न खदान, न रॉयल्टी, दो साल से हर दिन बिक रही क्रेशर से गिट्टी

गोहपारू के दियापीपर में चल रहा खुलेआम अवैध कारोबार

न तो पुराने और न ही नये खनिज अधिकारी ने की जांच

(शुभम तिवारी)

शहडोल। जिले के गोहपारू जनपद में क्रेशर मंडी में अवैध व्यापार खनन उद्योग के समानांतर एक बड़ा उद्योग बनकर उभरा है। इस अवैध कारोबार ने एक ओर जहां वैध क्रेशर एवं खनन कारोबार को बंदी की कगार पर पहुंचा दिया है, वहीं कृष्णा जैसे माफिया को धन कुबेर बनने में मदद मिल रही है, दरअसल जिले के गोहपारू जनपद के दियापीपर में अवैध गिट्टी का कारोबार किया जा रहा है। खनिज विभाग द्वारा दी जाने वाली लीज खत्म होने के बावजूद कृष्णा नामक क्रेशर संचालक द्वारा प्रतिदिन गिट्टी फोड़ रहे हैं और बाजार से कम मूल्य पर गिट्टी बेचकर वैध कारोबारियों के लिए संकट खड़ा कर दिया है।

राजस्व की पहुंच रही क्षति

गोहपारू जनपद की ग्राम पंचायत दियापीपर में आवंटित पट्टों के अलावा अवैध खनन का धंधा खूब फल-फूल रहा है। कृष्णा स्टोन क्रेशर के संचालक अवैध तरीके से खनिज सामग्री का परिवहन करा कर सरकार को राजस्व की हानि पहुंचाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रशासन सख्त हुआ तो माफियाओं में हड़कंप मच था। खनिज विभाग द्वारा डेंट रेंट जमा करने पर कृष्णा स्टोन क्रेशर को बंद कर दिया था, लेकिन बावजूद इसके उक्त कारोबारी द्वारा प्रतिदिन चोरी का पत्थर उत्खनन करा कर गिट्टी तोड़कर बाजार में बेंच रहे हैं।

पत्थर का अवैध उत्खनन

गिट्टी निकालने के नाम पर कृष्णा स्टोन के संचालक कानून की किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही है, क्रेशर संचालक ने प्रशासन से सांठ गांठ कर सीज हुई खदान से पत्थरों का अवैध उत्खनन तो कर ही रही है, साथ ही खुलेआम क्रेशर का संचालन कर खनिज विभाग को मुंह चिढ़ा रहे हैं, मजे की बात तो यह है कि खनिज विभाग के मैदानी जिम्मेदारों को इस बात की जानकारी होने के बाद भी इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। सूत्रों की माने तो अवैध उत्खनन कर जहां एक ओर पत्थर खदान को खाई का रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा खदान सीज होने के साथ ही क्रेशर संचालन न करने की हिदायत के बाद भी क्रेशर का संचालन करना कहीं न कहीं उनकी दबंगई को उजागर करता है।

तय की थी जवाबदेही

अवैध उत्खनन को लेकर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने साफ तौर पर कहा है कि जिले के जिस जगह अवैध उत्खनन होगा, वहां तो बीट प्रभारी जिम्मेदार होंगे, अगर सरकारी जमीन पर उत्खनन होता है तो पटवारी व राजस्व निरीक्षक की भूमिका भी तय की जाएगी। वन विभाग की भूमि में अवैध उत्खनन पाया जाता है तो संबंधित रेंजर व एसडीओ की जवाबदारी होगी और कहीं भी अवैध उत्खनन की शिकायत मिलती है तो खनिज विभाग की संलिप्तता मानी जाएगी, बावजूद इसके अवैध उत्खनन कर क्रेशर के कारोबार संचालन कर वैध कारोबारियों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं।

प्रशासन को लेना चाहिए संज्ञान

ग्रामीणों की शिकायत है कि खनिज विभाग के संरक्षण के बगैर पत्थर का अवैध उत्खनन संभव ही नहीं है। चर्चा है कि क्रेशर उद्योग के लिए जिस भूमि से पत्थर का उत्खनन करने की अनुमति ली गई थी, उस पत्थर खदान सहित क्रेशर को कलेक्टर ने सील करवा दिया था, लेकिन खनिज विभाग के जिम्मेदारों से सांठ-गांठ कर प्रतिदिन शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है, लेकिन खनिज विभाग जिम्मेदारों ने चंद-चांदी के सिक्कों के फेर में अवैध कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं। जागरूक लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये।
इनका कहना है…
इस संदर्भ में न तो कोई जानकारी है और न ही शिकायत, यदि शिकायत मिलेगी तो, हम जांच और कार्यवाही करेंगे।
प्रमोद शर्मा
खनिज अधिकारी
शहडोल

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