30 मिनट में सहायता राशि और 3 वर्षाे की फीस माफ

(संतोष टंडन)
शहडोल। जनसुनवाई और सुनवाई के तत्काल बाद आवेदक को राहत, महज 30 मिनट के अंदर कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह ने जनसुनवाई में पहुंची महिला और उसकी बच्ची की व्यथा सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए अधीनस्थ विभागों से उस फैसले को अमलीजामा भी पहना दिया, जनसुनवाई में आये तमाम आवेदकों और इस दौरान वहां उपस्थित विभागीय अधिकारियों ने जब इस घटना क्रम को अपने सामने देखा तो, शासन की जनसुनवाई कार्यक्रम व कलेक्टर की तत्परता के सब कायल हो गये।
यह हुआ जनसुनवाई में
मंगलवार की दोपहर 12 बजे के आस-पास जनसुनवाई कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से दर्जनों आवेदक पहुंचे थे, सबकी अपनी-अपनी समस्याएं व शिकायतें थी, इसी भीड़ के बीच जयसिंहनगर विकास खण्ड के ग्राम भत्तू में रहने वाली प्रमिला पटेल अपनी बच्ची ईशिका पटेल के साथ वहां पहुंची थी। कलेक्टर को दिये गये आवेदन में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला, बच्चे की दुर्घटना में मौत, पति की बेरोजगारी और अतिक्रमण के दौरान दुकान हटने का उल्लेख तो था ही, महिला ने यह भी बताया कि उसकी बच्ची को रक्त संबंधी बीमारी भी है, लेकिन वह पढऩे-लिखने में काफी तेज है, आर्थिक स्थिति इतनी डामाडोल है कि पेट भरने की लाले पड़े हैं, ऐसी स्थिति में होनहार लाडली का चयन मेडिकल कॉलेज के बीएमएलटी में होने के बाद भी सामने अंधेरा ही अंधेरा नजर आ रहा है।
त्वरित फैसला, साकार हुई योजना
कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह ने महिला और बच्ची से करीब 10 मिनट तक चर्चा के दौरान उनका आवेदन लिया और अगले 15 से 20 मिनटो में बाकी कार्याे को किनारे कर, समस्या का अंत भी कर दिया। त्वरित पढ़ाई व अन्य मदद के लिए रेडक्रास सोसायटी को 10 हजार रूपये सहायता के आदेश दिये गये, मौके पर ही पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के संचालक कौशलेन्द्र सिंह को तलब किया गया, बच्ची से तमाम शैक्षणिक दस्तावेज और बैंक पासबुक आदि लिए गये, संभवत: आज रेडक्रास से बच्ची के खाते में 10 हजार की राशि भेज दी जायेगी, जिसके लिए मंगलवार की शाम तक समस्त औपचारिकताएं पूरी कर ली गई थी, इतना ही नहीं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के माध्यम से बच्ची को उन तमाम दस्तावेजों की सूची तैयार करवाकर उसका ऑन लाईन आवेदन छात्रवृत्ति के लिए करवाया गया, जिससे बीएमएलटी की लगभग आगामी 3 वर्षाे की फीस उसे छात्रवृत्ति के रूप में मिल जायेगी। इस संबंध में बच्ची और उसके परिवार की मदद के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से भी चर्चा कर ली गई।

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