रभाव थोड़ा कम होते ही, सभी को बाहर कर दिया गया। मानव संसाधनों की कमी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऑक्सीजन पर 110 मरीजों को देखने के लिए महज 50 नर्से, वह भी कुछ अवकाश पर, कुछ पॉजीटिव और फिर 3 पारियों में इस संख्या का बट जाना।
1508 में मिलेगा रेमडेसिविर
चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. मिलिंद शिरोलकर ने बताया कि रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर काफी भ्रांतियां फैली हुई है, यह इंजेक्शन कारगर तो है, लेकिन एक मात्र विकल्प नहीं है, इसके दुष्प्रभाव भी हैं, इंजेक्शनों की भारी मांग को देखते हुए प्रदेश सरकार ने अब इसकी पर्याप्त उपलब्धता करवा दी है, इंजेक्शन किसे देना हैं, इसकी रिपोर्ट डॉक्टरों की टीम देगी और शासन स्तर पर महज 1508 रूपये में यह इंजेक्शन अब उपलब्ध हो सकेगा, इसी तरह ऑक्सीजन की उपलब्धता का ध्यान रखने की जिम्मेदारी एनआरएचएम को दी गई है, इसमें दिक्कतें तो हैं, लेकिन कमी नहीं है। प्रतिदिन 2.5 मिट्रिक टन ऑक्सीजन की आवश्यकता है और उसकी पूर्ति भी हो रही है।
मिलेंगे ऑक्सीजन पैनल के 60 बेड
डॉ. शिरोलकर ने बताया कि चिकित्सा महाविद्यालय में पूरी तरह यदि बेड लगा दिये जायें तो, 604 बेडो की यहां क्षमता है, एक वर्ष के भीतर स्वास्थ्य विभाग, कलेक्टर और प्रदेश सरकार द्वारा अलग-अलग प्रयासों के माध्यम से 155 ऑक्सीजन पैनल वाले बेड रेडी हैं, जबकि 60 और बेड चंद दिनों में रेडी होकर मिल जायेंगे। इसके साथ ही अन्य बेड भी यहां पर उपलब्ध हैं, शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में कुल 240 मरीज भर्ती थे, जबकि 70 आईसीयू में तथा 110 ऑक्सीजन में थे, उन्होंने कहा कि भविष्य को देखते हुए और तैयारियां की जा रही है, जिससे ऑक्सीजन व स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी न हो।
एमआरआई व सिटी स्केन की सौगात
डॉ. शिरालकर ने बताया कि बीते कुछ महीनों की लगातार मेहनत व पत्र व्यवहार के बाद हमें सिटी स्केन और एमआरआई की मशीनों को लगाने के लिए सहमति मिल गई है, उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में 6 नये मेडिकल कॉलेजों के साथ ही, तीन पुराने मेडिकल कॉलेजों में यह सुविधाएं आने वाले महीनों में चालू हो जायेंगी, हालाकि अभी पूरी तरह से मशीनों के लगने और उसका लाभ मिलने में करीब 4 माह का समय लगेगा, इस सुविधा से शहडोल, उमरिया, अनूपपुर व डिण्डौरी सहित इससे सटे क्षेत्रों के लोगों को लाभ मिलेगा, शुल्क के संदर्भ में उन्होंने बताया कि बाजार मूल्य से काफी कम शासकीय दरों पर उत्कृष्ट सेवा देना शासन की प्राथमिकता है।
25 अप्रैल से शुरू हुई थी सेवाएं
आज से लगभग 1 साल से कुछ दिन कम 25 अप्रैल 2020 को कोरोना की दस्तक के बाद कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेज को कोविड के मरीजों को समय से पहले ही खुलवाया गया था, इसमें मेडिकल कॉलेज के डीन और शहडोल कलेक्टर ने भोपाल तक लगातार प्रयास किये और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की 5 में से एक लेबल क्रास करने के बाद ही महाविद्यालय चालू हो गया, फिलहाल अभी 3 लेबल (परीक्षाओं) से गुजरना अभी बाकी है, 22 बिस्तरों से शुरू हुए अस्पताल में 27 अप्रैल को पहले 3 कोरोना के मरीज भर्ती हुए थे, जो आज 16 अप्रैल 2021 को 240 तक जा पहुंचे हैं।
पॉजीटिव व्यक्ति बाहर न घूमें
शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. मिलिंद शिरालकर ने कहा कि कोरोना से दूरी बनाकर रखना ही, उससे बचाव है, उन्होंने मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्थानों पर भर्ती और होम आइशोलेशन में रहे मरीजों और परिजनों से अपील की है कि पॉजीटिव व्यक्ति को किसी भी स्थिति में बाहर न निकलने दें, लक्षण नजर आते ही खुद आईशुलेशन में चले जाये। उन्होंने कहा कि घर पर ऑक्सी मीटर, थर्मामीटर जैसे उपकरण अवश्य रखें और दो गज की दूरी-मॉस्क है जरूरी का पालन करें।
शहडोल में काम करना नहीं चाहते चिकित्सक
मानव साधनों की कमी से चिकित्सा महाविद्यालय का बुरा हाल है, पहले तो, वरिष्ठ चिकित्सक यहां आना नहीं चाहते और निचले स्तर पर नर्स तथा अन्य स्टॉफ की नियुक्ति राजनैतिक पेंचीदगियों और व्यापम, एनआरएचएम के बीच उलझी पड़ी है, चर्चा के दौरान श्री शिरालकर ने बताया कि एक वर्ष बीतने के बाद भी हमारे पास एक्स-रे का कोई डॉक्टर नहीं है, कई बार भर्तियां निकली, व्यक्तिगत निवेदन भी किये गये, लेकिन शहडोल की जगह चिकित्सक महानगरों को ज्यादा तरजीह दे रहें हैं।
सीमित संसाधनों में उत्कृष्ट नतीजे
चिकित्सा महाविद्यालय में कहने को तो, 88 चिकित्सक हैं, लेकिन इनमें से महज चंद चिकित्सक ही ऐसे हैं, जो कोरोना जैसी महामारी से सीधे दो-चार होते हैं। यही हाल स्टॉफ नर्साे का भी है, मु_ी भर स्टॉफ नर्साे और वार्ड ब्वॉय के भरोसे कोरोना जैसे अदृश्य बीमारी से लडऩा अब यहां के स्टॉफ के लिए बोझिल होता जा रहा है, बावजूद इसके सीमित संख्या और संसाधनों के बीच चिकित्सा महाविद्यालय ने बीते 1 वर्ष के दौरान उत्कृष्ट नतीजे दिये, इसका अंदाजा अन्य चिकित्सा महाविद्यालय में भर्ती मरीजों और उनके ठीक होने व मौत के आंकड़ों की तुलना कर देखा जा सकता है।
गंभीर मरीजों के लिए बेड छोड़
पत्रकारवार्ता के दौरान डीन डॉ. मिलिंद शिरालकर ने चिकित्सा महाविद्यालय सहित अन्य चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों से अपील की, कि जब तक ऑक्सीजन की कमी, बुखार की अधिकता व ज्यादा खांसी न हो, घर पर ही दवाएं लेकर आइशुलेट रहें, स्थिति ठीक होने पर अन्य के लिए बेड खाली कर दें, जिससे दूसरों को भी समय पर इलाज मिल सके।

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