साईबाबा एजुटेक के संस्थापक शुभम तिवारी का लक्ष्य – 2025 तक 1 मिलियन छात्रों को समान रूप से शिक्षा से सशक्त बनाना है

वंचित समुदायों के लाखों छात्रों के लिए डिजिटल लर्निंग को सुलभ बनाने के उद्देश्य से, भारत की सबसे भरोसेमंद एडटेक कंपनी, साईबाबा एजुटेक ने आज अपनी सामाजिक पहल – एजुकेशन फॉर ऑल की शुरुआत की घोषणा 23 मार्च शहीदी दिवस के दिन की है। कार्यक्रम का उद्देश्य, शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करके यह सुनिश्चित करना है कि सभी आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण सीखने के अवसरों तक समान पहुंच प्राप्त हो।

दुनिया के सबसे युवा राष्ट्रों में से एक होने के नाते, भारत की सबसे बड़ी पूँजी इसके युवा हैं। शिक्षित दिमाग में निवेश हमारे देश की कल की सफलता का ईंधन है।

*डिजिटल शिक्षा सुलभ होनी चाहिए*

साईबाबा एजुटेक के संस्थापक और सीईओ शुभम तिवारी ने कहा, “साईंबाबा एजुटेक में हम सभी के लिए यह वास्तव में एक विशेष क्षण है। आज के दिन भारत को आजादी दिलाने के लिए देश के सपूतों ने कई बलिदान दिए। कई तरह की यातनाएं सही। उन्ही बलिदानों में से सबसे महान बलिदान शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का माना जाता है। ये बलिदान हम कभी नही भूलते सकते हैं।
जिस आजाद भारत में आज हम सुकून की सांस ले रहे हैं, उसकी आजादी के लिए वे हंसते हुए और आजादी के गीत गाते हुए फांसी पर झूल गए थे। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसी दिन को हम ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाते है और भगत सिंह समेत सुखदेव और राजगुरु को याद किया जाता है। हमें आज अशिक्षा और बेरोजगारी से आज़ादी चाहिए जिसके लिए हम हर जगह छात्रों को बेहतर सीखने के अनुभव प्रदान करने के एकल मिशन में एकजुट हैं और हमेशा यह मानते रहे हैं कि भारत में शिक्षा में सकारात्मक बदलाव लाने की बहुत आवश्यक है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी छात्रों को सीखने का समान अवसर मिले और हमारे तकनीकी-सक्षम शिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से देश भर में छात्रों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस यात्रा में समान विचारधारा वाले और प्रसिद्ध साझेदारों को पाकर भी खुश हैं क्योंकि हम अधिक छात्रों द्वारा डिजिटल शिक्षण को सुलभ बनाने के लिए काम कर रहे हैं। ”

*हमारे शिक्षा के क्षेत्र के सहयोगी*

इस पहल को शुरू करने के लिए, साईंबाबा एजुटेक ने इस मिशन से जुड़े भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं – सत्तोलॉजी एवरीडे चैंट्स इंक (यूएसए) एक सामाजिक पहल की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा, “शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जहां सशक्त बनाने और परिवर्तन लाने के प्रयास वास्तव में उत्प्रेरक हो सकते हैं। हर मदद करने वाला हाथ फर्क कर सकता है और हर एक योगदान एक छात्र के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को एक वास्तविकता बना सकता है। साथ में, मेरा मानना है कि हम सीखने को सुलभ और समावेशी बना सकते हैं।”

साईबाबा एजुटेक ने लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए अपनी सीखने की सामग्री को मुफ्त बना दिया और तब से 100k से अधिक नए छात्रों ने इसके मंच से मुफ्त में सीखना शुरू किया है। आज 200k छात्र प्लेटफार्म पर सीख रहे हैं।

*छोटे से नगर से शुरू हुआ सफर*

शुभम तिवारी की शुरुआती शिक्षा अनूपपुर जिले के संजयनगर में हिंदी मीडियम स्कूल से शुरू हुई, जहां उनके पिता पहले गणित के शिक्षक थे. शुरू में उन्हें पढ़ाई के अलावा खेलों में भी बहुत ज्यादा इंटरेस्ट था. माइनिंग इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद नौकरी के लिए फिजिकल टेस्ट में कलर ब्लाइंडनेस का पता चला जिसके बाद उन्हें अपना माइनिंग करियर छोड़ना पड़ा। यही से फिर एक बार बी.एससी. भूगोलशास्त्र और राजनीतिशास्त्र में एम.ए. की पढाई पूरी की लेकिन शिक्षा के प्रति विशेष रुझान की वजह से उन्होंने ऑनलाइन यूट्यूब पर पढ़ाना शुरू किया। दोस्तों ने ऑनलाइन कोचिंग क्लास एप्लीकेशन को शुरू करने की सलाह दी और यहीं से शुभम के एक सफल बिजनेसमैन बनने का सफर शुरू हुआ.

*2021 में SaiBaba EduTech – द लर्निंग ऐप का हुआ शुभारम्भ*

2021 में उन्होंने अपना फ्लैगशिप प्रोडक्ट SaiBaba EduTech – द लर्निंग एप लॉन्च किया. यह उनके लिए गेमचेंजर साबित हुआ. स्मार्टफोन की बढ़ती लोकप्रियता के बीच उनका यह एप भी पॉपुलर होता गया. कंपनी ऑनलाइल कंटेंट उपलब्ध करवाती है. कुछ कंटेंट तो फ्री हैं, लेकिन एडवांस लेवल के लिए फीस देनी होती है.

*देश के कोने-कोने में पहुंचने का लक्ष्य*

SaiBaba EduTech का लक्ष्य है कि उनकी पहुंच देश के कोने-कोने तक हो, जिससे हर तबके के छात्रों को लाभ मिले. SaiBaba EduTech का कहना है कि आज के ज्यादातर छात्रों की पढ़ाई सवालों के हल निकालने के लिए हो रही है. चुनौती यह है कि इस ट्रेंड को किस तरह से बदला जाए. छात्रों को इस तरह से तैयार किया जाए कि वह अपने तरीके से सीख सकें. छात्रों को इस तरह से तैयार किया जाए कि वह खुद समस्या खोजें और उसके हल का उपाय निकालें. इसमें तकनीकी बेहतर ढंग से मदद कर सकती है.

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