SDFO ने हीं बनाया वनों को कमाई का जरिया @ खनिज सहित, वन सम्पदा से वसूली में जुटे

शहडोल/राजेन्द्रग्राम । संभाग अंतर्गत अनूपपुर जिले के राजेंद्रग्राम विकासखंड में पदस्थ SDFO फॉरेस्ट के द्वारा वन संपदा का दोहन करके आर्थिक लाभ अर्जित करने की शिकायतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, SDFO फारेस्ट पर आरोप है कि वन परीक्षेत्र अंतर्गत रेत सहित पत्थरों के अवैध उत्खनन व परिवहन की सूची बनाकर उनके द्वारा यहां बड़े पैमाने पर वसूली की जा रही है, यही नहीं प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र तथा औषधि वाले इस वनांचल में SDFO फारेस्ट द्वारा पेड़ पौधों तथा वन संपदा की भी खरीद-फरोख्त वन माफिया के साथ मिलकर की जा रही है।

जांच के नाम पर SDFO मरावी पूरे समय यहां से गुजरने वाले वाहनों को रोकते हैं और बकायदा उनकी सूची बनाकर उनसे पहले तो मोटी रकम की माँग कर वसूली जाती है और बाद में उन्हें मासिक नजर आने की सूची में शामिल कर दिया जा रहा है SDFO फारेस्ट की लगातार शिकायतें अब anuppur से होती हुई सीसीएफ कार्यालय sbahdol तक पहुंच रही है।

मेकलांचल को खोखला कर रहे SDFO

मेकलाचल पर्वत श्रेणी के अंतर्गत आने वाले इस अंचल की पहाड़ियों और बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र से जुड़े वनांचल को खोखला करने में फॉरेस्ट SDO खुद संलिप्त नजर आ रहे हैं, बीते माह से लगातार इनके ऊपर आरोप लगते रहे हैं, अवैध वसूली की बढ़ती शिकायतें इस बात की ओर इशारा कर रही है कि कहीं न कहीं SDO फॉरेस्ट ही खुद वन माफिया से मिलकर यहां वन संपदा को नुकसान पहुंचाने में लगे हुए हैं, गौरतलब है कि मेकल पर्वत श्रेणी में सैकड़ों प्रकार की औषधियां है, जिस पर स्थानीय तथा बाहर के कई व्यापारियों की नजर रहती है, आरोप है कि यहां के जंगलों से बड़े पैमाने पर वन्य औषधियों की तस्करी हो रही है और उन्हें श्री मरावी द्वारा कुल का संरक्षण दिया जा रहा है, यही नहीं जंगलों से बड़े पैमाने पर लकड़ियों की कटाई भी हो रही है, इस सब की जानकारी होने के बावजूद श्री मरावी उन पर रोक लगाने के जगह उनसे अपना जुगाड़ बनाने में व्यस्त रहते हैं,जिस कारण पूरी मेकल पर्वत श्रेणी तथा यहां फैली वन संपदा पर संकट मंडरा रहा है।

खनिज माफिया से साठगांठ के भी आरोप

पुष्पराजगढ़ विकासखंड अंतर्गत सैकड़ों ग्रामों में खनिज संपदा भरी हुई है,यहां बॉक्साइट से लेकर पत्थरों का बड़े पैमाने पर उत्खनन और परिवहन होता है, यह बात किसी से छुपी नहीं है कि मध्य प्रदेश के की सीमा से सटे छत्तीसगढ़ के पेंड्रा-गौरेला आदि दर्जनों ग्रामों व कस्बों में पुष्पराजगढ़ से ही पत्थरों का उत्खनन होकर खनिज यहां से बीते कई वर्षों से छत्तीसगढ़ पहुंच रहा है, यही नहीं मेकल पर्वत श्रेणी पर बसे इस विकासखंड के सैकड़ों ग्रामों में आधा सैकड़ा से अधिक क्रेशर संचालित है, लगभग क्रेशर बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र और वन भूमि से सटे हैं, जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा वन विभाग के कायदों का भी खुलकर उल्लंघन करते हैं, बावजूद इसके उन पर कार्यवाही करने तथा नोटिस देने की जगह SDO फॉरेस्ट अपने मातहतों के माध्यम से उन पर दबाव बनाकर आर्थिक लाभ के फेर में जुटे हुए हैं।

वाहनों की बनाई है सूची

अनुविभागीय अधिकारी वन श्री मरावी पर बीते माह लगातार यह भी आरोप लग रहे हैं कि उनके द्वारा यहां से गुजरने वाले लगभग वाहनों को जांच के नाम पर अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है, उन वाहनों में चाहे ETP वाला खनिज लदा हो या फिर अनुमति प्राप्त लकड़िया लदी हो कथित अधिकारी द्वारा जांच के नाम पर वाहनों को वन चौकी पर खड़ा करा लिया जाता है और तब तक उन पर दबाव बनाया जाता है,जब तक उनसे मोटी राशि के लेन देन का सौदा तय नहीं हो जाता, हालात ये हैं कि अब कई वाहन मालिक और कारोबारी क्षेत्र से किनारा कर रहे हैं जिससे राजस्व का भी बड़ी मात्रा में नुकसान होने की खबर है।

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