…तो दफन हो गया गुड्डू और गुरूदीन का मामला!

शहडोल। शहर के अरबपतियों की सूची में शुमार युवा कारोबारी गुड्डू उर्फ प्रकाश रस्तोगी के खिलाफ 75 वर्षीय गरीब रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले गुरूदीन शर्मा ने मानसिक प्रताडऩा के आरोप लगाते हुए कलेक्टर और एसपी को पत्र बीते माहों में सौंप था, इसके बाद पीडि़त ने जमुआ एनएच-43 स्थित गृह ग्राम में आत्मदाह करने की सूचना दी थी, पत्र में गुरूदीन ने उल्लेख किया कि वह गुड्डू उर्फ प्रकाश रस्तोगी पिता रामेश्वर प्रसाद रस्तोगी शहडोल तथा राम प्रसाद बैगा, राम गोपाल, कस्तूरी बाई, सादिक खान व कमलेश सिंह गोड़ से त्रस्त हो चुका है। उसने न्याय के लिए नीचे से लेकर उच्च न्यायालय तक का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे अवैध निर्माण व कब्जे के खिलाफ स्थगन भी मिला, लेकिन गुड्डू के रसूख के कारण तहसीलदार ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को किनारे करते हुए निर्माण की अनुमति दे दी थी। मैं गुरूदीन शर्मा इन लोगों से त्रस्त हो चुका हँू, अब मुझे धमकियां व लालच दी जा रही है, मेरी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है, जिस कारण मैं त्रस्त होकर आत्मदाह करूंगा। चर्चा है कि इस पूरे मामले में प्रशासन ने गुरूदीन को न्याय दिलाने की बात कही और आत्मदाह जैसे कदम से रोक लिया, लेकिन कथित कारोबारी के खिलाफ प्रशासन निरंकुश होकर रह गया।
यह था पूरा मामला
शहडोल से बुढ़ार जाने वाले एनएच-43 पर जमुआ तिराहे के समीप 75 वर्षीय वृद्ध गुरूदीन छोटे से कच्चे झोपड़े में बीते 5 से 6 दशकों से रह रहा है, वर्तमान में वह अकेला है, जिस भू-खण्ड को लेकर गुरूदीन ने गुड्डू रस्तोगी पर कमलेश सिंह के नाम पर खरीदने और प्रताडऩा के आरोप लगाये थे, आराजी खसरा क्रमांक 276 कुल रकवा 0.07 डिस्मिल के इस भू-खण्ड को लेकर है, वृद्ध का दावा और दस्तावेज इस बात के प्रमाण हैं कि भूमि का मूल खसरा क्रमांक जो पूर्व में 123 व वर्तमान में 276 दर्ज है, भूमि का पूर्व पट्टेदार सेतुआ बैगा ने उक्त भूमि को प्रार्थी के मामा स्व. कामता प्रसाद शर्मा को सरस्वती मंदिर, गुरू आश्रम तथा यज्ञ स्थली बनाने के लिए 1957 में दान पत्र देकर उक्त भूमि का अधिपत्य सौंपा था। 25 नवम्बर 1985 को मामा ने गुरूदीन के नाम पर वसीयत बनाई थी, मौत के बाद पूर्व से रह रहे गुरूदीन का उक्त भू-खण्ड पर कब्जा और मालिकाना हक है।
खरीदी बेनामी संपत्ति
गुरूदीन ने बताया था कि दानदाता के नाती के माध्यम से जमीन की बिक्री पहले कस्तूरी बाई पति स्व. रामकुमार गोड़ के नाम पर हुई और बाद में करोड़ों का यह भू-खण्ड ग्रीन सिटी में चौकीदारी करने वाले गोड़ जनजाति के युवक कमलेश सिंह पिता मोती लाल निवासी भागा, पोस्ट लफदा के नाम पर गुड्डू रस्तोगी ने बेनामी संपत्ति के रूप में क्रय कर ली। सूत्रों की माने तो प्रशासन ने कमलेश नाम युवक से कभी पूछने की जहमत नहीं उठाई कि चौकादारी करने के दौरान तुम्हारे पास इतनी दौलत कहां से आई। अगर ऐसा नहीं है तो, कमलेश बीते वर्षाे में जिले में हुई बड़ी-बड़ी चोरियों या अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल होकर पैसे कमाये हैं, अगर पुलिस और आयकर विभाग कमलेश से गहनता से पूछताछ करे तो, पूरा मामला साफ हो सकता है और संभवत: बड़ी चोरियों का खुलासा भी हो सकता है।
दर्जनों आवेदन, सब सिफर
गुरूदीन ने गुड्डू रस्तोगी के खिलाफ प्रताडऩा और बेनामी संपत्ति खरीदकर उसे परेशान करने की शिकायत पुलिस को बीते वर्षाे में कई बार दी है, अलबत्ता 75 वर्षीय वृद्ध ने बीते 15 सालों से लेकर अब तक थाने व पटवारी से लेकर ग्वालियर तथा जबलपुर उच्च न्यायालय तक के दर्जनों चक्कर लगाये, सैकड़ों आवेदन दिये, गुरूदीन के पास रखे दर्जनों दस्तावेज इस बात के प्रमाण हैं कि जनप्रतिनिधि और जिले की कमान देखकर कलेक्टर और एसपी न्याय के कितने भी दावे क्यों न कर लें, लेकिन जब बात गुड्डू जैसे अरबपति कारोबारी और उसके सत्ता व प्रशासनिक गलियारों में दखल की आती है तो, न्याय के कोरे दावे फाईलों की शोभा बढ़ाते हैं। सूत्रों की माने तो वर्तमान में गुड्डू के गुर्गे रात ेके समय उक्त स्थल पर जाकर शराब खोरी करते हैं, इस मामले की मौखिक शिकायत गुरूदीन ने सोहागपुर थाना में पदस्थ कर्मचारी को दी है, लेकिन वह भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं।
जमीन कमलेश की, दखल गुड्डू का?
एनएच-43 जमुआ के जिस भू-खण्ड को लेकर गुड्डू रस्तोगी पर आरोप लग थे कि जिस मामले को लेकर वृद्ध ने आत्मदाह का अल्टीमेटम दिया था, वह भू-खण्ड कमलेश सिंह गोड़ का है, सवाल यह उठता है कि कमलेश सिंह गोड़ से गुड्डू का कनेक्शन क्या है, कमलेश के संदर्भ में बताया गया कि वह ग्रीन सिटी में चौकीदार है। तो सवाल यह उठता है कि उसके पास करोड़ों रूपये जमीन खरीदने के लिए कहां से आये, आरोप तो यह भी है कि अकेला कमलेश ही नहीं, जिसके नाम पर गुड्डू ने सीमेंट की कालाबाजारी व प्रापर्टी का हेरफेर कर कमाये गये काले धन से दर्जनों स्थानों पर बेनामी संपत्ति खरीदी हुई है।
यह है गुड्डू के रसूख का जलजला
गुरूदीन शर्मा सहित संभागीय मुख्यालय में गुड्डू को जानने वालों पर यकीन करें तो, गुड्डू ने बीते एक दशक के दौरान सीमेंट की कालाबाजारी कर लाखों नहीं बल्कि करोड़ों की संपत्ति बनाई है, सीमेंट कंपनियों से अनूपपुर, उमरिया व शहडोल के ग्रामीण क्षेत्रों के नाम पर सीमेंट की खरीदी कर उन्हें सीधे उत्तरप्रदेश भेजा जाता रहा है, जिससे करोड़ों की कर चोरी बीते वर्षाे में की गई है, हालाकि यह जांच का विषय है, बकौल गुरूदीन शर्मा ने कहा था कि गुड्डू का रसूख इतना है कि वह अधिकारियों को हर चीज मुहैया करा रहा है, यही कारण है कि तहसीलदार सहित अन्य पुलिस अधिकारी 15 सालों से मेरे आवेदनों को कचरे में फेंक रहे हैं, यही नहीं नौकरशाहों और धनकुबेर के गठबंधन का आलम यह है कि उच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत तहसील न्यायालय आदेश जारी कर देते हैं। बीते कुछ वर्षाे में गुड्डू का रसूख इस कदर बढ़ा कि रेत से लेकर प्रापर्टी के कामों में गुड्डू की उपस्थिति सबको नजर आने लगी, शहडोल मुख्यालय में बस स्टैण्ड के समीप आधुनिक सुविधाओं से लैस होटल के अलावा पीसीबी के समीप 5 सितारा होटल की आधार शिला रखी जा रही थी, मुख्यालय में राजेन्द्र क्लब से लेकर रोटरी क्लब विभिन्न सामाजिक संगठनों में दखल रखने वाले गुड्डू रस्तोगी का नाम शहडोल संभाग के अग्रिम पंक्ति के अरबपतियों में शुमार है।

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