तो क्या…बंद हो जाने चाहिए जिला कार्यालय

उमरिया में रद्दी से ज्यादा नहीं आदेशों के मायने

5 माह में जांच दल नहीं पहुंच सका करकेली

स्मरण पत्र भी नहीं करवा पाया जांच

उमरिया। जहां देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री देश और प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त करना चाहते हैं, वहीं पर ग्राम नहीं जनपद कि भ्रष्टाचार की पोल सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त शासन को आर.के. मण्डावी जैसे अधिकारी ठेंगा दिखा रहे हैं। जनपद के अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में जहां पीछे नहीं है, वहीं जांच अधिकारी जांच के नाम पर लीपापोती करते दिखाई दे रहे है, जहां सरकार बड़े-बड़े दावे कर भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने की पहल कर रही है, वहीं जिले की करकेली जनपद के मुखिया पर लगे पूर्व तथा वर्तमान में भ्रष्टाचार के दर्जनों आरोप लगे है, बावजूद इसके जांच अधिकारी द्वारा आज तक प्रमाणित भ्रष्टाचार होने के बावजूद अपनी जांच रिपोर्ट अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पाये।
थमने का नाम नहीं ले रहा भ्रष्टाचार
जनपद पंचायत करकेली में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। यहां कमीशन के चक्कर में गुणवत्तहीन निर्माण कार्यों का मूल्यांकन कर शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया गया हैं। वर्ष 2019 में जनपद में बीआरजीएफ योजना के तहत हुए निर्माण कार्य में खुला भ्रष्टाचार का खेल-खेला गया है, जिसकी शिकायत होने के बाद जिले में बैठे अधिकारियों ने जांच दल का गठन कर 7 दिन में प्रतिवेदन मांगा था, लेकिन संभवत: आज तक परियोजना अधिकारी मनरेगा प्रदीप उपासे, रामनाथ चंदेले तकनीकी विशेषज्ञ वाटर शेट, आर.पी. सिंह लेखापाल ने आज तक अपनी जांच रिपोर्ट जिला पंचायत के मुखिया को नहीं सौंपी।
कटघरे में जांच अधिकारी
शिकायतकर्ता ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी को नवम्बर माह में शिकायत सौपतें हुए जांच अधिकारियों को कटघरे में खड़ा किया था, शिकायतकर्ता ने शिकायत में उल्लेख किया कि जांच अधिकारी भी सीईओ करकेली के भ्रष्टाचार में सहभागी हैं, उन्हें भ्रष्टाचार करने की छूट दे रखी हैं, कार्यालय जिला पंचायत द्वारा जांच अधिकारियों को 22 नवम्बर को भ्रष्टाचार के कार्यवाही के संबंध में स्मरण पत्र जारी किया था, जिसमें कार्यवाही का प्रतिवेदन 3 दिवस के भीतर मांगा गया था, लेकिन संभवत: दोबारा पत्र जारी करने के बाद भी जांच अधिकारियों ने जवाब प्रस्तुत नहीं किया। नहीं करी हमने जांच
जिला पंचायत कार्यालय से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत करकेली द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार की जांच के लिए 4 सितम्बर को जांच समिति का गठन किया था, उसके बाद 07 दिवस के भीतर प्रतिवेदन मांगा गया था, लेकिन 5 माह बीतने के बाद भी कथित जांच अधिकारी उमरिया जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूरी पर स्थित करकेली जनपद नहीं पहुंच सके। मजे की बात तो यह है कि जिला पंचायत से पत्र जारी होते रहे और कथित जांच अधिकारियों ने इस पत्र को कितनी गंभीरता से लिया, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि स्मरण पत्र के बाद भी अपना जवाब जिला पंचायत कार्यालय को प्रस्तुत नहीं किया। जांच अधिकारी प्रदीप उपासे ने यह कहकर पल्लाझाड़ लिया कि मैं अकेला जांच टीम में नहीं हूं, अगर बाकी दो चलने को तैयार हैं तो, मैं भी चल दूंगा, वहीं दूसरे अधिकारी रामनाथ चंदेले का कहना है कि प्रदीप उपासे अवकाश पर थे, जब बोले तब जांच कर ली जायेगी।
अधिकारियों को कितनी तवज्जो
वैसे तो जिला पंचायत के मुखिया अपने सख्ते रवैये के कारण चर्चाओं में बने रहते हैं, लेकिन परियोजना अधिकारी मनरेगा प्रदीप उपासे, रामनाथ चंदेले तकनीकी विशेषज्ञ वाटर शेट, आर.पी. सिंह लेखापाल ने उनके ही कार्यालय से जारी हुए पत्र को रद्दी से ज्यादा कुछ नहीं समझा, 5 माह पूर्व जारी हुए आदेश के बाद दिखावी जांच तक के लिए करकेली नहीं पहुंच सके, इससे जहां भ्रष्टाचार मुक्त शासन की हवा निकलती दिख रही है, वहीं दूसरी ओर जिले में बैठे अधिकारियों को उनके ही कर्मचारी कितनी तवज्जो देते हैं, यह स्पष्ट समझा जा सकता है।
इनका कहना है…
मामला संज्ञान में ले लिया गया है, जल्द ही जांच पूरी कर ली जायेगी।
जी. एस. टेकाम
अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जिला पंचायत, उमरिया

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