चिकित्सा विभाग पैथोलॉजी पर कार्यवाही कर भूला

आज भी भाड़े पर मिलती है डॉक्टरों की डिग्री

अधिकारियों ने कूड़े में डाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश

शहडोल। सुप्रीम कोर्ट ने पैथोलॉजी लैब को चलाने के लिए अब एमडी पैथोलॉजिस्ट योग्यता धारक का होना जरूरी माना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब हर कोई व्यक्ति या गैर योग्यता धारक लोग पैथोलॉजी लैब नहीं चला सकेंगे। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ) के उस निर्णय को सही माना था, जिसमें पैथोलॉजी लैब में पीजी की योग्यता धारकों द्वारा ही जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर को जरूरी बताया था, लेकिन संभाग में लगभग पैथोलॉजी में एमडी पैथोलॉजिस्ट नहीं है, ऐसा नहीं है कि विभागीय जिम्मदारों ने कार्यवाही नहीं की, लेकिन संभागीय मुख्यालय में ही यह कार्यवाही दिखावा साबित हुई।
कहां से आये पैथोलॉजिस्ट
संभाग की पैथोलॉजियों में डॉक्टर की डिग्री भाड़े पर लगाई गई है, सोचनीय पहलू यह है कि उक्त पैथोलॉजी को संचालन की किसने और किस मानक के तहत दे दी, अगर सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाईन एमडी पैथोलॉजिस्ट योग्यता धारक होना जरूरी है तो, आखिर संभाग के दूर अंचल की बात तो दूर, मुख्यालय में ही इतने एमडी पैथोलॉजिस्ट कहां से आ गये, यह समझ से परे हैं।
कमीशन लेकर देते अनुमति
संभागीय मुख्यालय सहित पूरे जिले में पैथोलॉजी का संचालन हो रहा है, ऐसा नहीं है कि जिन क्षेत्रों में पैथोलॉजी का संचालन हो रहा है, विभाग के जिम्मेदारों की नजर न हो, लेकिन एमडी पैथोलॉजिस्ट के बगैर अनुमति उक्त पैथोलॉजियों को कहां से मिली, यह बड़ा सवाल उठता है, चर्चा है कि उक्त पैथोलॉजी के संचालन की अनुमति कमीशन लेकर दी गई है।
तेजी से बढ़ा धंधा
हाल के वर्षों में प्राइवेट लैब का धंधा तेजी से बढ़ा है, इसकी वजह यह बताई जाती है कि जांच करने के लिए चाइना मेड उपकरण आने लग गए। ये काफी सस्ते होते हैं। बमुश्किल 3-4 लाख रुपए खर्च करके सेल काउंटर व शुगर जैसी जांचों की मशीनें कोई भी खरीद रहा है। लैब के रजिस्ट्रेशन की कोई व्यवस्था नियमों से नहीं चल रही है, मजे की बात तो यह है कि उक्त पैथोलॉजी कमिश्नर बंगले सहित जिला चिकित्सालय के आस-पास संचालित हो रहे हैं।
कार्यवाही या रजिस्टर हुआ अपडेट
बीते माह चिकित्सा विभाग ने संभागीय मुख्यालय सहित आस-पास के क्षेत्र में पैथोलॉजी पर छापामार कार्यवाही की थी, जहां लगभग पैथोलॉजी में चिकित्सक मौजूद नहीं थे, जिसके बाद उक्त पैथोलॉजी को जांच अधिकारियों ने नोटिस देकर जवाब चाहा था, लेकिन आज तक उन पैथोलॉजी पर चिकित्सा विभाग दोबारा कोई कार्यवाही नहीं की गई, संभवत: नोटिस दी गई पैथोलॉजी के साथ कुछ पैथोलॉजी को उक्त टीम ने सील भी किया था, कुछ पैथोलॉजी पुन: संचालित हो गई और बाकी जिन्हें नोटिस जारी हुआ था, वह आज भी भाड़े पर चिकित्सक की डिग्री लेकर पैथोलॉजी का संचालन कर रहे हैं, पूरे क्षेत्र में चर्चा है कि उक्त पैथोलॉजियों पर उस समय कार्यवाही हुई थी या जिम्मेदारों ने जुगाड़ के लिए कार्यवाही का ढ़ोग किया था।

 

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