कार्यवाही के बजाय प्रदूषण विभाग दे रहा संरक्षण, स्टोन क्रेशर पर्यावरण के नियमों को धत्ता बताते हुए हो रहे संचालित

कार्यवाही के बजाय प्रदूषण विभाग दे रहा संरक्षण,  स्टोन क्रेशर पर्यावरण के नियमों को धत्ता बताते हुए  हो रहे संचालित

 

कटनी /बरही। नियमों को दरकिनार कर करौंदी कला के ददरा टोला मे जंगल के बीच स्थापित है माँ शारदा स्टोन क्रेशर पर्यावरण को बचाने और उसे संरक्षित करने के लिए जहां देश दुनिया भर के लोग जुटे हुए है सरकार लाखों करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वही जिले का प्रदूषण विभाग नेताओं और रसूखदारों के दबाव में आकर स्टोन क्रेशर प्लांटों को मनमानी करने की खुली छूट दे रहा है। विभाग के आला अधिकारी यह जानते हैं कि यह स्टोन क्रेशर समस्त प्रकार के नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं लेकिन इनके खिलाफ कार्यवाही करने मे अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं मुख्य वजह यह है कि क्रेशर प्लांट छोटे मोटे लोंगो के नहीं रसूखदारों के हैं जिससे अधिकारियों को कार्रवाई करने मे सांप सूंघ जाता है।

बरही तहसील क्षेत्र के करौंदी कला ददरा टोला मे जंगल के बीच संचालित माँ शारदा माइंस एंड मिनरल्स स्टोन क्रशर पर्यावरण के नियमों को धता बताते हुए संचालित हो रहा है। यह स्टोन क्रेशर वन विभाग की मुनारा सीमा से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है स्टोन क्रेशर से निकलने वाली धूल प्राथमिक शाला के शासकीय स्कूल के बच्चों को प्रभावित करती है। वहीं सैकड़ों एकड़ में लगी हुई हरी-भरी फसल को भी खासा नुकसान पहुंचाती है। आलम यह है कि इसके वन विभाग सीमा से लगे होने के कारण यहां पर बाघ सहित अन्य अन्य प्राणियों की चहलकदमी हमेशा बनी रहती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यहां सांभर, हिरण, मोर, तेंदुआ, खरगोश, आदि जंगली जानवर का विचरण क्षेत्र है। स्टोन क्रेशर जंगल के बीच संचालित होने से वन्य प्राणियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है वहीं वन्य प्राणियों का यह शरण स्थल है। प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारी नियम को ताक मे रखकर जंगल के बीच क्रेशर प्लांट की अनुमति दे दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्लांटों के चलने से पत्थरों से उड़ने वाले छोटे-छोटे टुकड़े लोंगो को घायल कर रहे हैं। प्लांट मे काम करने वाले मजदूर टीवी, दमा, श्वास के साथ चर्म रोग के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों के शिकार होते है। इन्हें कोई सुरक्षा सेफ्टी नहीं दिए गए है प्लांट के मालिक मजदूरों का शोषण कर रहे हैं इस ओर कोई ध्यान देने नहीं दे रहा है।

क्रेशर की दूर तक जाती है धूल,बर्बाद हो रही किसानों की फसल, जिम्मेदार मौन :

तहसील क्षेत्र के बिचपुरा, कनौर, जाजागढ़ ददरा में संचालित दर्जनों क्रेशर संचालकों की मनमर्जी से राजस्व को करोड़ों का चूना लग रहा है। वहीं एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां उड़ रही है प्लांटों मे नियम ताक पर है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। बताया गया कि यहां पर संचालित क्रेशर प्लांट मालिकों की सत्ता पर काबिज नेताओं से मजबूत पकड़ है जिससे लाखों करोड़ों रुपये का राजस्व की खुलेआम चोरी करते हैं खदानों मे जितनी क्षमता है कहीं उससे ज्यादा अवैध खनन किया गया है। लाखों करोड़ों की खनिज संपदा दोहन की गई है। खदानों की जितनी गहराई लंबाई चौड़ाई कर दी गई है यदि निष्पक्ष हो जाये तो अवैध खनन करने वाले रसूखदार प्लांट मालिकों की खटिया खड़ी और बिस्तर गोल हो जाएगी।

कागजों तक सीमित है नियम:

तहसील क्षेत्र मे दर्जनों स्टोन क्रेशर प्लांट संचालित हैं जिनके द्वारा नियम का पालन नहीं किया जाता। जबकि प्रदूषण विभाग की अहम भूमिका होती है इनके संचालन के लिए प्रदूषण विभाग की बकायदा टीप लगती है जिम्मेदारों के द्वारा नियम तो बनाये गए हैं लेकिन सिर्फ कागजों मे पालन हो रहा है यथा स्थिति नियम ताक पर हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियमों का स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि क्रेशर प्लांट की बाउंड्री वाल चारों तरफ 15 फुट की ऊंचाई हो इतना ही नहीं मशीनों में जहां से डस्ट उड़ती है वहां छन्ना लगा होना चाहिए इसके साथ ही क्रेशर प्लांट जब चालू हो उस समय धूल ना उड़ने के लिए उसमे लगातार पानी की सिंचाई करना अनिवार्य है। साथ ही आसपास एरिया मे पर्यावरण को संरक्षित करने पेड़ पौधे लगाना अनिवार्य है। किन्तु यहां नियम को ताक मे रखकर मनमानी चल रही है और जिम्मेदार प्रदूषण विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग खुली छूट देकर कुंभकर्ण निद्रा में लीन हैं स्थानीय ग्रामीणों ने मनमाने तरीके से चल रहे क्रेशर प्लांट संचालन पर रोक लगाने एवं कार्र्वाई की मांग की है।

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