खनिज का बाबू लील गया मरघट की भूमि

मेडिकल कॉलेज रोड में चांपा पंचायत का मामला

सरपंच की शिकायत पर कलेक्टर के आदेश से हुई जांच

पटवारी ने जांच रिपोर्ट तहसीलदार एवं एसएलआर को सौंपी

 

शहडोल। जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चांपा के ग्राम कुदरी में श्मशान के लिए आवंटित शासकीय भूमि को भी अतिक्रमणकारी नहीं छोड़ रहे हैं। तीन एकड़ जमीन में अधिकांश जमीन अवैध अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई है और मात्र 20 डिस्मिल जमीन शेष बची है, जो गांव के लोगों के लिए मृतकों का अंतिम संस्कार करने हेतु बहुत कम है। मजे की बात यह है कि यह जमीन कोई और बल्कि खनिज विभाग के एक कर्मचारी ने अतिक्रमण कर रखा है। यह बात अलग है कि यह कर्मचारी दावा करता है कि उसने 3 दशक पहले यह जमीन क्रय की है। उसका यह भी दावा है कि उसने जमीन की बकायदे रजिस्ट्री भी करा रखी है, एक तरफ सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन माफियाओं के अतिक्रमण पूरी ताकत से हटाने में जुटा हुआ है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन का ही एक बंदा सरकारी जमीन पर कब्जा जमाये हुए है।
सरपंच की शिकायत पर हुई जांच
ग्राम पंचायत चांपा की महिला सरपंच श्रीमती कुशम बाई बैगा ने कलेक्टर से शिकायत की है कि मरघट की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर लिया गया है। जिसके कारण गांव के नागरिकों को अंतिम संस्कार में परेशानी हो रही है, इस जमीन को तत्काल मुक्त कराया जाये।
कलेक्टर ने दिये जांच के आदेश
महिला सरपंच की शिकायत पर वर्तमान कलेक्टर डॉ. सतेन्द्र सिंह द्वारा उक्त मामले की जांच के लिए एसएलआर को आदेश दिया है, इस आदेश के बाद पटवारी सत्यनारायण मिश्रा द्वारा जांच करके प्रतिवेदन सोहागपुर तहसीलदार एवं एसएलआर को सौंप दी गई है। इस जांच प्रतिवेदन में साफ तौर पर बताया गया है कि ग्राम कुदरी के खसरा नंबर 11 एवं 12 में छोटे झाड़ का जंगल दर्ज है, जो कि शासकीय है तथा खसरा नंबर 12 की जमीन को मरघट के लिए लगभग 3 एकड़ आवंटित किया गया है। पटवारी ने यह भी लिखा है कि रमेश तिवारी द्वारा उक्त जमीन पर गन्ना की खेती एवं गेहूं की पैदावार की जा रही है, इसके अलावा 30&12 साईज की जमीन पर मकान निर्मित कर लिया गया है।
पहले भी हो चुकी है शिकायत
सूत्रों का कहना है कि ग्राम पंचायत चांपा के पूर्व सरपंचों द्वारा भी मरघट की जमीन पर अतिक्रमण को हटाये जाने के संबंध में शिकायत की जा चुकी है, परन्तु सरकारी कार्यवाही में लेटलतीफी एवं अतिक्रमणकारी के दांव पेंच के चलते वर्षाे से यह मामला तहसील न्यायालय में लटका हुआ है। पटवारी का यह भी कहना है कि जांच से यह पता चला है कि खसरा नंबर 12 के 2 भाग हैं, जिसमें 12/1 में 0.400 एकड़ (19 डिस्मिल) जमीन शासकीय है और छोटे झाड़ का जंगल दर्ज है। इसी तरह 12/2 में 0.421 (एक एकड़ चार डिस्मिल) जमीन पूरी की पूरी मरघट के लिए दर्ज है। खसरा नंबर 11 में 0.372 एकड़ शासकीय जमीन है, जिसमें छोटे झाड़ का जंगल दर्ज है, ग्रामवासियों ने बताया है कि इस पूरे जमीन पर मरघट का उपयोग किया जाता रहा है, परन्तु अब मात्र 20 डिस्मिल जमीन बची है और शेष पूरी जमीन खनिज विभाग का बाबू लील गया है।
अतिक्रमणकारी क्या है दावा
ग्राम पंचायत की उक्त मरघट की जमीन में अतिक्रमण करने वाले रमेश तिवारी का दावा है कि यह जमीन उसके भाई राकेश तिवारी के नाम पर क्रयशुदा जमीन है, उसके भाई ने रामरतन अहीर से लगभग 30 साल पहले क्रय किया था, अभी-अभी जो शिकायत हुई है, उस पर तहसीलदार ने स्थगन भी दे दिया है और एक नया प्रकरण चालू हो गया है। तिवारी जी कहते हैं कि ऐसी शिकायतें पचासों बार हो चुकी है और बार-बार तहसील न्यायालय में प्रकरण चलता है और फैसला हमारे पक्ष में होता है।
इनका कहना है…
कलेक्टर के आदेशानुसार ग्राम पंचायत चांपा के ग्राम कुदरी के खसरा नंबर 11 एवं 12 की जांच की जाकर रिपोर्ट तहसीलदार एवं एसएलआर को सौंप दी गई है। शिकायत सही है और उक्त भूमि में छोटे झाड़ का जंगल शासकीय भूमि दर्ज है तथा लगभग 3 एकड़ भूमि मरघट के लिए आवंटित की गई है, किन्तु अतिक्रमण होने के बाद अब मात्र 20 डिस्मिल जमीन मरघट के लिए बची है।
सत्यनारायण मिश्रा
पटवारी, कुदरी

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