रेलवे ग्राउन्ड बना नशाखोरी का अड्डा, हर तरफ फैला है नशेडिय़ों का कचरा

रेलवे प्रशासन और पुलिस की सुस्ती से मिल रहा नशाखोरी को बढ़ावा

शहडोल। नशा करने वालों के लिए रेलवे कालोनी सबसे सरल स्थान और मनपसंद स्थान बन गया है । जिसमे रेलवे ग्राउंड सहित पूरी कालोनी में ऐसे कई स्थान है जहाँ पर जम कर नशा किया जाता है , और यह सब रेलवे प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है कालोनी में ही कई ऐसे स्थान है, जहाँ दिन में किसी भी नशाखोरी करते युवकों को देखा जा सकता है।
रेलवे कालोनी में नशे के कई अड्डे
इस सम्बन्ध में ध्यानाकर्षण दिलाते हुए रेलवे श्रमिक यूनियन बिलासपुर जोन के उपाध्यक्ष मनोज बेहरा ने कहा कि पूरी रेलवे कालोनी में नशा करने वालो के लिए सबसे चहेता और मनपसंद स्थान रेलवे सामुदायिक भवन के पीछे, रेलवे ग्राउंड, रेलवे यार्ड मालगोदाम के पास और कालोनी में बनें ऐसे घर जो अब अनुपयोगी हो गए है, इन स्थानों पर किसी भी समय नशाखोरी करते युवकों को देखा जा सकता है । रेलवे कालोनी नशाखोरी के लिए सबसे सरल स्थान इस लिए भी है कि जिन स्थानों का उल्लेख समाचार में हुआ है वह कभी भी कोई अधिकारी या कर्मचारी नहीं जाता । और नहीं कोई आम आदमी इन स्थानों में जाना पसंद करता है इसलिए इस जगहों में खुलेआम बिना किसी रोक-टोक के नशाखोरी करते देखा जा सकता है जिसके कारण पूरी कालोनी का माहौल खऱाब हो रहा है। यह बहुत ही चिंता का विषय है इससे कालोनी का माहौल खऱाब हो रहा है। साथ में युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही है जो की बहुत ही गलत है।

रेलवे ग्राउन्ड बना नशाखोरी का अड्डा,
एक वर्ष पूर्व हुई नगर की चर्चित अक्षत सोनी की हत्या भी नशावृत्ति का ही परिणाम है जिस में नशे के कारण चंद नशेडिय़ों ने एक बच्चे की बेरहमी से हत्या कर दी थी। जिले में यदि शीघ्र ही नशाखोरी में लगाम नहीं लगाई गई, तो वह दिन दूर नहीं जब इस तरह के हादसे हर दिन होते रहेंगे। रेलवे कालोनी में रहने वाले लोगो की यदि सघनता से जांच की जाये तो नशे के साधन उपलब्ध कराने वाले लोग भी मिल जायेंगे। रेलवे कालोनी में अनैतिक कार्य करने वाले लोगो का भी जमघट लगा रहता है ये लोग ट्रेन के आते ही स्टेशन परिसर में नशा करने की सामग्री बेचने के लिए सक्रिय हो जाते है। कोरेक्स दवाइयों के साथ खुले आम शराब बेचते ये लोग स्टेशन में आने-जाने वाले लोगो से अभद्रता करते है ।
रेलवे पुलिस का सुस्त रवैया
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे पुलिस भी कोई प्रयास नहीं कर रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रेलवे पुलिस के सुस्त रवैय्ये के कारण हर समय भय का माहौल बना रहता है। कालोनी में न कभी गश्ती लगती है नहीं कभी सुने जगहों कि तलाशी ली जाती है। कालोनी का विस्तार इतना बड़ा होने के कारण पूरे क्षेत्र में कई ऐसे अड्डे बने हुए है जिनकी पड़ताल आवश्यक है साथ ही रेलवे कालोनी के खाली पड़े घरों और सूनी जगहों में पुलिस कि गश्ती भी जरूर है, अन्यथा अक्षत सोनी जैसे हादसे का दोहराव किसी भी समय हो सकता है।
परिसर में फैली है शराब और कोरेक्स की बोतले
रेलवे कालोनी में नशे का आलम इतना बढ़ चुका है कि केवल रेलवे परिसर की तलाशी ली जाये तो कई स्थानों में शराब की बोतले, कोरेक्स, ड्रग्स, सिरिंज, गोलियों के रैपर आदि मिल जायेंगे। नशाखोरी का अड्डा बन चुके पूरे रेलवे परिसर में कभी कोई अधिकारी या पुलिसकर्मी का न आना रेलवे पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाता है। साथ ही इस बात को भी बताता है कि प्रतिबन्ध के बाद भी नशेडिय़ों को कोरेक्स कि बोतले कौन उपलब्ध करा है। सबसे ज्यादा संदेह स्टेशन में घूमनके वाले लोगो में है, ये लोग ट्रेन से परिवहन कर नशे की सामग्री लेकर आते है और दूसरी ट्रेन से गायब हो जाते है, ऐसे लोग की पहचान करना नशेडिय़ों के लिए आसान है जिनसे कोरेक्स, शराब, गांजा, ड्रग्स जैसा नशा मिलना कोई कठिन काम नहीं है।

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