पर्दे में छुपी राधा-रानी, आज सतेन्द्र के पैरामेडिकल कॉलेज का वैरीफिकेशन

(Anil Tiwari+7000362359)
शहडोल। जिला मुख्यालय सहित पड़ोस के जिलों मुख्यालयों ही नहीं बल्कि पहले ब्लाक और अब पंचायतों तक में नर्सिंग कॉलेजों की बाढ़ आई हुई है, छात्रों की फर्जी सूची दिखाकर छात्रवृत्ति घोटाला, एक ही बिल्डिंग में स्कूल से लेकर नर्सिंग कालेज और अन्य कारोबार भी लगातार संचालित हो रहे हैं, जिन्हें इन पर अंकुश लगाना चाहिए, वह साझेदार बन बैठे हैं। नया मामला शहडोल जिला मुख्यालय के राजेन्द्र टॉकीज के पीछे का है, यहां पूर्व से ही तेजा कॉम्पलेक्स में संचालित राधा-रानी नर्सिंग कॉलेज का भवन सहित अंदर की बैठक व्यवस्था से लेकर लायब्रेरी सहित सबकुछ राजीव गांधी साइंस इंस्ट्टीयूट पैरामेडिकल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ रहा है, पुराना पाठ्य पुस्तक निगम कार्यालय, रोहरा गोदाम के समीप डॉ. परिहार के आगे जहां तीसरी मंजिल के निर्माण की अनुमति तक नहीं है, उक्त भवन में राधा-रानी नर्सिंग कॉलेज के साथ यह संस्थान भी मान्यता प्राप्त करने के लिए अग्रसर है, आज मेडिकल कॉलेज रीवा के डाक्टरों की टीम अगले कुछ घंटो में यहां जांच के लिए पहुंचेगी, उनकी आंखों में पर्दा डाला जा सके, इसलिए राधा-रानी नर्सिंग कॉलेज के बोर्ड को टेंट के पर्दे से छुपा दिया गया है।
आप पहले और बाद के दोनों छाया-चित्र नीचे देख सकते हैं।

आज रीवा से आई टीम पहले 11 बजे आने वाली थी, इसलिए राधा-रानी नर्सिंग कॉलेज के छात्रों को 1 बजे की जगह 11 बजे ही छुट्टी दे दी गई, नीचे आज का वीडियो भी देख सकते हैं।

(यह है मामला)

फर्जी दस्तावेजों के सहारे पैरामेडिकल कॉलेज खोलने की कवायत
जिला मुख्यालय में लंबे अर्से से संचालित राजीव गांधी मेडिकल साइंस इंस्टीट्यूट के संचालक सतेन्द्र सोनी के द्वारा इस नाम से पैरामेडिकल कॉलेज खोलने के लिए कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किये गये हैं, मामले की शिकायत अजय सिंह नामक बलपुरवा निवासी युवक ने पैरामेडिकल काउंसिल मध्यप्रदेश के रजिस्टार सहित अन्य को की है। आरोप लगाने के साथ ही यह मांग की गई है कि ऐसी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैरामेडिकल कॉलेज खोलने की अनुमति न प्रदान की जाये, अगर नियमों को दरकिनार कर इस तरह का अनुचित लाभ दिया जाता है तो, शिकायतकर्ता को मजबूरन माननीय न्यायालय की शरण में जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

यह हैं आरोप

सतेन्द्र सोनी पर यह भी आरोप लगाये गये हैं कि पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता हेतु जो स्टॉफ की सूची संलग्न की गई है, वह वास्तविक रूप से यहां मौजूद ही नहीं है। यही नहीं बैंक गारंटी हेतु जो जमीन के दस्तावेज लगाये गये हैं वह भी कूटरचित हैं। शिकायत में यह भी लिखा गया कि पैरामेडिकल के लिए जिस भवन की जियो टैगिंग की गई है, उसमें पूर्व से नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं। यही नहीं जो अनुबंध मान्यता के लिए संलग्न किया गया है, वह अनुबंध नर्सिंग कॉलेज के साथ किये गये अनुबंध को छुपाकर किया गया है।
धोखाधड़ी का मामला करें दर्ज
शिकायतकर्ता ने पैरामेडिकल कॉलेज के रजिस्टार के अलावा मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव के साथ ही आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग भोपाल, सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन को भी भेजा है, शिकायतकर्ता ने मांग की है कि राजीव गांधी मेडिकल साइंस इंस्टीट्यूट के नाम से सतेन्द्र सोनी को पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता प्रदान करने के पूर्व उपरोक्त बताये गए तथ्यों की सत्यता की जांच अवश्य करवा लें और मेरे द्वारा बताए गए तथ्य सही पाए जाते हैं तो, सतेन्द्र सोनी के खिलाफ, भारतीय दंड विधान संहिता की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया जाये।

 

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