गाइडलाइन के विपरीत रेलवे पार्किंग की व्यवस्थाएं

ठेका मिलते ही शुरू हुआ रेलवे पार्किंग में लूट
गाइडलाइन के विपरीत पार्किंग की व्यवस्थाएं, फर्जी पर्ची काट रहे फर्जी ठेकेदार
नियम के विपरीत ठेकेदार ने फिर दिया पेटी कान्ट्रैक्ट रेलवे पार्किंग ठेका
रेलवे के नियम इतने शख्त होने के बावजूद भी रेलवे की पार्किंग में नियमों की खुलेआम धज्जियां उडाई जा रही है, पार्किंग स्थल में रेलवे पार्किंग रेट लिस्ट लगाकर महज खानापूर्ति कर ली गई, लेकिन 10 रूपए की फर्जी पर्ची काट कर वाहन मालिकों से नियम के विपरीत राशि वसूली जा रही है, दिनेश नामक कथित पेटी कान्ट्रैक्टर ने पेंड्रा के वास्तविक ठेकेदार से लेकर रेलवे की पार्किंग को लूट का अड्डा बना दिया है।
अनूपपुर। रेलवे का सबसे महत्वपूर्ण जंक्शन के बाहर बने पार्किंग स्थल का ठेका कर बाकायदा रेलवे के निर्धारित नियमों का पालन करना सुनिश्चित होता है, लेकिन वास्तविक ठेकेदार के द्वारा पेटी कान्ट्रैक्ट में देकर पहले चरण में ही नियमों की धज्जिया उडा दी गई, जबकि ऐसा कोई प्रावधान ही नही है, उसके बावजूद भी पेटी कान्ट्रैक्ट किस आधार पर हुआ यह तो यहां बैठे चंद कमीशनखोर अधिकारी ही बता पायेंगे। पार्किंग स्थल में मौजूद व्यक्तियों के पास न तो आईडी कार्ड है और न ही यूनिफार्म में दिखते है, लेकिन रसीद लेकर किसी को भी धमकाते हुए वास्तविक ठेकेदार बने हुए है। नियम के अनुसार चार जगह रेलवे पार्किंग की रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य है, लेकिन एक जगह लगाकर खानापूर्ति कर लिया गया है, वही निर्धारित दर में वाहन मालिकों से जार्च न लेकर सीधे 10 रूपए से लेकर 20 रूपए तक का पर्ची 2 मिनट में काटकर उसके हाथ में थमा दिया जाता है।
गेट में अवैध ठेलो का कब्जा
रेलवे स्टेशन अनूपपुर चौक में अगर देखा जाये तो कई ऐसे ठेले मिल जायेंगे जो आगवामन को अवरूद्व करते है, गरीबी का हवाला देकर नियम विपरीत रास्ते में ठेले लगाकर 24 घंटे मार्ग को सकरा किया गया है, न तो रेलवे प्रशासन इस ध्यान दे रही है और न ही कोतवाली के जिम्मेदार, जिसके कारण एक ही परिवार का कब्जा रेलवे के गेट में जमा हुआ रहता है, अगर कोई अन्य इस बीच में प्रवेश करता है तो उसे दादागिरी दिखाकर हटा दिया जाता है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं कब्जा किये हुए है।
पार्किंग स्थल पर यह सुविधाएं जरूरी
पार्किंग स्थल में एंट्री, एक्जिट गेट समेत पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए, बारिश और धूप से वाहनों को सुरक्षित रखने के लिए शेड होना चाहिए, आगजनी रोकने अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था होनी चाहिए, प्राकृतिक आपदा में क्षतिपूर्ति के लिए संचालक को इंश्योरेंस लेना चाहिए, वाहनों के रखरखाव के लिए पर्याप्त जगह होना चाहिए, वाहनों के आने जाने का समय रजिस्टर या फिर पर्ची में दर्ज होना चाहिए, लेकिन अवैध ठेकेदार के द्वारा सीधे अनजान चेहरो को खडा कर वाहन मालिकों से लूटने का पार्किंग स्थल बना रखा है।
ठेका मिले ही शुरू हुआ लूट
नियम के विपरीत वास्तविक ठेकेदार के द्वारा पेटी कान्टै्रक्ट में रेलवे की पार्किंग व्यवस्था को स्थानीय व्यक्ति को सौप दी है, जिम्मेदार अधिकारी इसमें शामिल होकर वाहन मालिकों को निशाना बना रहे है, तांकि लूट का खेल चलता रहे और कुछ हिस्से में उनकी भी हिस्सेदारी बनी रहे, वर्षो से चल रहे यह लूट का खेल अभी भी जारी है, कुछ ही दिन पहले तथाकथित पेटी कान्टै्रक्टर ने पार्किंग को संभाला है, चार दिन हुए नही कि वाहन मालिकों से लूट का सिलसिला शुरू कर दिया है, न तो गाइडलाइन का पालन और नही नियमो को तवज्जो दिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखे बंद कर बैठे हुए है।
इनका कहना है
3 वर्ष के कान्टै्रक्ट में दिया गया है, पेटी कान्ट्रेक्ट का प्रावधान नही है, कान्ट्रैक्ट के अनुसार सभी नियमों का पालन ठेकेदार के द्वारा किया जाना सुनिश्चित है, अगर ऐसा नही हो रहा है तो मैं दिखवाता हूं।
पुलकित सिंघल, सीनियर, डीसीएम रेलवे बिलासपुर जोन

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