शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में रणनीति पर शुरू हुए कार्य मे विपक्ष चारों खाने चित , हिट हुआ विधायक संजय पाठक का निर्विरोध वाला फार्मूला राजनीतिक विरोधी भी हुए सर्वानुमति की थ्योरी के आगे पस्त

शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में रणनीति पर शुरू हुए कार्य मे विपक्ष चारों खाने चित , हिट हुआ विधायक संजय पाठक का निर्विरोध वाला फार्मूला
राजनीतिक विरोधी भी हुए सर्वानुमति की थ्योरी के आगे पस्त

कटनी। यूँ तो बीजेपी जिले की सभी 6 जनपद तथा जिला पंचायत में बहुमत में थी, लेकिन कहते हैं पंच, सरपंच, जनपद और जिला पंचायत चुनाव में कब समीकरण बन जाये या बिगड़ जाए कुछ नहीं कहा जा सकता। भले ही यह चुनाव ग्रामीण क्षेत्र के होने के कारण शहरी चमक दमक से दूर हों पर इन चुनावों में जो राजनीति होती है उससे अच्छे से अच्छे सूरमावीर भी धरासायी हो जाते हैं। बहुमत के बावजूद उसी दल का अध्यक्ष, उपाध्यक्ष बन पाना भी बेहद कठिन होता है। कटनी में भी सभी 6 जनपदों तथा जिला पंचायत में यह काम किसी चुनौती से कम नहीं था, इस चुनौती को स्वीकारा विधायक संजय पाठक ने। शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन में एक ऐसी रणनीति पर काम शुरू किया जो विपक्ष को चारों खाने चित कर गई।
जनपद तथा जिला पंचायत में भाजपा के सदस्य ज्यादा चुनकर आये लिहाजा यह प्रतिस्पर्धा को कठिन बनाता गया। जनपदों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के कई-कई दावेदार सामने आने लगे। ऐसे में विधायक संजय पाठक ने एक ऐसे फार्मूले पर काम शुरू किया जो वैसे तो काफी कठिन था लेकिन यह था काफी प्रभावशाली। दरअसल इस पूरे चुनाव में जिम्मेदारी संभाल रहे विधायक संजय पाठक ने शुरू से ही यह कोशिश की कि अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव न हों उनका निर्विरोध निर्वाचन हो। इसी फार्मूले पर प्रयास सफल होने लगे, जनपद अथवा जिला सदस्यों से लगातार संपर्क के बाद यह रणनीति काम आई तथा 4 जनपदों में निर्विरोध निर्वाचन के साथ कटनी में नया इतिहास बन गया। संजय पाठक के निर्विरोध वाले इसी फार्मूले को जिला पंचायत में भी आजमाया गया, पहले तो विपक्षी यह मानने को ही तैयार नहीं थे, लेकिन फिर जैसे जैसे वक्त बीता श्री पाठक के प्रयास रंग लाने लगे, हालांकि आरक्षण के कारण केवल दो ही सदस्य अध्यक्ष के दावेदार हो सकते थे फिर भी संजय पाठक तथा उनके साथ विधायक प्रणय पांडे ने एक ही फार्म सुनीता मेहरा का दाखिल करा दिया यहां भी सर्वसम्मति से सदस्यों ने इस नाम पर सहमति जताई। इसके बाद पेंच जिला पंचायत उपाध्यक्ष को लेकर फंसा तो एक बार फिर श्री पाठक ने पार्टी के अंदर की रणनीति के तहत उपाध्यक्ष को लेकर सदस्यों की रायशुमारी करवा दी तथा जिसके पक्ष में ज्यादा सदस्य आये उसे ही फार्म भरवाया जिसमे बाजी मारी निवर्तमान जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा ने। कुल मिलाकर विधायक संजय पाठक ने भाजपा के इस ऐतिहासिक विजय रथ में एक बार फिर सारथी की भूमिका का शानदार निर्वहन करते हुए निर्विरोध के जिस फार्मूले को परिणीत कर दिखाया वह राजनीति के धुरंधरों को भी समझ मे नहीं आ रहा होगा। साफ है कटनी की राजनीति में एक बार फिर संजय पाठक ने जिला पंचायत, जनपद पंचायतों के चुनाव की चुनौती को बेहद कुशल रणनीति से विजय में परिवर्तित कर एक नया फार्मूला सेट किया है जो राजनीति के लिए आने वाले समय मे अच्छा ही माना जायेगा।

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