क्षयरोग विभाग में हुई भर्तियों को लेकर उठे सवाल

नये कलेक्टर के आने के बाद जांच की उठी मांग

शहडोल। बीते कुछ माहों में विभिन्न विभागों में आउट सोर्स के माध्यम से हुए भर्ती घोटालों का कारवां रूकने का नाम नहीं ले रहा है, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम विभाग में भर्तियों में गड़बड़ी का मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है, आरोप है कि जिला स्वास्थ्य समिति क्षय उन्मूलन विभाग के लिए 9 लोगों की भर्ती विभाग द्वारा आउट सोर्स के माध्यम से की गई है, जिसमें विभाग में पदस्थ डॉक्टरों एवं चिकित्सा विभाग का कार्य देख रहे कर्मचारियों के रिश्तेदारों और मित्रों की भर्ती की गई है। बीते माह यह मामला सुर्खियों में आया था, लेकिन कोरोना काल के कारण जांच की फाईल और आदेश गुमशुदा हो गये।
कटघरे में भर्ती प्रक्रिया
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निर्देश के पालन में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से एक वर्ष के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति जिला स्वास्थ्य समिति (क्षय उन्मूलन) शहडोल द्वारा 30 जुलाई को की गई, जिसमें कार्य कर रही आउटसोर्स एजेंसी एक्स-सर्विसमेन सिक्यूरिटी फोर्स 1032/1 हाथीताल कालोनी जबलपुर को कर्मचारी की सूची प्रस्तुत किये जाने हेतु लेख किया गया था। कथित एजेंसी द्वारा जिन नामों को विभाग को दिया गया, उसमें कोई चिकित्सक का पुत्र, कोई चिकित्सक का रिश्तेदार एवं कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के लिपिक के मित्र की भर्ती कर ली गई, मजे की बात तो यह है कि उक्त पदों की भर्ती के लिए जिस योग्यता की जरूरत थी, उसको भी दरकिनार कर जिम्मेदारों ने 09 लोगों की भर्ती करने की खबर है, जिसमें अब जांच की मांग उठ रही है।
इनकी-इनकी हुई थी भर्ती
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत जिला क्षय अधिकारी कार्यालय में जिनकी आउट सोर्स नियुक्ति की गई उनमें देवेन्द्र कुमार अनुरागी, मयंक श्रीवास्तव, अजय सोंधिया, मयंक तिवारी, सुनील कुमार रजक, पंकज केवट, राघवेन्द्र बकसरिया, पप्पू नामदेव के नाम शामिल है, मजे की बात तो यह है कि इसमें देवेन्द्र कुमार अनुरागी मुख्य चिकित्सा एवं स्वाथ्य अधिकारी कार्यालय में लिपिक के मित्र एवं मयंक श्रीवास्तव का नाम जिला चिकित्सालय में ही पदस्थ अन्य है, ऐसे ही जो अन्य नाम है, वह कुछ तथाकथित सत्ताधारी दल से ताल्लुक रखते हैं।
यह लग रहे आरोप
चिकित्सा विभाग द्वारा आउट सोर्स कर्मचारियों के लिए संभवत: जिला चिकित्सालय में कार्य कर रही आउटसोर्स एजेंसी एक्स-सर्विसमैन सिक्यूरिटी फोर्स को हेल्थ विजिटर, सैंपल कलेक्शन सहित अन्य पदों के लिए कर्मचारियों को उपलब्ध कराने के लिए कह दिया गया, मजे की बात तो यह है कि एक सिक्यूरिटी एजेंसी जिसका काम गार्ड के माध्यम से जिला चिकित्सालय सहित अन्य जगह भवनों की सुरक्षा के लिए लड़के उपलब्ध करना है, आखिर उसने चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लड़के कैसे उपलब्ध करा दिये, सूत्रों की माने तो एक ओर जहां चिकित्सा विभाग से जुड़े लोगों के पुत्रों, रिश्तेदारों को रोजगार दिया गया, वहीं कुछ लोगों से मोटी रकम लेकर उन्हें नौकरी पर रखा गया है।
पात्रों को किया दरकिनार
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत जिला क्षय अधिकारी कार्यालय में जिनकी आउट सोर्स नियुक्ति की गई है, सूत्रों की माने तो कई युवक जिन पदों के योग्य नहीं है, उनकी भर्ती जिम्मेदारों द्वारा कर ली गई है, उक्त पदों की भर्ती के पूर्व किसी प्रकार की निविदा प्रकाशित न करने साथ ही रिश्तेदारों की नियुक्ति के कारण पूरी नियुक्ति प्रक्रिया ही कटघरे में नजर आ रही है। युवाओं ने जिले के मुखिया से मांग की है कि उक्त पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच कराकर पुन: निविदा के प्रकाशन के बाद उक्त पदों पर भर्ती कराई जाये।

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