..तो ट्रैक्टर में सवार होकर जनपद पहुंचने की तैयारी

शहडोल। गांव छोड़कर नगरों, कस्बों में बस चुके लोगों को इन दिनों गांव पसंद आ रहा है, ग्राम प्रेम दर्शाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म बन चुका है, बीते चुनावों में दूसरी पार्टी से पटखनी खा चुके नेताजी इन दिनों गुप्ता जी के कंधे पर सवार होकर जनपद के माध्यम से शासकीय भू-खण्ड को कब्जाने जनपद के रास्ते सत्ता के गलियारों में पहुंचना चाह रहे हैं, चुनाव का चस्का ऐसा है कि शहरी सेठ अब गांव की गलियों की खाख छान रहे हैं, जनपद के संघर्षशील, मिलनसार, कर्मठ, जुझारू, अनुभवी प्रत्याशी ने गांव की गलियों को पोस्टर से पाट दिया है, ट्रैक्टर में सवार हाथ जोड़े प्रत्याशी गांव से लगाव का जिक्र करते इन दिनों बड़े शोरूम की शोभा बढ़ाने वाले नेताजी इन दिनों गांव के टपरों पर देखे जा सकते हैं, हालाकि चर्चा है कि चुनाव में अगर जीत हुई तो, खुद ग्रामीण ट्रैक्टर वाले नेताजी को खोजते नजर आयेंगे। वर्तमान में नेताजी की फोटो हाथ जोड़ते गांव की जनता से अपील कर रही है, नगरों, कस्बों में आकर नेताजी की वेशभूषा बदल चुकी है, गांव में रह रहे लोगों को प्रभावित करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है, नेताजी जनपद चुनाव के माध्यम से जमीन तलाशने में लगे हैं, तथाकथित दलबदलू नेताजी ने अपना स्लोगन भी बद लिया है, संभवतः पहले वह अपना विकास सोचकर मैदान में कूदे थे, तब उन्हें पटखनी मिली थी, अब स्लोगन बदलकर सबके विकास की बाते कह रहे है, इससे साफ जाहिर होता है कि नेताजी का ह्दय परिवर्तन हो चुका है। मजे की बात तो यह है कि नगर पालिका का वार्ड हर चुके नेताजी इन दिनों जनपद का वार्ड जितने का दंभ भर रहे हैं, और ट्रैक्टर में सवार नेताजी अपनी जीत के प्रति आश्वस्त हो चुके हैं। चर्चा है कि जाति के हवाला देकर वार्ड हार चुके नेताजी को अपनी ओर मिलाकर जनपद के वयोवृद्ध होते नेताजी जनप्रतिनिधि बनकर सेवा के नाम पर मेवा खाने की तैयारी में जुटे हुए हैं, इन दिनों जनता का कल्याण करने के वायदे लिए ट्रैक्टर सवार नेताजी की गड्डी टपरों पर नजर आ रही है, समीकरण और अन्य प्रत्याशियों की छवि धूमिल होने के चलते नेताजी की बांछे खिच चुकी हैं, अभी से स्वयं को जीता हुआ प्रत्याशी मान ट्रैक्टर में सवार नेताजी के मुखने से मंद-मंद मुस्कान किसी से छुपी नहीं है।

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