तो क्या…विधायक का रहा फर्जी शिकायती पत्र

प्रभारी सहायक लेखाधिकारी से त्रस्त रोजगार सहायकों ने दिया स्तीफा
जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष ने कार्यवाही की मांग की

(Amit Dubey+8818814739)
शहडोल। जनपद में पदस्थ अदने से बाबू के कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उसे हटाने के लिए भाजपा की उपाध्यक्ष, कांग्रेस के अध्यक्ष और क्षेत्रीय भाजपा विधायक पत्र लिख रहे हैं, त्रस्त दो रोजगार सहायक स्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उसके ऊपर कार्यवाही और बीते वर्षाे में कमाई गई बेहिसाब दौलत का साहस जिंप के जिम्मेदार नहीं इक_ा कर पा रहे हैं, लेकिन इस मामले में अब विधायक के यूं टर्न लोगों को हैरानी में डाल दिया कि विधायक के पत्र में उल्लेखित अंक, उनके हस्ताक्षर सहित पदमुद्रा वाले पत्र का दुरूपयोग लोगों द्वारा किया जा रहा है और विधायक ने सप्ताह भर बाद भी थाने में शिकायत दर्ज नहीं कराई।
मैंने जारी नहीं किया पत्र
जनपद पंचायत बुढ़ार बीते 1 साल से सहायक लेखाधिकारी के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया है, वर्षाे से जनपद में पदस्थ श्रवण कुमार त्रिपाठी नामक कथित कर्मचारी के व्यवहार से तंग आकर बीते दिनों दो रोजगार सहायकों ने स्तीफा भी दे दिया है, यही नहीं 5 सितम्बर को क्षेत्रीय विधायक मनीषा सिंह और उसके बाद जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती अन्नू रानी सिंह के बाद 8 सितम्बर को जनपद के अध्यक्ष व कांग्रेस अध्यक्ष ललन सिंह ने भी श्रवण त्रिपाठी के क्रियाकलापों से कलेक्टर को अवगत कराया, लेकिन अभी तक उसके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है। सोचनीय पहलू यह है कि अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के पत्रों को लेकर अभी कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विधायक द्वारा जारी किये गये पत्र का खण्डन करते हुए बताया कि मेरे द्वारा ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया है।
अब पत्र क्रमांक सहित फर्जी पत्र
बाबू की कारगुजारियां पूरे जनपद तथा जिला पंचायत के गलियारों में अर्से से गूंज रही हैं, लेकिन जिम्मेदार शायद धृष्टराज बने हुए हैं, बाबू के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में अल्प मत में चल रही सरकार उपचुनाव कर पूर्ण बहुमत के प्रयास में हैं और ऐसे में सत्ताधारी दल की महिला विधायक की कलेक्टर नहीं सुन रहे हैं। जैतपुर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह ने 6 दिन पूर्व कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह को विभागीय पत्र क्रमांक 320 के माध्यम से कथित बाबू को हटाने के लिए पत्र लिखा, कथित बाबू के आगे सत्ताधारी दल की नेत्री का कद बौना हो चुका है। संभवत: अधिकारियों को पहले ही भान हो चुका था कि कथित पत्र फर्जी है, लेकिन विधायक का आज तक न ही हस्ताक्षर के मिलान करवाये और न ही कथित पत्र के बारे में थाना में शिकायत दर्ज करवाई।
….तो क्या पाक साफ हैं त्रिपाठी
विधायक ने अपने पत्र के बारे में कहा कि इस तरह का कोई भी पत्र कलेक्टर को देने की बातों का खण्डन किया, उन्होंने कहा कि मेरे नाम व पदमुद्रा का किसी ने दुरूपयोग किया है। मैनें इस संदर्भ में कोई भी पत्र नहीं दिया है, लेकिन लोगों का कहना है कि अगर विधायक द्वारा पत्र नहीं लिखा गया है, तो क्या बाकी अन्य जनपद के प्रतिनिधियों के भी पत्र फर्जी हैं और उनमें श्रवण कुमार त्रिपाठी पर लगे आरोप भी क्या गलत हैं। खैर मामला चाहे जो हो अगर श्रवण त्रिपाठी के खिलाफ झूठी या फर्जी शिकायत हुई है तो, विधायक को स्वयं आगे आकर थाना में शिकायत दर्ज कराकर आरोपी को पकड़वाने के लिए पहल करनी चाहिए।

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