शहडोल के देवांता हॉस्पिटल को सबसे से ज्यादा मृत्यु प्रमाण पत्र बाँटने वाला अस्पताल बताया !!

सेवा के नाम पर लूट का अड्डा बना देवांता
सोशल मीडिया पर देवांता पर खूब बरसे यूजर्स
कोरोना के मरीज की छुट्टी के बाद भी जारी रहा इलाज

(narad yadav @ 9826550631)

शहडोल। शुक्रवार को लगभग 3 दिनों तक देवांता हॉस्पिटल में सुगर और किडनी के पेशेंट की हालात खराब होते देख प्रबंधन ने डिस्चार्ज का फैसला सुनाया, परिजनों को मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी गई, लेकिन वहां जाकर देवांता में दी जा रही दवाईयों और मेडिकल हिस्ट्री की चर्चा न करने की हिदायत भी दी गई, बुजुर्ग को डिस्चार्ज करते समय जब उन्हें देवांता की जगह जिला चिकित्सालय के कागज थमाये गये तो, मरीज के परिचितों के होश उड़ गये। यही नहीं मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने के बाद मरीज कोरोना पॉजीटिव निकला और यह जानकारी मिलने के बाद भी न तो उसका इलाज कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को क्वारंटाइन किया गया और न ही उस वार्ड को सील किया गया। शुक्रवार से लेकर शनिवार के पूरे दिन अन्य बीमारियों से गंभीर मरीज यहां आते रहे।

मौत का घर है अस्पताल
शुक्रवार की शाम से ही जब सोशल मीडिया पर यह मामला उछला तो, फेसबुक प्लेटफार्म पर यूजर्स ने देवांता हॉस्पिटल को जमकर ट्रोल किया, अखिल भारतीय ब्राम्हण समाज के आशीष तिवारी ने उक्त अस्पताल को मौत के घर की संज्ञा दी, तो शिवकुमार मिश्रा ने इसे लूट का अड्डा बताया। शहडोल के ही प्रितेष द्विवेदी ने लिखा कि सबसे ज्यादा मृत्यु प्रमाण पत्र बांटने वाला यह अकेला अस्पताल है। विनय शुक्ला ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि देवांता में खुलेआम लूट चल रही है। भोली-भाली जनता को मूर्ख बनाया जा रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आगे आकर कुछ करना होगा, जिससे ऐसे लूट खोर हॉस्पिटलों से मुक्ति मिल सके।

कटघरे में खड़ा हुआ प्रशासन
सुजीत सिंह नामक फेसबुक यूजर ने इस मामले में जिला प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा करते हुए लिखा कि अंधेर नगरी और चौपट राजा की स्थिति है, आशीष त्रिपाठी ने लिखा कि इनके ऊपर नियंत्रण के लिए उग्र आंदोलन की जरूरत है। वहीं अनुज पटेल ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि प्राइवेट अस्पताल गरीबों की मजबूरी नहीं समझते, विजय कुमार ने इस मामले को कलेक्टर के संज्ञान में लाकर कार्यवाही करवाने की मांग की।

लूट का अड्डा बना अस्पताल
समाजवादी पार्टी के राशिद खान ने लिखा कि मानव सेवा के नाम पर प्राइवेट अस्पताल लूट का अड्डा बन चुके हैं, दिव्यांश मिश्रा ने लिखा कि इस अस्पताल में इलाज नहीं धंधा होता है, गरीब के दर्द और उसकी मजबूरी का ये लोग प्लान बनाकर तब तक पैसे लूटते हैं, जब तक उनकी जेब भरी है, यदि केस बिगड़ गया तो, रेफर करना सबसे आसान उपाय है, शहडोल के ही अशरफ खान ने लिखा कि यह शहर का सबसे खराब हॉस्पिटल है, जो सिर्फ पैसा खाता है, न तो गरीब की मजबूरी देखते है, सिर्फ बिल बनाओं और पैसा लूटों, ऐसे हॉस्पिटल में ताला लगना चाहिए।

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