ड्रग्स के प्रकरणों हेतु लोक अभियोजन बनायेगा टास्क फोर्स

  •  पुलिस को विधिक राय प्रदान करेगी अभियोजन टास्क फोर्स, 650 से अधिक अभियोजन अधिकारी प्रशिक्षण में हुये सम्मिलित

सिंगरौली (शशिकांत कुशवाहा) । लोक अभियोजन ने ऑनलाईन वेबिनार के माध्यम से एन.डी.पी.एस. एक्ट 1985 पर प्रशिक्षण आयोजित किया। प्रशिक्षण में पुरूषोत्तम शर्मा, महानिदेशक लोक अभियोजन म.प्र. मुख्य अतिथि रहे। साथ ही जी.जी. पाण्डे व आई.जी. नारकोटिक्स इन्दौर विशेष अतिथि, उमेश श्रीवास्तव अति0 जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंदौर मुख्य वक्ता एवं अन्य विशेषज्ञ रहे।
उपरोक्त प्रशिक्षण में बेबीनार के माध्यम से जिला सिंगरौली से महेन्द्र सिंह गौतम जिला लोक अभियोजन अधिकारी के नेतृत्व में जिले में पदस्थ सभी अभियोजन अधिकारी प्रशिक्षण में सम्मिलित हुये।
650 से अधिक अभियोजन अधिकारी सम्मिलित
श्रीमती मौसमी तिवारी, प्रमुख जनसंपर्क अधिकारी, संचालनालय लोक अभियोजन मप्र द्वारा बताया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा मोहम्मद अकरम शेख राज्य समन्व्यक एन.डी.पी.एस. एक्टध् डीपीओ इंदौर द्वारा तैयार की गई तथा कार्यक्रम का संचालन भी किया गया। प्रशिक्षण में लोक अभियोजन विभाग के 650 से अधिक अभियोजन अधिकारी सम्मिलित हुए।
पुलिस महानिदेशक ने कहा
प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि श्री शर्मा ने अपने उद्बोधन में ड्रग्स के व्यवसाय के राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा करते हुए बताया कि यह अपराध अत्यंत गंभीर अपराध हैं क्योंकि यह किसी राष्ट्र के आने वाली पीढ़ी को ही समाप्त करने की ताकत रखता है तथा उन्होंने अपने रुचिकर उद्बोधन में सत्य घटनाओं का उदाहरण देते हुए इस अपराध से जुड़े धन व साजिश को समझाते हुए अपराध की गंभीरता पर प्रकाश डाला। अपने वक्तव्य में महानिदेशक ने व्यक्त किया कि इन अपराधों के उचित निराकरण हेतु अनुसंधान के समय से ही पुलिस को अभियोजन अधिकारी से सहायता प्राप्त कर उचित रूप से एक्ट के प्रावधानों का पालन करते हुए सबूत जुटाने होंगे उन्होंने श्री अकरम शेख राज्य समन्वयक एन.डी.पी.एस. एक्ट को मध्य प्रदेश में एक टास्क फोर्स गठित करने के लिए निर्देशित किया जो कि अपने-अपने जिले में अनुसंधान में पुलिस को उचित विधिक राय प्रदान करेंगे व प्रकरण की उचित स्क्रूटनी करेंगे। उन्होंने अपने उद्बोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि मध्य प्रदेश लोक अभियोजन को इंस्ट्रूमेंट ऑफ सोशल चेंज सामाजिक परिवर्तन का साधन बनना होगा।
श्री शर्मा ने अपने उद्बोधन में (एन.डी.पी.एस. एक्ट 1985) के बारे में बताते हुए कहा कि यह अधिनियम 14 नवम्बर 1985 से संपूर्ण भारत में लागू किया गया। इस अधिनियम की धारा 8 के द्वारा स्वापक औषधि एवं मनरू प्रभावी पदार्थां के संबंध में प्रत्येक प्रकार के संव्यवहार को प्रतिबंधित किया गया है अर्थात् कोका, कैनेबिस हेम्प, अफीम का किसी भी मात्रा में क्रय, विक्रय, कब्जा, आयात, निर्यात, परिवहन आदि नहीं किया जा सकता है।
ड्रग्स की मात्रा के आधार पर ही दण्ड का निर्धारण
अधिनियम के अंतर्गत् तीन प्रकार की मात्रा निर्धारित की गई है, अल्प मात्रा, मध्य मात्रा एवं व्यापारिक मात्रा और इस मात्रा के आधार पर ही दण्ड का निर्धारण किया जाता है कि उस अपराध का विचारण किस न्यायालय द्वारा किया जाएगा। अल्प मात्रा वाले अपराधों का विचारण मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा किया जाता है और मध्य एवं व्यापारिक मात्रा वाले अपराधों का विचारण विशेष न्यायालय द्वारा किया जाता है।
प्रदेश में ड्रग्स के 3572 मामले लंबित
वर्तमान में म0प्र0 के हर जिले में विशेष न्यायालय का गठन किया जा चुका है जिनमें लगभग 3572 प्रकरण लंबित है। वर्तमान में म0प्र0 के प्रमुख जिलों के विशेष न्यायालयों में अभियोजन का संचालन रेगुलर कैडर द्वारा किया जा रहा है तथा शेष जिलों में जीपीध्एजीपी अभियोजन का संचालन कर रहे हैं। मेरे द्वारा म0प्र0 शासन को एक प्रस्ताव भेजा गया है कि व्यापारिक एवं मध्य मात्रा वाले अपराधों को चिन्हित अपराध की श्रेणी में रखा जाए, जिसमें रेगुलर कैडर के अधिकारी द्वारा पैरवी की जाएगी जिससे ऐसे प्रकरणों में सजा का प्रतिशत बढाया जा सकेगा।
श्री शर्मा ने यह भी कहा कि एन.डी.पी.एस. एक्ट में आरोपी की दोषसिद्धि आवश्यक है क्योंकि जो अपराधी इस अधिनियम के अंतर्गत् अपराध कर रहें हैं वह वास्तव में नशे का कारोबार कर अन्य अपराधों को भी जन्म दे रहें हैं।
नशा ही है जघन्य अपराधों की वजह
वर्तमान में जो जघन्य अपराध किए जा रहें हैं वह नशा करने के उपरांत ही किए जा रहे हैं और जब व्यक्ति को नशे की लत लग जाती है तो वह अपने नशे की पूर्ति के लिए भी अपराध करता है। श्री शेख के नेतृत्व में म0प्र0 के अभियोजन अधिकारी, एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रकरणों में अपराधियों को अधिक से अधिक सजा से दण्डित करायें।
महानिदेशक नारकोटिक्स इंदौर ने कहा
वहीं गिरधर पाण्डे महानिदेशक, नारकोटिक्स इंदौर ने भारत में होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी के बारे में बताया। उन्होंने प्रिकरसर केमिकल के विषय में बताते हुए कहा कि हेरोइन, कोकीन जैसे नशीले पदार्थ के अवैध उपयोग को रोकने की आवश्यकता है एवं उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन में आतंकवाद और ड्रग स्मग्लिंग के आपस में संबंध पर भी प्रकाश डाला। इसी कडी में उमेश श्रीवास्तव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, इंदौर ने एन.डी.पी.एस. एक्ट के प्रकरणों का अभियोजन संचालन एवं संचालन में आने वाली बाधाओं विषय पर व्याख्यान दिया।

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