25 करोड़ की 9 एकड़ 60 डिस्मिल भूमि को लील रहा माफिया 

पहले बेची 12 एकड़, फिर बेच रहे उसी रकवे के नाम पर नजूल भूमि

पटवारी से लेकर तहसील के जिम्मेदारों की मिली भगत

पटवारी हलका सौखी के आराजी 120 में हो रहा करोड़ों का खेल

शहडोल। संभागीय मुख्यालय अंतर्गत नरसरहा डिपो के ठीक सामने सडक़ से लगी शासकीय आराजी खसरा क्रमांक 120 की 9 एकड़ 60 डिस्मिल जमीन जिसका सरकारी मूल्य लगभग 25 करोड़ और बाजार मूल्य 50 करोड़ से अधिक है, इस भू-खण्ड को माफिया राजस्व के जिम्मेदारों के साथ मिलकर लीलने के फेर में है। आज रविवार के दिन आरआई कंचनपुर भास्कर दत्त गौतम, आरआई नजूल मंगल दास चक्रवर्ती, आरआई सोहागपुर नंबर 01 वीरेन्द्र सिंह, पटवारी हलका बलपुरवा राजेन्द्र पटेल तथा पटवारी हलका चांपा आनंद मिश्रा की टीम तहसीलदार के आदेश का पालन करने यहां सीमांकन करने पहुंची थी। हालाकि यह बताया गया कि सीमांकन तो महज औपचारिकता थी, पहले से सब तय था, जिस जमीन का सीमांकन आदेश के तहत होना था, वह भू-खण्ड श्रीमती रेखा जायसवाल पति स्व. राजकुमार जायसवाल के मालिकाना हक का बताया गया, ग्राम सौखी स्थित आराजी खसरा नंबर 120/05/02 कुल रकवा 0.514 हेक्टेयर का सीमांकन और नक्षा तरमीम करने के लिए यह टीम वहां पहुंची थी। उक्त कार्यवाही राजेश पाण्डेय पिता रामप्रसाद पाण्डेय के द्वारा लगाये गये आवेदन के उपरांत तहसीलदार द्वारा गठित करके भेजी गई थी।
पटवारी ने किया खण्डन
रविवार के दिन जब जिले ही नहीं प्रदेश भर के पटवारी व राजस्व के कर्मचारी शायद ही आज से पहले कभी किसी भूमि का सीमांकन करने गये हों, लेकिन अपने कार्याे के प्रति वफादार और ईमानदार राजस्व कर्मचारियों की टीम भारी गर्मी के बाद भी रविवार को निर्धारित समय से पहले तहसीलदार का आदेश लेकर सीमांकन और नक्षा तरमीम की प्रक्रिया संपन्न करने सौखी के उक्त खसरे में पहुंची। इस संदर्भ में पटवारी राजेन्द्र पटेल ने बताया कि तहसीलदार के आदेश पर टीम गई जरूर थी, लेकिन उन्होंने पहले नियमानुसार वहां की शासकीय आराजी की खसरा नंबर 120 की 9 एकड़ 60 डिस्मिल भूमि नियमत: पहले नापने की बात कहीं, पटवारी ने यह भी बताया कि आज सीमांकन व अन्य प्रक्रिया नहीं की है, पहले सरकारी भूमि नापेंगे, उसके बाद राजेश पाण्डेय के आवेदन पर भूमि नापी जायेगी।
यह है पूरी कहानी
शहडोल के सौखी हलके अंतर्गत आराजी खसरा क्रमांक 120 के भू-खण्ड का बड़ा क्षेत्रफल है, राजस्व अमले से मिली जानकारी के अनुसार यहां 9 एकड़ 60 डिस्मिल नजूल की भूमि है, इसी भू-खण्ड की शासकीय कीमत 25 करोड़ से अधिक बताई गई है। इसी रकवे में 120/1 का भू-खण्ड भारत सिंह पत्नी गुलबिया बाई पुत्र महेश सिंह के नाम पर करीब 4 दशकों से अधिक समय से रजिस्टर्ड है। वहीं 12 एकड़ का भू-खण्ड विजय-अनिल-बहादुर सिंह के नाम पर थी, लेकिन बीते वर्षाे में यह भू-खण्ड टुकड़ो-टुकड़ों में दर्जनों लोगों को इसी टीम के संरक्षण में बेंच दिया गया, यह भी जांच का विषय है कि जब 12 एकड़ भूमि कालोनी के रूप में काटकर बेची जा रही थी, उस दौरान यही जिम्मेदार अपनी जेबें भर रहे थे। यह भी बात सामने आई कि 12 एकड़ भूमि बेचने के दौरान भू-खण्डों के बीच से जो सडक़ मार्ग निकालकर जगह खाली छोड़ दी गई, वह इसी भू-खण्ड का हिस्सा था, लेकिन 12 एकड़ के रकवे से बेचे गये प्लाट का एरिया पट्टे से कटवाया गया, जिस कारण 12 एकड़ का भू-खण्ड सरकते हुए, इससे लगे 9 एकड़ 60 डिस्मिल नजूल की भूमि को लील गया, राजेश पाण्डेय के जिस भू-खण्ड का रविवार को सीमांकन और नक्षा तरमीम करने टीम पहुंची थी, उस भू-खण्ड को राजेश व मनोज की जोड़ी ने जुगाड़ के जरिए अपना स्वामित्व बनाया और 12 एकड़ का रकवा अब नजूल के रकवे को लीलने पर आमादा है।
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इनका कहना है…
इस संदर्भ में राजस्व अधिकारियों को आदेश देकर जांच कराई जायेगी, पहले नजूल के रकवे की ही नाप होगी।
श्रीमती वंदना वैद्य
कलेक्टर, शहडोल

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