पीएचई की उदासीनता से क्षेत्र में पानी का संकट!

क्षेत्र की आमजनता बूंद बूद पानी को मोहताज

जिम्मेदारों ने मूंदी आंख, ठेकेदार विभाग को ठहरा रहा जिम्मेदार!

शहडोल। आमजन को पानी की समस्या से निजात दिलाने जगह जगह हैण्डपम्प लगाये गये है। जिसके रखरखाव की जिम्मेदारी पीएचई विभाग की है, विभाग ने यह काम ठेकेदार को दे रखा है, लेकिन ठेकेदार बिना कुछ काम किये केवल कागजों में घोड़ा-दौड़ा शासन को चूना लगा रहा है। क्षेत्र में लोगों के पेयजल की व्यवस्था हेतु शासन द्वारा लगवाए गये हैण्ड पम्पों का समय पर मेंटेनेंस न होने से ज्यादातर पम्प केवल शोपीस बन कर रह गये है, विभागीय अमला ठेकेदार के साथ मिलकर चांदी काट रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार यहां का पीएचई लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के क्षेत्र में लगे हैंडपंपों के मेंटेनेंस और रखरखाव का काम ग्वालियर के किसी एस.समाधियां नामक ठेकेदार को दिया गया है। जिसके द्वारा एक बिना नम्बर की पुरानी कमांडर जीप जिसका कोई लीगल कागज नही है। जो ठीकठाक चलने की स्थित में भी नही है। जिसमें रोज विभाग के स्टोर से ठेकेदार के लोगों द्वारा पाइप राड़ और हैण्डपम्प से सम्बंधित सामग्री लाद कर जरुर ले जाई जाती है। पर क्षेत्र में हैण्डपम्पों का मेंटिनेंस नही किया जाता।
कमीशन के दम पर विभाग का चूना
लोगों का आरोप है की उक्त ठेकेदार के द्वारा यहां भवन निर्माण का काम ठेके पर किया जाता है। इसके द्वारा न्यायालय भवन सहित कुछ अन्य सरकारी बिल्डिंगों का नवनिर्माण कराया जाता है। क्षेत्र में हैंडपंपों के सुधार की बजाए इनकी भवन निर्माण के काम में अधिक दिलचस्पी बताई जाती है। समाधियां ठेकेदार यहां के पीएचई विभाग में पदस्थ अधिकारी से सांठ-गांठ कर कागजों में मेंटेनेंस दिखा कमीशन के दम पर विभाग को चूना लगा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगे कई हैंडपंप महीनों से बिगड़े पडे है। किसी में पाइप कम, किसी की पाइप खराब, किसी का वाटरलेवल नीचे चला गया। कुछ के सिलेन्डर तो कुछ राइजिंग पाइप, तो कुछ चैन टूटने तथा रख-रखाव के आभाव में खराब हो महीनों से बिगडे खड़े है। लोगों की शिकायत पर विभागीय अमला मेंटेनेंस का काम ठेके पर देने तथा सामग्री की कमी का रोना रो अपना पल्ला झाड रहा है।
ठेकेदार की लापरवाही
कई वर्षो से वर्षाकाल में औसत से कम वर्षा होने के कारण हालात यह है कि भूजल स्तर काफी तेजी के साथ नीचे खिसक रहा है। लगातार भू-जल स्तर नीचे जाने के चलते पानी हैंडपंपों की क्षमता से दूर होता जा रहा है । एक वजह यह भी है कि कुछ हैंडपंप पानी की जगह हवा फेंक रहे हैं, वहीं दूसरी वजह विभाग के स्टोर में सामग्री की कमी बताई जा रही है। जानकारों की माने तो विभाग के स्टोर प्रभारी टेक्नीशियन और ठेकेदार आपसी सांठ-गांठ कर महज कागजी खानापूर्ति से विभाग को लूट रहे है। ठेकेदार की लापरवाही व विभागीय अमले की अनदेखी से क्षेत्र में पानी की भीषण समस्या उत्पन्न हो गई हैं।
बिल्ंिडग निर्माण को ज्यादा महत्व
पीएचई लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में पदस्थ प्रभारी एसडीओ, इंजीनियर, टेक्नीशियन और अधीनस्थ कर्मचारी ठेकेदार से प्रभावित हो फर्जीवाड़ा कर शासन को गलत जानकारी भेज विभाग में उपलब्ध सामग्री को बाजार में बेंचने के आरोप लगते रहे है। सही गलत तो निष्पक्ष जाँच के बाद ही साफ होगा, यह सच है की हैण्डपम्पों के रख-रखाव का काम देखने बाले समाधियां ठेकेदार द्वारा सरकारी बिल्डिंगों के निर्माण का काम किया जाता है और क्षेत्र में हैण्डपम्पों के सुधार के लिऐ एक पुरानी कबाड़ कमांडर जीप जिसे बिना कागजात के चोरी की बताई जा रही है। जो कुछ किमी भी चलने की स्थिति मे नही दिखती जिसे पूरे क्षेत्र के हैण्डपम्पों के सुधार के लिऐ लगाया गया है। जिसे देख बास्तविक स्थित का अंदाजा लगाया जा सकता है।
समस्या के प्रति उदासीन
पीएचई विभाग की अनदेखी से पूरे क्षेत्र में पानी का भीषण संकट उत्पन्न है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं सीएम हेल्पलाइन तक लोगों की शिकायत के बाद भी क्षेत्र में भारी जलसंकट खड़ा है। यहां के जिम्मेदार क्षेत्रीय लोगों की इस गंभीर समस्या के प्रति उदासीन बने हुए है। जबकि यहां का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पीएचई कार्यालय सिविल लाइन में क्षेत्रीय विधायक शरद कोल के आफिस के ठीक बगल में स्थित है। हैंडपंपों का समय पर सुधार न होने से क्षेत्र की जनता बूंद-बूंद पानी को मोहताज है।
इनका कहना है…
मैं मानता हूं कि क्षेत्र में पानी का बड़ा संकट है, लेकिन मेरा काम विभाग को वाहन और लेबर उपलब्ध कराना है। बिगड़े हुए हैंडपंपों का सुधार करना विभाग के मैकेनिक का काम है, लेकिन यहां के विभाग में न कोई मैकेनिक है और न यहां हैंडपंपों के स्पेयर पार्ट है। मेरे द्वारा नियमित वाहन व लेबर भेजा जाता है। बिगड़े हैंडपंपों को बनाने वाले विभागीय कर्मचारी टेक्नीशियन वहीं का बिगड़ा हैंडपम्प बनाते है, जहां से पैसा पाते है। ऐसा भी नही की विभाग के आलाधिकारियों को यह पता नही है पर इस बिषय में कोई गम्भीर नही। क्षेत्र में जलसंकट की मुख्य बजह विभाग की उदासीनता है।
एस. समाधियां
ठेकेदार पीएचई

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