रसूखदारों के अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन की चुप्पी

अधिकारी खुद बताते हैं रसूखदारों को बचने के रास्ते

मुख्यालय सहित बुढ़ार-धनपुरी में अवैध निर्माण की शिकायतें

अतिक्रमण प्रमाणित होने के बाद भी नोटिसों तक सिमटी कार्यवाही

शहडोल। जिले सहित प्रदेश के अन्य जिलो में भी अवैध निर्माण व खासकर माफिया के द्वारा किया गया अतिक्रमण प्रशासन की रडार में हैं। लगातार कार्यवाहियों से माफिया सहमा हुआ है, इन सबके बीच जनता से ऐसे सवाल सामने आ रहे हैं कि प्रशासन वर्षाे से रसूखदारों के द्वारा किये गये अवैध निर्माण व कब्जे की धूल खा रही फाईलों पर कब कार्यवाही करेगा या माफिया की आड़ में एक बार फिर रसूखदार सेवा के रास्ते से साफ बचकर निकल जायेंगे, मुख्यालय सहित बुढ़ार, जयसिंहनगर व धनपुरी में ऐसे दर्जनों निर्माण है, जिनकी शिकायतें होने के बाद फाईलें कार्यवाही के लिए अटकी पड़ी है, लेकिन कहीं सफेदपोश तो कहीं नौकरशाहों की सेवा के कारण नतीजे तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

कटघरे में होटल विलासा
शहडोल ही नहीं संभाग की सबसे बड़ी होटल विलासा इंटरनेशनल के निर्माण को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं, स्थानांतरण से सप्ताह भर पहले पूर्व संभागायुक्त नरेश पाल ने ग्राम तथा नगर निवेश व नगर परिषद बुढ़ार से होटल के निर्माण की अनुमति एवं अन्य अनुमतियों की नब्ज टटोली थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद मामला ठण्डे बस्ते में चला गया। स्थानीय निकाय और टीएण्डसीपी से जुड़े सूत्रों की माने तो, विलासा इंटरनेशनल को 5 मालों की अनुमति दी गई है, दोनों ही विभाग होटल की ऊंचाई को लेकर 18 मीटर और 18 प्लस 2 मीटर की अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं, रसूख का आलम यह है कि होटल से जुड़ी जानकारी के लिए टीएण्डसीपी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी तक आवेदकों को नहीं दे पा रही हैं। आरोप हैं कि 6 से 7 मंजिलों के भवन को 5 मंजिल भवन दिखाने के लिए ग्राउण्ड फ्लोर को पार्किंग का नाम दिया गया है, जबकि वहां शौचालय के साथ किचन, मैरिज हॉल आदि संचालित है, यही नहीं टॉप फ्लोर की सातवीं मंजिल पर पक्के निर्माण के साथ टिन के शेड दिखाये गये हैं, जिससे यह मंजिल भी गिनी न जा सके।
धनपुरी में हाईवे पर बंगला
रीवा से अमरकंटक राज्य मार्ग पर धनपुरी नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 2 में शासकीय भू-खण्ड पर बिना अनुमति के फिरोज नामक युवक द्वारा बहुमंजिला इमारत बनाई गई है, बीते 2 वर्षाे के दौरान नगर पालिका सहित तहसील बुढ़ार के द्वारा निर्माण को रोकने के दर्जनों नोटिस दिये गये, लेकिन कार्यवाही क्यों नहीं हुई, निर्माण क्यों नहीं रूका और फिरोज सेवादार कैसे बन गया, यह सहज समझा जा सकता है। बीते 4 दिवस पूर्व 27 जनवरी को नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 187 (8) एवं 223 के संदर्भ में दिये गये नोटिस पर गौर करें तो, उक्त पत्र में नपा ने स्पष्ट उल्लेख किया है कि अमरकंटक रोड में 25 गुणे 25 वर्गफुट में 2 मंजिला अवैध निर्माण कर लिया है और तीसरी मंजिल का निर्माण जारी है। मजे की बात तो यह है कि नपा के जिम्मेदारों ने कार्यवाही करने की जगह निर्माण बंद कर ऑनलाईन आवेदन देने का उल्लेख किया है। जबकि पूर्व में भी नपा के रिकार्ड बताते हैं कि उक्त भू-खण्ड न सिर्फ नजूल की भूमि का है, बल्कि इसे रोकने के लिए नपा से दर्जनों इसी तरह के पत्र जारी हुए और फाईलों में कैद भी हो गये।

अतिक्रमण में पीछे नहीं शासकीय कर्मचारी
नवीन नगरपालिका भवन कि भूमि में शासकीय कर्मचारी का कब्जा शासन द्वारा प्रस्तावित वार्ड नंबर 13 में नए नगरपालिका भवन की भूमि में शासकीय कर्मचारी का कब्जा हैं। उप स्वास्थ्य केंद्र कौआसरई एवं संलग्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जयसिंहनगर में पदस्थ बहुउद्देश्यीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता द्वारा अवैध रूप से कब्जा कर रखा हैं। कोरोनो काल में खण्ड चिकित्सा अधिकारी की अनुसंशा पर कलेक्टर द्वारा उक्त निलंबित कर्मचारी को बहाल किया गया हैं। बहाली के बाद हरा पर्दा लगाकर अवैध भवन का निर्माण कार्य पूरा करा लिया गया हैं। ज्ञात हो कि इसी शासकीय भूमि को शासन ने नवीन नगरपालिका कार्यालय भवन के लिए खसरा नंबर 495/1 रकबा 0.061 हेक्टेयर आरक्षित की किया हैं।

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