मेडिकल कालेज के रैन बसेरा में लटक रहा ताला

मरीजों के परिजन हो रहे परेशान, सो रहा प्रबंधन

शहडोल। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मनमानी के चलते रैन बसेरा में ताला लगा हुआ है, जिसके कारण शहर में 2 दिन से लगातार भारी बारिश होने के बावजूद मरीजों के साथ आये तीमारदारों को रैन बसेरा की सुविधा नहीं मिल पा रही है, संभाग में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके इसके लिए मेडिकल कॉलेज का शुभारंभ हुआ था, इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज का रैन बसेरा आज तक चालू नहीं हो पाया है, मजे की बात तो यह है कि कॉलेज प्रबंधन अपनी गलती छिपाने के लिये यहां आये मरीज एवं तीमारदारों को झूठा साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं, हालांकि प्रबंधन द्वारा जगह-जगह पर सीसीटीव्ही कैमरे लगवाये गये हैं, अगर उनकी पड़ताल करा ली जाये तो प्रबंधक की ढोल की पोल खुलकर सामने आ जायेगी।
2 दिन से नहीं भोजन

शहर में लगातार बारिश होने के कारण मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों के साथ रहने वाले परिजनों को 2 दिनों से भोजन नहीं मिल पाया है, एक ओर रैन बसेरा में ताला लटका हुआ है, वहीं दूसरी ओर पानी गिरने के कारण खुले में भी भोजन नहीं बना पा रहे हैं, भजिया और समोसा खा कर अपना गुजर बस कर रहे हैं, खुले मौसम में तीमारदार खुले आसमान के नीचे खाना बनाया करते थे, लेकिन 2 दिन से लगातार बारिश हो रही है, जिसके चलते उन्हें खाना बनाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और वह खाना नहीं बना पा रहे हैं।
गुड्डा कोल निवासी नौढिया ने बताया कि 2 दिन से लगातार बारिश होने के कारण हम लोग भोजन नहीं बना पा रहे हैं और प्रबंधक की तरफ से रैन बसेरा को चालू नहीं किया गया है, जिसके चलते हम समोसा और भजिया खा कर दो दिनों से भूख मिटा रहे हैं। वहीं सुरेश परस्ते डिंडोरी का कहना है कि हम 2 दिनों से भूखे हैं, क्योंकि हम बाहर खाना बनाया करते थे, लगातार बारिश होने के चलते हम लोग खाना नहीं बना पा रहे हैं, न ही हमारे पास इतना पैसा है कि हम लोग होटल जाकर खा सकें, यहां पर रैन बसेरा की सुविधा होने के बावजूद भी उस सुविधा पर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का ताला लगा हुआ है और उसे चालू नहीं कराया जा रहा है। इसी प्रकार अमरकंटक निवासी संतरामपुर बनावल ने बताया कि हम यहां मरीज को लेकर आयें हैं, हम खुले आसमान के नीचे भोजन बनाया करते थे, लेकिन 2 दिन से लगातार बारिश होने के कारण हम भोजन नहीं बना पा रहे हैं। रैन बसेरा की सुविधा होने के बावजूद यह सुविधा लोगों को मुहैया नहीं कराई जा रही है।

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