अपराध छिपाने रिश्वत लेने वाला टीआई रंगे हाथों पकड़ाया

पैसे की खातिर पुलिस करती है इंसाफ से खिलवाड़

शहडोल। देश भक्ति, जनसेवा का नारा देने वाला विभाग तब शर्मिन्दा हो जाता है, जब उसके ही कर्णधार अपने फर्ज से बेजार होकर अपराध का आकार-प्रकार प्रभावित करने या गुनाहों को छिपाने का सौदा करते हैं। पुलिस विभाग अपने कर्मचारियों को भले ही न्यायशील व जिम्मेदार बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहा हो, लेकिन पुलिस विभाग भ्रष्टाचार से शायद ही कभी मुक्त हो सकेगा। हाल ही में जैतपुर थाना प्रभारी दयाशंकर पाण्डेय का ऐसा ही चेहरा उभर कर सामने आया है। उन्हें लोकायुक्त रीवा की टीम ने 16 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथो गिरफ्तार किया है। रिश्वत अपराध दर्ज नहीं करने के लिए ली जा रही थी। ज्ञातव्य है कि पूर्व में कोतवाली का एक एएसआई भी इसी तरह पकड़ा गया था। जनचर्चा है कि जब तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तब तक पुलिस विभाग जीरो टालरेंस बताकर इतराता फिरता है। ऐसा लगता है कि ईमानदारी का एक मात्र दीपक इसी विभाग में जल रहा है। जिस दिन रिश्वतखोर पकड़ जाते हैं उस दिन पोल खुल जाती है।
16 हजार लेते टीआई पकड़ाए
जिले के जैतपुर थाने में पदस्थ निरीक्षक (टीआइ) दयाशंकर पांडेय को 16 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त रीवा की पुलिस टीम ने रंगे हाथ पकड़ा है। उन्हे अपराध दर्ज नहीं करने के बदले में रिश्चत लेते हुए ग्राम कोटरी में गुरुवार की शाम 7  बजे लोकायुक्त ने उनके प्राइवेट वाहन चालक गौरीशंकर के घर के पास से पकड़ा है। यह कार्रवाई सोसायटी सेल्समैन अभय नन्द पाण्डेय निवासी ग्राम कोटरी की शिकायत पर की गई है। सेल्समैंन एक शिकायत के मामलेे में काफी परेशान किया जा रहा था।
प्रकरण दबाने के लिए मांगा पैसा
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने बताया कि निरीक्षक जियाउल हक ने आरोपित को ट्रैप किया है। उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता के विरूद्ध एससी, एसटी मामले की एक शिकायत थाने में की गई थी। जिसे शिकायतकर्ता फर्जी मान रहा था। प्राप्त शिकायत पर एफआईआर ना करने की एवज में टीआई जैतपुर द्वारा 30 हजार रुपए की मांग की गई थी। चूंकि रकम सेल्समैंन के हिसाब से अधिक थी, इसलिए उसे किश्तों में देने के लिए कहा गया था। 30 हजार की रकम में से 14000 रुपए पहले प्राप्त कर लिए थे। शेष रिश्वत की राशि 16000 रुपए लेते हुए गुरुवार को थाना प्रभारी पकड़े गए हैं। उप पुलिस अधीक्षक प्रवीण सिंह परिहार ने बताया कि पांच साक्षी सहित 12 सदस्यीय टीम के द्वारा कार्रवाई की गई है।
पूर्व में भी पकड़ाया था एएसआई
अपराध छिपाने के लिए कार्रवाई नहीं करने पहले भी एक कार्रवाई हुई थी। यह कार्रवाई कोतवाली शहडोल में पदस्थ एएसआई अरविंद दुबे पर की गई थी। उनके द्वारा रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त रीवा की टीम ने उन्हे पकड़ा था। इन घटनाओं से यह साफ जाहिर होता है कि पुलिस विभाग में अपराध को दबाने छिपाने का जमकर खेल चलता है और पैसे के दम पर इंसाफ को प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है। जिसमें पुलिस विभाग आरोपियों के साथ मिलकर पैसे की खातिर कानून व्यवस्था से गद्दारी करने से परहेज नहीं करता है। देश भक्ति, जनसेवा केवल एक स्लोगन है जिसकी व्यावहारिक कार्यशैली में खास अहमियत नहीं है।

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