संग्रह में संवेदना, दर्द, प्रेम, कल्पना और भावनाओं का अहसास युवा कवयित्री नीलिमा पाठक सामंतरे की प्रथम काव्य कृति अहसास का विमोचन देश के नामचीन कवियों की मौजदूगी से यादगार बन गया अखिल भारतीय कवि सम्मेलन “अहसास” अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश भर से आए जाने माने कवियों ने अपनी अपनी विधा में पारंगत कवियों ने काव्य पाठ कर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया

संग्रह में संवेदना, दर्द, प्रेम, कल्पना और भावनाओं का अहसास
युवा कवयित्री नीलिमा पाठक सामंतरे की प्रथम काव्य कृति अहसास का विमोचन
देश के नामचीन कवियों की मौजदूगी से यादगार बन गया अखिल भारतीय कवि सम्मेलन

“अहसास” अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश भर से आए जाने माने कवियों ने अपनी अपनी विधा में पारंगत कवियों ने काव्य पाठ कर अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कटनी। कटनी के साहित्य और काव्य जगत में 6 मार्च की तारीख यादगार बन गई। अवसर था सायना हिल्स में पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रद्धेय सत्येन्द्र पाठक एवं पूर्व महापौर श्रीमती निर्मला पाठक की सुपुत्री नीलिमा पाठक सामंतरे के प्रथम काव्य संग्रह अहसास के विमोचन का। देश के शीर्षस्थ कवियों एवं प्रतिष्ठित साहित्यकारों की मौजदूगी ने इस कार्यक्रम को इतिहास में दर्ज करा दिया। दो चरणों में आयोजित कार्यक्रम के पहले चरण में मंचासीन अतिथियों ने नीलिमा पाठक सामंतरे के प्रथम काव्य संग्रह अहसास का विमोचन किया, इसके उपरांत दूसरे चरण में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्य संध्या का यह शानदार आयोजन साहित्य, संस्कृति एवं समाजसेवा के लिए समर्पित संस्था जन परिषद के बैनर तले आयोजित किया गया था। कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज कवियों ने अपनी शानदार रचनाओं, कविताओं और हास्य-व्यंग्य के माध्यम उपस्थित श्रोताओं का मनोरंजन किया। 3 घंटे तक चले कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों को सुनने के लिए रात 1 बजे तक सुधी श्रोताओं की कार्यक्रम में मौजूदगी बनी रही। आलम यह रहा कि हल्की ठंड के बावजूद लोग अपनी कुर्सियों पर जमे रहे और कवियों का जमकर उत्साहवर्धन किया। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पाठक परिवार के पारिवारिक सदस्य फिल्म अभिनेता एवं साहित्यकार आशुतोष राणा ने की एवं मंच संचालन फरीदाबाद से आए हास्य कवि सरदार मंजीत सिंह ने कुशलतापूर्वक किया।

◆ अतिथियों की इन्होंने की अगवानी

पुस्तक विमोचन समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में आए अतिथियों और राष्ट्रीय स्तर के कवियों की जन परिषद के मार्गदर्शक राष्ट्रीय कवि मनोहर मनोज, प्रांतीय सचिव आशीष सोनी, जिलाध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव प्रखर, श्रीमती शिल्पी सोनी, श्रीमती सीमा चौधरी, नित्यानंद पाठक, प्रियांशु तिवारी, विनोद दुबे, श्रीमती गीता पाठक, मनोज बर्मन, रीता बर्मन, श्रीमती नीलम जगवानी, अनुराग त्रिसोलिया, आशीष रैकवार, आशीष पटेल, ने अगवानी की। पुस्तक विमोचन समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के पहले वरिष्ठ कवि विष्णु बाजपेयी, प्रतीक एवं प्रियंका मिश्रा ने काव्य पाठ किया।

◆मंच पर अतिथियों ने बढ़ाई शोभा
पुस्तक विमोचन समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति डॉ कपिल देव मिश्रा की मौजूदगी रही। अन्य अतिथियों के रूप में दैनिक भास्कर के प्रबंध संचालक कैलाश अग्रवाल, डॉ विष्णु सक्सेना, हाथरस, आलोक श्रीवास्तव, दिल्ली, डॉ सरिता शर्मा, दिल्ली, बनज कुमार बनज, मुंबई, सरदार मंजीत सिंह, फरीदाबाद, सुनैना त्रिपाठी, लखनऊ, पूर्व महापौर श्रीमती निर्मला पाठक, पारिवारिक सदस्य फिल्म अभिनेता एवं साहित्यकार आशुतोष राणा, पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक, मनोहर मनोज कटनी, सुरेश सोनी ऋतुराज, एवं युवा कवयित्री श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे की गरिमामयी उपस्थिति रही। पुस्तक विमोचन समारोह का कुशल संचालन श्रीनिवास सरावगी महाविद्यालय की प्राचार्य एवं साहित्यकार डॉ. श्रीमती ऊषा पांडे ने किया। इसके पहले मंचासीन अतिथियों ने मां वीणावादिनी सरस्वती जी के तैलचित्र पर माल्र्यापण करते हुए दीप प्रज्वलित किया। इसके उपरांत अतिथियों ने पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित सत्येंद्र पाठक जी के तैलचित्र पर माल्यार्पण करते हुए उन्हें नमन किया। अहसास पुस्तक के प्रकाशक कौटिल्य प्रकाशन के राजू अरोरा भी इस दौरान कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे। पहले चरण में विधायक संजय पाठक ने सभी अतिथियों और श्रोताओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

◆विधायक संजय पाठक ने किया अतिथियों का स्वागत

पुस्तक विमोचन समारोह के प्रारंभ में पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। इसके उपरंात विधायक संजय सत्येन्द्र पाठक का स्वागत जनपरिषद के प्रांतीय सचिव आशीष सोनी ने किया। समारोह के अगले चरण में मंचासीन अतिथियों ने युवा कवयित्री श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे के प्रथम काव्य संग्रह अहसास का विमोचन किया। इस दौरान श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे का स्वागत दिल्ली की कवियत्री डॉ. सरिता शर्मा ने किया। सभी कवियों ने शुभकामनाएं देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की।

◆मन में हो अमृत संचार, राम नाम की हो झंकार

कार्यक्रम में गायिका श्रीमती मनीषा काम्बले ने युवा कवयित्री श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे द्वारा रचित कविता मन में हो अमृत संचार, राम नाम की हो झंकार को संगीतमय तरीके से प्रस्तुत करते हुए सराहना अर्जित की। इसके उपरांत शासकीय कन्या महाविद्यालय की सेवानिवृत्त हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. कमला यादव ने श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे द्वारा रचित प्रथम काव्य संग्रह अहसास की समीक्षा प्रस्तुत की। काव्य कृति के बारे में शासकीय तिलक महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. चित्रा प्रभात ने भी अपने प्रभावी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नीलिमा जी की कविताओं ने हर विषय को छुआ है। कविताओं में संवेदनशीलता के साथ जीवन और प्रकृति के हर रंग देखने मिलते हैं। यह संग्रह यथार्थ के करीब है।

◆बचपन से ही थी लेखन में रूचि,परिवार एवं पति की प्रेरणा से लिखी कविरायें

युवा कवयित्री श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे ने कहा कि उनकी बचपन से ही लेखन में रूचि थी। जीवन के उतार-चढ़ाव और कठिन डगर पर चलते हुए पति विमल सामंतरे ने लेखन शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। शब्दों को भाव मिला और फिर जिन्दगी में संवेदना, दर्द, प्रेम, कल्पना और भावनाओं का कारवां बनता गया। इस काव्य संग्रह में भावना से युक्त पारदर्शी मन का अहसास है। उन्होंने कहा कि में जो भी लिखती हंू, वह मेरे दिल की आवाज होती है। अपने पापा श्री सत्येन्द्र पाठक की कमी को महसूस करते हुए उद्बोधन के दौरान उनकी आंखे नम हो गईं। उन्होंने कहा आज पापा यहां होते, तो काफी खुश होते। श्रीमती नीलिमा पाठक सामंतरे ने अपना काव्य संग्रह अपनी आदर्श एवं प्रेरणास्त्रोत मां श्रीमती निर्मला पाठक को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पितातुल्य बड़े भैया संजय पाठक एवं भाभी श्रीमती निधि पाठक का मार्गदर्शन भी हर कदम पर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं यशभारत के स्थानीय संपादक आशीष सोनी जी का आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने मेरा हर कदम पर उत्साह बढ़ाया और संग्रह को संजोने और सजाने में प्रमुख भूमिका निभाई।

■ यह बेटी का प्यार है : श्रीमती निर्मला पाठक

अपने आशीर्वचन में पूर्व महापौर श्रीमती निर्मला पाठक ने कहा कि यह बेटी का प्यार ही है कि उसने अपने प्रथम काव्य संग्रह को मुझे समर्पित किया। नीलिमा को बचपन से ही लेखन में रूचि थी और यह किसी को पता नहीं था। वह अक्सर अकेले में कुछ न कुछ लिखा करती थी। उन्होंने कहा कि आज नीलिमा का काव्य संग्रह अहसास आप सबके सामने है। कटनी की बेटी ने आज पहली बार मंच पर आकर कविता पाठ किया है। वह पिता का अंश है, भाई का साथ भी है। कवि के मन का भाव कोमल होता है और जो उसे समझे, उसका भी मन कोमल होता है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों से नीलिमा पाठक को अपना आशीवार्द प्रदान करने का आग्रह किया।

◆यह अविस्मरणीय क्षण: कैलाश अग्रवाल

विशेष अतिथि के रूप में मौजूद दैनिक भास्कर के प्रबंध संचालक कैलाश अग्रवाल ने कहा कि खुशी की बात है कि बहन नीलिमा पाठक सामंतरे के प्रथम काव्य संग्रह अहसास का आज विमोचन हो रहा है। उन्होंने दैनिक भास्कर परिवार की ओर से नीलिमा पाठक को साहित्य और काव्य के क्षेत्र में उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज बड़ा अवसर है कि देश के शीर्षस्थ कवियों की मौजूदगी में अहसास का विमोचन हो रहा है।

■अब साहित्य परिवार में शामिल हो गई नीलिमा : आशुतोष राणा
पाठक परिवार के पारिवारिक सदस्य फिल्म अभिनेता एवं साहित्यकार आशुतोष राणा ने पूज्य दद्दा जी एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री पंडित सत्येन्द्र पाठक को शत-शत नमन करते हुए कहा कि आज मुझे इस बात की बड़ी खुशी हो रही है कि उनकी छोटी बहन नीलिमा के प्रथम काव्य संग्रह का विमोचन हो रहा है। उन्होंने अपनी ओर से शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अपने अहसासों को कलमबद्ध करते हुए जब कोई बात निराकार से साकार रूप लेती है, तब एक कलाकार जन्म लेता है। बहन नीलिमा आज पाठक परिवार से आगे निकलकर साहित्य परिवार में शामिल हुई है। आज से उनकी नई यात्रा शुरू होगी। आशुतोष राणा ने यह भी कहा कि पिछले दो सालों में कोविड संक्रमण के दौरान देश के कवियों द्वारा सोशल मीडिया के जरिए अपनी रचनाओं से लोगों को जोड़ा गया है।

■यह ईश्वरीय संयोग : संजय पाठक

पूर्व मंत्री एवं विधायक संजय पाठक ने बहन नीलिमा पाठक के प्रथम काव्य संग्रह के विमोचन पर ढेर सारी शुभकामनाएं और आशीर्वाद देते हुए कहा कि यह ईश्वरीय संयोग ही है कि नीलिमा के काव्य संग्रह का विमोचन देश के प्रतिष्ठित और नामचीन कवियों एवं रचनाकारों की मौजूदगी में हो रहा है। उन्होंने पूज्य दद्दा जी को नमन करते हुए कहा कि सब कुछ पूर्व नियोजित रहता है। पूज्य दद्दा जी द्वारा किए गए प्रत्येक शिवलिंग निर्माण महायज्ञ में उपस्थिति के दौरान हमने इस बात को बहुत ही करीब से महसूस किया है कि जो लिखा हुआ है, वो होकर ही रहेगा। खुशी है कि छोटी बहन की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्तर के कवियों का भी आशीर्वाद मिल रहा है।

■प्रतिभा कभी उम्र की बंधक नहीं होती : कुलपति

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति डॉ कपिल देव मिश्रा ने कहा कि प्रतिभा कभी भी उम्र की बंधक नहीं होती। छोटी बहन नीलिमा ने पुस्तक अहसास में जिस तरीके से अपनी दिल की बात कही है, वो काबिले तारीफ है। मैने पूरे परिवार के साथ अहसास की एक-एक कविता को पढ़ा। कुछ रचनाएं तो दिल को अंदर तक छू गईं। उन्होंने पाठक परिवार की सराहना करते हुए कहा कि यह सब वंशानुगत है। पूजनीय सत्येन्द्र पाठक एवं श्रीमती निर्मला पाठक द्वारा दिए गए संस्कारों की बदौलत आज छोटे भाई संजय पाठक विधायक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं तो उनकी छोटी बहन नीलिमा पाठक का प्रथम काव्य संग्रह आज विमोचित हो रहा है। उन्होंने इस दौरान फिल्म अभिनेता एवं साहित्यकार आशुतोष राणा की पुस्तक रामराज्य का जिक्र करते हुए कहा कि इस पुस्तक में लिखी बातों से लोगों को प्रेरणा लेना चाहिए।

■मगर तुम्हारा एक-एक गम खरीद सकता हंू : विष्णु सक्सेना

देश के शीर्षस्थ गीतकार डॉ विष्णु सक्सेना हाथरस ने अपने गीतों के माध्यम से माहौल में रस पैदा कर दिया। वैसे तो डॉ विष्णु सक्सेना अंतिम कवि के रूप में काव्यपाठ करने आए, लेकिन उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। डॉ विष्णु सक्सेना ने अपनी पहली रचना दिल ए बीमार सही हो वो दवाएं दे दे, में सबपे प्यार लुटाऊं, वो दुआएं दे दे, ऐ मेरे रब में सांस-सांस में महक जाऊं, मेरी आवाज की खूशबू को हवाएं दे दे, प्यास बुझ जाए तो शबनम खरीद सकता हूं, जख्म मिल जाए तो मरहम खरीद सकता हंू, ये मानता कि में दौलत नहीं कमा पाया, मगर तुम्हारा एक-एक गम खरीद सकता हंू के माध्यम से श्रोताओं की जमकर वाहवाही लूटी।

■प्यार नहीं देखा करता, दासी हो या रानी : सुनैना त्रिपाठी

लखनऊ से आई कवयित्री सुनैना त्रिपाठी ने अपनी रचना राजा हो, रंक सभी की दिल की यही कहानी है, प्यार नहीं देखा करता, दासी हो या रानी, सावन भी जलने लगता, जब जगी घर की जवाला, बिना पिए ही चढ़ जाती, प्रीत कलश की ढाला कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद बनज कुमार बनज मुंबई ने एक से बढ़कर एक शायरी पेश की। जिसमे फूलों के संग रहा रहा, में माटी का ढेर, मुझ मे भी बस जाएगी खूश्बू देर सबेर, पायल चुपके से धीरे चल ओ पांव, जागिन न जाए आज फिरे से सारा गांव के माध्यम से चांर चांद लगाए।

■सबको साथ रखने वाला खास हुनर थे बाबू जी : आलोक श्रीवास्तव

आलोक श्रीवास्तव दिल्ली ने शानदार तरीके से काव्यपाठ करते हुए एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत की। उनके द्वारा अम्मा जी और बाबू जी की रचना को श्रोताओं की काफी सराहना मिली। आलोक श्रीवास्तव ने कहा है ये सोचना गलत है, तुम पर नजर नहीं, मसरूफ हम बहुत हैं लेकिन खबर नहीं।

■कितने मीठे बेर हैं शबरी के, पूछना है तो राम से पूछो : डॉ. सरिता शर्मा

दिल्ली से आई कवयित्री डॉ सरिता शर्मा ने अपने गीतों के माध्यम से श्रोताओं को बांधे रखा। उन्होंने अपनी कविताओं सच्चाई की डगर पर पांव में छाले मिले हमको, नि:स्वार्थ, समर्पण को कमजोरी मत समझो, सारी दुनिया से दूर हो जाऊं, तेरी आंखों से दूर हो जाऊं, के माध्यम से माहौल को धर्ममय बना दिया।

■कुछ मुर्गीचोरों को जेल हो गई : मनजीत सिंह

कवि सम्मेलन का शानदार तरीके से संचालन कर रहे फरीदाबाद से आए कवि सरदार मंजीत सिंह ने अपनी कविताओं ऑनर किलिंग से प्रेम कथा फेल हो गई, हत्यारों की अगले दिन बेल हो गई, अरे वो माल लूटकर उड़ गए देश का, कुछ मुर्गीचोरों को जेल हो गई के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक तंत्र पर करारा प्रहार किया। सरदार मनजीत सिंह ने चुटकुलों के माध्यम से श्रोताओं का जमकर मनोरंजन किया। आशुतोष राणा ने भी शिव ताडंव स्त्रोत पर केन्द्रित कविता पाठक कर कार्यक्रम को ऊंचाईयां प्रदान की। समारोह में विधायक संजय पाठक ने सभी अतिथियों का शॉल, स्मृतिचिन्ह, श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र से सम्मान किया। अंत में श्री बिमल सामंतरे का जन्मदिन परिवारजनों और अतिथियों ने केक काटकर मनाते हुए शुभकामनाएं दीं।

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