ेेशौचालय निर्माण में गड़बड़झाला

शासकीय राशि का किया बंदरबांट, ग्राम पंचायत बरकोड़ा का मामला

शहडोल। आदिवासी अंचल विकास के मार्ग में चलते-चलते विकास की पंख तो शासन और प्रशासन ने लगा दिया लेकिन क्या रसातल में इसका परिणाम भी सकारात्मक रूप से भौतिक सर्वेक्षण में खरा उतरेगा इस बात का तो भान सत्ताधारी नेताओं और जिले में जिम्मेदार प्रशासनिक अमला को भी नहीं है, ऐसे ही मामला जिले के जनपद पंचायत गोहपारू ग्राम पंचायत बरकोडा का है जहां पर गोहपारू के भाजपा मंडल अध्यक्ष मंगलेश्वर सिंह पंचायत में राजनीतिक रसूख के कारण निर्माण कार्य मेे अतिक्रमण कर विभागीय अधिकारियों के गठजोड़ में आधे-आधे के हिस्सेदारी अर्जित कर रहे है।
मजदूरी का हो रहा बंदरबांट
राजनैतिक रसूख के बात की जाए तो यह मामला ग्रामीण अंचल के ग्राम पंचायत के महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी मजदूरों की मजदूरी में जिस प्रकार से बंदरबांट की जाती है उससे कहीं सरकार की मैदानी अमला को भी इसकी हिस्सेदारी में अपनी जवाबदेही समझ रखें प्रशासनिक कार्यशैली के बागडोर संभालते हुए अगर मजदूरों की मजदूरी उनके गाढ़ी मेहनत का दाम प्राप्त नहीं हुआ तो प्रशासनिक सेवाओं के दम भरने वाले अधिकारी अपने नाकामी के कामयाबी को ढिंढोरा पीटने के लिए जिले के मानस भवन में पत्रकार वार्ता कर शासन के सुशासन व्यवस्थाओं का जायजा अपने माध्यम से विकास के सरोकार जन-जन तक सेवा बयां करते हैं सरकार में सत्ताधारी नेताओं ने सरकार की योजनाओं को भी अपने ही पिता की जागीर समझ कर आपसी समझौता का हिस्सा मान रखा है।
अपनी भूमि पर बना दिया शौचालय
सामुदायिक शौचालय की अगर बात करें तो महिला सरपंच श्रीमती चंद्रावती सिंह अपने पति राधिका सिंह के नाम पर निजी आराजी खसरा नंबर 1177 रकबा 0.0709 हेक्टेयर में रच डाला, जब इसकी शिकायत जनता के द्वारा गोहपारू मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुद्रिका पटेल को प्राप्त हुई तो उन्होंने तो आराजी के भूमि में निर्माण कार्य संचालित होना मानने को तैयार ही नहीं, विभागीय उपयंत्री सुभाष एवं सहायक यंत्री बाबा खान शासकीय योजनाओं को संचालित करने के पूर्व विभाग भौतिक निरीक्षण एवं पटवारी प्रतिवेदन अपने भौतिक स्टीमेट में सबमिट करते हैं लेकिन यह जिम्मेदारी साझा करना शायद सहायक उपयंत्री के कार्यशैली से बाहर दिखाई दे रहा था तो यह क्या है राजनैतिक मामला भाजपा के अनुसूचित जाति के मंडल अध्यक्ष के तौर पर जहां पति का कबीज हो वहां पर सरपंच पत्नी को सरकार की योजनाओं को अपने घर के चारदीवारी में सजाना कोई बड़ी बात नहीं है ।
शिकायत के बाद नहीं हुई कार्यवाही
सरकार की सोच को अगर माना जाए तो सामुदायिक शौचालय का अर्थ यह है कि ग्राम पंचायत में शौचालय विहीन परिवार को सुलभ शौचालय प्राप्त हो सके, यही है शासकीय राशि का उपयोगिता जिसकी निरीक्षण जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री पार्थ जयसवाल भी मासिक बैठक और सेक्टर भ्रमण के दौरान ग्राम पंचायत बरकोडा के समकक्ष बनाए गए शौचालय को अपने नजरों से देख कर नजर अंदाज करते दिखाई दिए शिकायत के पश्चात भी नहीं हुई कार्यवाही प्रशासनिक अधिकारियों को इस बात का ख्याल ही नहीं कि ग्रामीणों ने जिस मुद्दे को लेकर बहरहाल सरपंच एवं सरपंच पति का शिकायत की गई थी उस पर कार्यवाही करना भी जायज है उनके कर्तव्य निष्ठा का भी एक बड़ा पहचान साबित होगा।

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