…तो सूदखोरों की दहशत से गायब हैं कल्लू और भईया!

अपराध जांच विभाग के पाले में सूदखोर

जोन मुख्यालय में ही शंखनाद की दरकार

शहडोल। पुलिस महानिदेशक द्वारा सीआईडी के माध्यम से सूदखोरों (अवैध साहूकारों) के विरुद्ध 01 दिसम्बर से 31 दिसम्बर तक विशेष अभियान चलाये जाने के निर्देश दिये हैं। जोन के सभी पुलिस अधीक्षक (शहडोल, उमरिया, अनूपपुर एवं डिण्डौरी) जनहित में इस अभियान को सफल बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं। अभियान की मूलभूत मंशा है कि अवैध साहूकारों के कारोबार को विधिवत रोकना और आम आदमी को सूदखोरी के कारण आर्थिक क्षति होने से बचाना। कई साहूकार ऋण के ब्याज की दरें शासन द्वारा निर्धारित दरों से अत्यधिक दर रखते हैं और ऋण की वसूली में ऋणियों को शारीरिक और मानसिक प्रताडऩा देते हैं, जिसके कारण ऋणी या उसके परिजन अवसादग्रस्त होकर आत्म हत्या जैसे कदम उठा लेते हैं। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए त्वरित विधिसम्मत कदम उठाना आवश्यक है।
नहीं होगी वसूली
साहूकारों-सूदखोरों और ऋणियों से संबंधित जानकारी जनता और पुलिस को पर्याप्त मात्रा में रहे। शासन के अधिनियमों और अधिसूचनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया जा रहा है, जिससे जनता जागरूक और आत्मनिर्भर बन सके। प्रदेश साहूकार संशोधन अधिनियम, 2020 अपंजीकृत साहूकारों द्वारा दिया गया उधार कतिपय परिस्थितियों में वसूलनीय नहीं होगा। यदि साहूकार अथवा अपंजीकृत साहूकार द्वारा किसी व्यक्ति को ऋण दिया गया है और उसे प्रताडि़त कर रहा है या शासन द्वारा निर्धारित ब्याज की दर से अधिक ब्याज की दर से ऋण की वसूली करता है तो पुलिस को ऐसी शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए विधिसम्मत कार्यवाही अधिनियमों के साथ-साथ भारतीय दण्ड विधान के सुसंगत धाराओं के अंतर्गत होगी।
चोरी-छुपे दे रहे अंजाम
संभागीय मुख्यालय अवैध ब्याज के व्यापार ने अपनी जड़ें इस कदर जमा ली है कि बीते माहों में हुए शंखनाद के बाद भी इस व्यापार के शिकार अपने शोषणता की कहानी बता रहे हैं। खबर है कि ब्याज के इस अवैध व्यापार को विगत 2008 से ज्यादा पकड़ मिली है, लाखों रूपये के काले धन को इस व्यापार में लगाया गया है। जिसमें अशोक, गुप्ता, गौरव, प्रभात, बब्लू, बब्बू, अकील, शैलेन्द्र, प्रदीप, बबुआ, टेढ़का, मनीष, गब्बर, ठाकुर, दीपक, ठुठुआ, अंकुर जैसे बड़े सूदखोर इस कारोबार को चोरी-छुपे अंजाम दे रहे हैं, ऐसा नहीं है कि इसकी जानकारी पुलिस को नहीं है, लेकिन पुलिस तक पीडि़तों के न पहुंचने के चलते इन पर खाकी हाथ नहीं डाल पा रही है।
शहर छोडऩे को मजबूर
मुख्यालय में पुलिस और प्रशासन के नाक के नीचे बड़े राजनीतिक पहुंच व प्रशासन में पकड़ रखने वाले लोगो ,अधिकारी ,व्यापारियों के अवैध पैसे को निचले स्तर पर इस कारोबार में लगाया गया है। सही समय पर कर्ज व ब्याज नहीं चुकाने पर गिरवी रखी वस्तु को बेचना , गाली गलौच करना ,मारना ,डराने का कार्य कर मानसिक रूप से शोषण किया जा रहा है। शहर में हुए कई हादसे इस से भी जुड़े हुए हैं, जहाँ गरीब ब्याज के चक्र में फंस कर खुद को नुकसान पहुंचाने या शहर छोड़ कर चले जाने में मजबूर हो गया है। अपराध जांच विभाग अगर जांच पड़ताल करे तो, रेलवे क्वाटर सहित आस-पास के क्षेत्र में कई सूदखोर निकलकर सामने आ सकते हैं।
कर्मचारियों को बनाते हैं निशाना
सूदखोरों से आसानी से पैसा मिल जाता है। सो, लोग इनके चंगुल में फंस जाते हैं, मगर दूरगामी परिणाम भयंकर होते हैं। इनकी ब्याज अब तक कई परिवारों को तबाह कर चुकी है। जिले भर में पंजीकृत सूदखोर की संख्या महज आधा दर्जन है, अवैध सूदखोरों की संख्या 100 से भी ज्यादा है। मुख्यालय के सूदखोर न सिर्फ गरीब बस्तियों को टार्गेट करते हैं, बल्कि इनकी नजर तृतीय श्रेणी, चतुर्थ श्रेणी के राज्य सरकार के कर्मचारी एवं रेलवे के कर्मचारी के साथ ही मध्यवर्गीय परिवार होता है, जिससे इन्हें धमकाकर वसूली करने में आसानी हो जाती है।
कोर्ट से भी वसूली नहीं
जानकारों की माने तो प्रदेश में साहूकार अधिनियम, 1934 में संशोधन किया गया है। संशोधन के अनुसार साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यदि कोई गैर लाइसेंसी साहूकार ऋण देता है तो, ऐसे सभी ऋण प्रदेश साहूकार अधिनियम, 1934 में प्रस्तावित नए प्रावधानों के अनुसार शून्यवत समझे जाएंगे। किसी भी न्यायालय के माध्यम से ऐसे कर्जे की वसूली भी नहीं की जा सकेगी। सूत्रों की माने तो शहर के बदमाश सूदखोरी का धंधा चला रहे हैं या सूदखोरों को इनका संरक्षण है। गुंडा तत्वों के डर से सूदखोरों का शिकार व्यक्ति पुलिस तक नहीं पहुंच पाता। अब देखना होगा कि राजधानी से मिले निर्देशों के बाद संभाग का अपराध जांच विभाग सूदखोरों को लेकर कितना गंभीर है।

 

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