सत्ता की दहशत में वन-बफर जोन के जिम्मेदार

पत्र लिखने के बाद करोड़ों की रिकवरी नहीं हो पा रही तय
मामला वंशिका कंस्ट्रक्शन द्वारा बफर जोन में किये गये अवैध उत्खनन का
कलेक्टर ने 10 नवम्बर को जारी किया था पत्र

वन, खनिज व बफर जोन की संयुक्त टीम ने किया निरीक्षण

नरसिंहपुर की वंशिका कंस्ट्रक्शन कंपनी जिले में रेत के उत्खनन का ठेका लिए हुए है, आधी खदानें पेटी पर दे दी गई, बाकी खदानों से वैध और अवैध उत्खनन जारी है, सत्ता से जुड़े मैहर के चतुर्वेदी नामक पिता-पुत्र जिला प्रशासन सहित खनिज, वन व संजय गांधी टाइगर रिजर्व के जिम्मेदारों पर इतना दबाव बनाये हुए हैं कि प्रशासन के नुमाइंदे इस संबंध में बयान देने तक में असमर्थ हैं।

(सुनील मिश्रा) -9755476196

शहडोल। जिले के ब्यौहारी विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम बोड्डिहा में वंशिका कंस्ट्रक्शन कंपनी नरसिंहपुर को खनिज विभाग द्वारा आराजी खसरा क्रमांक 105/2  ,11.242 के अंश भाग में भण्डारण व विक्रय किये जाने की अनुमति दी गई थी, लेकिन कथित फर्म निर्धारित स्थल से परे हटकर भण्डारण कर रही है, यही नहीं बयोस्फियर रिजर्व व एनजीटी के कायदों को दरकिनार कर उसे गलत स्थान पर अनुमति देने के आरोप हैं, यही नहीं जयसिंहनगर के ग्राम झलरा के खसरा क्रमांक 39/45 कुल रकवा 3.780 हेक्टेयर में कथित फर्म के द्वारा करोड़ों की अवैध रेत आवंटित खदान से हटकर उत्खनित कर ली गई। इन मामलों में माह भर का समय व्यतीत होने के बाद भी न तो शहडोल जिला प्रशान और न ही संजय टाइर्गर रिजर्व सीधी के जिम्मेदार किसी नतीजे पर पहुंचे हैं, हालाकि बीते सप्ताह संयुक्त टीम ने इस   क्षेत्र का भ्रमण भी किया और संजय टाईगर रिजर्व सहित राजस्व, वन व खनिज की टीम भी थी।

सार्वजनिक हो पट्टा-रिपोर्ट

खनिज निरीक्षक प्रभात पट्टा के द्वारा 7 नवम्बर को उक्त क्षेत्र में शिकायत के बाद निरीक्षण किया गया था, जिसमें सोन नदी में बड़े पैमाने पर आवंटित स्थल से हटकर अवैध उत्खनन पाया गया था, खनिज निरीक्षक और खनिज अधिकारी ने तो, मामले की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी थी, जिसके बाद कलेक्टर ने वंशिका कंस्ट्रक्शन कंपनी को विभागीय पत्र क्रमांक 3192 दिनांक 10 नवम्बर को जारी करते हुए, 24 नवम्बर तक अपना पक्ष रखने का आदेश भी दिया था, लेकिन प्रभात पट्टा की यह रिपोर्ट कलेक्टर व खनिज टेबिल के बीच एक माह तक कहां खो गई, यह जांच का विषय है, सूत्रों की माने तो इस संदर्भ में ब्यौहारी विधायक शरद कोल तक को हस्ताक्षेप करने की जरूरत पड़ गई, लेकिन सत्ता के इस नुमाइंदे पर भी वंशिका का प्रभाव शायद भारी पड़ा। आवश्यकता है कि प्रशासन खुद पर लग रहे आरोपों से बचने के लिए प्रभात पट्टा के द्वारा बनाई गई रिपोर्ट को जनसंपर्क के माध्यम से सार्वजनिक करे, जिससे जिम्मेदारों पर आरोप लगने बंद हों।

निकाल रहे बीच का रास्ता

कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह द्वारा वंशिका को दिये गये पत्र और समय को एक माह से अधिक की अवधि बीत चुकी है, इस दौरान उनके द्वारा क्या पक्ष रखा गया, यह मामला भी सामने आने की आवश्यकता है, जिससे कांग्रेस से भाजपा में आये मैहर के दिग्गज नेता और वंशिका के सूत्रधार सहित नरसिंहपुर के कंपनी के मालिकों पर जिले में लग रहे आरोपों का खण्डन हो सके। आरोप हैं कि बीते दिनों इस संदर्भ में वंशिका के संजय शर्मा का शहडोल दौरा भी हुआ है, लेकिन जब बाड़ी ही खेत खाने लगे तो, नौकरशाह कहां तक सत्ता की पहरेदारी करेंगे। यह भी चर्चा है कि खनिज निरीक्षक पट्टा की रिपोर्ट के बाद लंबे जुर्माने से बचने के लिए बीच के रास्ते निकाले जा रहे हैं। यही कारण है कि एक माह से अधिक का समय बीत चुका है और पूरे जिले में हो रही इस चर्चा के संदर्भ में जिम्मेदार कोई बयान जारी नहीं कर रहे हैं।
(बॉक्स बनाकर लगाये)

क्लीन चिट देने का चल रहा खेल

1 दिसम्बर को संजय टाइर्गर रिजर्व सीधी के संयुक्त संचालक द्वारा बोड्डिहा स्थित आराजी खसरा क्रमांक 105/2 कुल  रकवा 11.242 हेक्टेयर के अंश भाग जो, अभ्यारण से सटा हुआ क्षेत्र हैं, यहां सोन घडियाल अभ्यारण व टाईगर्स के लिए बफर जोन निर्धारित किया गया है, इस क्षेत्र में अवैध उत्खनन, परिवहन व भण्डारण का मामला सामने आने के बाद बफर जोन सहित वन्य, राजस्व व खनिज की संयुक्त टीम ने यहां का दौरा किया, संभवत: आज उसकी रिपोर्ट सोन घडियाल के अनुविभागीय अधिकारी भगवती प्रसाद तिवारी अपने विभाग को सौंपेंगे, सूत्रों पर यकीन करें तो, सत्ता के दबाव के कारण एक ही संयुक्त जांच में संजय टाईगर रिजर्व के साथ ही राजस्व, खनिज और वन विभाग द्वारा वंशिका के अनुरूप रिपोर्ट लगभग बनाई जा चुकी है। वंशिका के दबाव का आलम यह है कि चारों विभागों के जिम्मेदारों से जब चर्चा की गई तो, उन्होंने कार्य स्थल से बाहर होने, रिपोर्ट का इंतजार करनें, यहां तक की खुद के क्षेत्र से बाहर होने तक के बयान दे दिये। जिससे साफ जाहिर होता है कि सत्ता और नौकरशाहों के गठ-बंधन के आगे सारे कायदे शिथिल पड़ते जा रहे हैं।

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