रिश्वतखोर लिपिक पर नहीं हुई कार्यवाही

धीमी प्रकिया से प्रशासन पर उठे सवाल

लोकायुक्त ने जनपद कार्यालय गोहपारू में लिपिक पर की थी कार्यवाही

(Amit Dubey+8818814739)
शहडोल। जिले गोहपारू जनपद में पदस्थ लिपिक शुभम श्रीवास्तव को बीते 12 अगस्त को रीवा लोकायुक्त ने रोजगार सहायक से रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा था, लेकिन उसके बाद भी उसके रुतबे में कमी नहीं आई। रिश्वतखोर के खिलाफ कार्रवाई की इस धीमी प्रक्रिया के पीछे जनपद के मुखिया ने तर्क दिया कि अभी लोकायुक्त कार्यालय से अभी किसी प्रकार का पत्र नहीं आया है, हालाकि चार्ज-प्रभार ले लिया गया है, मजे की बात तो यह है कि रिश्वत लेने के चक्कर में एक लिपिक द्वारा विभाग की छवि धूमिल की गई, इसके बावजूद विभाग द्वारा कार्यवाही न करना यह समझ से परे है, यही वजह है कि लोकायुक्त की इतनी कार्रवाई होने के बावजूद आमजन का कोई भी काम बिना रिश्वत के नहीं होते।
नहीं ले रहा कोई संज्ञान
भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ देने की होड़ में लगे जनपद कार्यालय हर रोज रिश्वतखोरी और कमीशनबाजी के नए नए पन्ने लिख रहे हैं। यहां बैठा अमला धनलोलुपता में इतना अंधा हो चुका है कि वह अपने कर्मचारियों की भी हड्डी चूसने पर आमादा हो उठा है। ग्राम पंचायतों के विकास का जिम्मा उठाये जनपद में जब शुभम श्रीवास्तव जैसे कर्मचारी रिश्वत लेने के बाद भी विभाग से जुड़े रहेंगे तो, विभाग का कटघरे में खड़े होना लाजमी है, वहीं दूसरी ओर जिले में बैठे जिम्मेदार भी इस मामले में संज्ञान नहीं ले रहे हैं। चर्चा है कि आज भी कथित रिश्वतखोर लिपिक जनपद में अपनी सेवाएं दे रहा है और कार्यवाही न होने से उसके हौसले बुलंद है।
समीक्षा बैठक रह गई औपचारिकता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिले की समीक्षा के दौरान कहा था कि शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों से पैसा मांगने वालों को नौकरी से बाहर करें। गरीब से पैसा मांगने वालों को शासकीय सेवा में रहने का हक नहीं है, वहीं दूसरी ओर 12 अगस्त को अपने ही जनपद की ग्राम पंचायत सरना के रोजगार सहायक से रिश्वत मामले में आज भी लिपिक शुभम श्रीवास्तव को बाहर करना तो दूर प्रशासन ने निलंबित तक नहीं किया है, इससे साफ जाहिर होता है कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई समीक्षा को स्थानीय प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है।
यह था मामला
ग्राम पंचायत सरना में पूर्व में पदस्थ सुरेन्द्र यादव को काम काज में लापरवाही और अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया था। इस पर वह अदालत की शरण में चला गया। जहां से उसे न्याय मिला और उसे ग्राम पंचायत में पदस्थ करने का निर्णय लिया गया, लेकिन उसे ग्राम पंचायत में पदस्थ नहीं कर जनपद कार्यालय मेें अटैच कर दिया गया। यहां से उसे उसके कार्यस्थल सरना ग्राम पंचायत में पदस्थ करने के नाम पर कार्यालय लिपिक शुभम श्रीवास्तव द्वारा 20 हजार रुपए की मांग की गई थी। यह राशि सीइओ के नाम से मंागी जा रही थी।
अधिकारियों पर नहीं था भरोसा
पीडि़त रोजगार सहायक सुरेन्द्र ने बताया कि वह एक बार मेें इतनी रकम नहीं दे सकता है। तब उसे कहा गया था कि वह किश्त मेें रकम दे दे। इस पर वह दो बार में 7 हजार रुपए दे दिया था। तीसरी बार उसे पांच हजार रुपए देना था। इस रकम के लिए उसे बार-बार परेशान किया जा रहा था। तब सुरेन्द्र यादव ने लोकायुक्त रीवा से शिकायत की थी। लोकायुक्त ने पूरी जानकारी ली और दबिश डाली। चूंकि रोजगार सहायक अफसरों की हालत जानता था, इसलिए उसने अधिकारियों से शिकायत करने की बजाय सीधा लोकायुक्त से शिकायत करना ही ठीक समझा। योजना के अनुसार 12 अगस्त शुक्रवार की दोपहर लोकायुक्त की टीम पहुंची और अकाउंटेंट शुभम को उसके कार्यालय में ही 5000 रुपए सुरेन्द्र से दिलवाए गए। जैसे ही शुभम ने रकम हाथ मेे ली कि टीम ने उसे घेर कर रकम सहित दबोच लिया।
इनका कहना है…
अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई, चार्ज प्रभार ले लिया गया है, लोकायुक्त कार्यालय से कुछ पत्र आ जाये तो, पुख्ता प्रमाण हो जायेगा, हालाकि कागज आते ही होंगे, किसी भी दिन आ सकता है।
वेदमणि मिश्रा
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जनपद पंचायत गोहपारू
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पत्र कार्यालय से 3-4 दिन के अंदर किसी भी हालत में निकल जाता है, यहां से पत्र भेज दिया गया है, आप जिला पंचायत शहडोल से संपर्क कर उनसे पूछे आखिकर कार्यवाही क्यों नहीं की गई।
स्टेेनो
लोकायुक्त कार्यालय, रीवा
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तत्काल ही इस मामले में कार्यवाही की जा रही है।
हिमांशु चंद्रा
जिला पंचायत अधिकारी, शहडोल

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