अधिकांश लैब बिना एमडी चिकित्सकों के संचालित

दिखावे की कार्यवाही तक सिमटे विभाग के जिम्मेदार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश नहीं रखते मायने

 

(संतोष टंडन)

शहडोल। सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 3 वर्ष पूर्व अपने आदेश में कहा था कि बगैर एमडी पैथोलॉजिस्ट के कोई भी लैब संचालित नहीं कर सकता और उनके हस्ताक्षर के बगैर कोई रिपोर्ट जारी नहीं की जा सकती। लेकिन संभाग में एमबीएस व अन्य चिकित्सकों के निवास सहित चिकित्सालयों के आस-पास समेत शहर की सभी सीएचसी-पीएचसी तथा प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टरों के घरों के आस-पास भी प्राइवेट लैब चल रही हैं, जहां पैथोलॉजिस्ट नहीं हैं, इन जगहों पर टेक्नीशियन ही धड़ल्ले से रिपोर्ट जारी कर रहे हैं। इसके चलते कई बार लैब की जांच रिपोर्ट पर सवाल भी उठते रहे हैं। खास तौर पर बीमारियों के सीजन में इन लैब में मरीजों की खासी भीड़ होती है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में इन्हें जिम्मेदारों को बंद कराना था, लेकिन दिखावे की कार्यवाही कर जिम्मेदार लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।
धन की चाभी से खुले जाते ताले
संभाग में प्राइवेट लैब का धंधा तेजी से बढ़ा है, इसकी वजह यह बताई जाती है कि जांच करने के लिए चाइना मेड उपकरण आने लगे हैं, ये काफी सस्ते होते हैं। बमुश्किल 3-4 लाख रुपए खर्च करके सेल काउंटर व शुगर जैसी जांचों की मशीनें कोई भी खरीद रहा है, लैब के रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में सरकारी तंत्र का निजी लैब संचालकों पर कोई डर भी नहीं है। ऐसा नहीं है कि इन पैथोलॉजियों पर कभी कार्यवाही नहीं हुई, मजे की बात तो यह है कि कुछ पर विभाग के ताले लगे और कुछ को नोटिस भी जारी हुआ है, लेकिन संभवत: धन की चाभी ने इस कारोबार को सुचारू रूप से संचालन की अनुमति दिला दी।
डॉक्टर भी होंगे दोषी
2010 में गुजरात हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि सिर्फ एमडी पैथोलॉजी ही रिपोर्ट कर सकते हैं। इस आदेश को चुनौती देते हुए गुजरात की पैरामेडिकल एसोसिएशन के सदस्य हाईकोर्ट गए तो कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, इसके बाद ये सुप्रीम कोर्ट चले गए। देश की सर्वोच्च अदालत ने 12 दिसंबर 2017 को ऑर्डर किया है कि सिर्फ एमडी पैथोलॉजी ही रिपोर्ट दे पाएंगे। कोर्ट ने एमसीआई द्वारा इसे लेकर तय प्रावधानों को सही बताया। साथ ही यह भी कहा कि डॉक्टर यदि पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर के बगैर किसी की जांच रिपोर्ट को स्वीकार करते हैं, तो वे भी दोषी होंगे।
जांच के नाम पर खानापूर्ति
संभागीय मुख्यालय सहित कस्बों में अधिकांश लैब बिना एमडी चिकित्सकों के चल रही है। समस्या यह है कि एक लैब संचालक ने अपने कई सेटेलाइट कनेक्शन सेंटर खोल रखे हैं। जिन पर टेस्ट के लिए सैंपल एकत्र किए जाते हैं। लैब पर 30 या इससे अधिक सैंपल एकत्र होते हैं, वहां एमबीबीएस चिकित्सक तैनात होने चाहिए। इस नियम का लैब संचालक धज्जियां उड़ा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य विभाग जांच के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है।

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